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मांडा में तीन सगे भाई-बहन तालाब में डूबे
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 29 Jul 2016 01:10 AM IST
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तीन बच्चे तालाब में डूबे
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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यमुनापार के मांडा इलाके में बृहस्पतिवार सुबह घर से कुछ दूर स्थित तालाब में नहाने उतरे तीन बच्चों की डूबकर मौत हो गई। अनहोनी का शिकार हुए बच्चों में दो सगे भाई और उनकी बहन है। ये तीनों बच्चे बृहस्पतिवार सुबह अपने दादा के साथ खेत पर गए फिर वहीं से तालाब में नहाने चले गए थे। उनके डूबने की आशंका पर तालाब में कुछ लोग उतरे तो शव मिले। घटना की जानकारी पाकर पुलिस पहुंची। हालांकि परिजनों के आग्रह पर पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए नहीं भेजा।
गौरेया कला गांव निवासी देवराज सिंह मुंबई में नौकरी करते हैं। उनकी पत्नी रेनू सिंह यहां गांव में ही ससुरालियों संग रहती है। उनके तीन बच्चे थे। बारह साल की बेटी शीतल कक्षा छह, नौ साल का अखिलेश कक्षा पांच और सात साल का अंश उर्फ कल्लू कक्षा दो में पढ़ता था। बृहस्पतिवार सुबह वे तीनों स्कूल जाने की बजाय अपने दादा बृजराज सिंह के साथ धान की रोपाई करने के लिए खेत की तरफ चले गए। दादा सिंचाई के लिए पाइप लेने चले गए तो बच्चे खेत से निकलकर कुछ दूर पर तालाब में नहाने पहुंच गए। बारिश की वजह से तालाब लबालब है। शीतल, अखिलेश, अंश उर्फ कल्लू तालाब में नहाने उतरे तो गहरे पानी में जाकर डूब गए।
कुछ देर बाद स्थानीय बस्ती के कुछ लोग उधर आए तो तालाब किनारे बच्चों के कपड़े देख सशंकित हुए। बच्चे नजर नहीं आए तो लोग उनकी तलाश में तालाब में उतरे। तीनों बच्चे पानी में डूबे मिल गए। उनकी मौत हो चुकी थी। यह खबर बच्चों के घर पहुंची तो हाहाकार मच गया। मां रेनू, दादा बृजराज सिंह, दादी नवाबी देवी समेत गांव के दर्जन लोग वहां पहुंच गए। फोन से मुंबई में पिता देवराज सिंह को घटना के बारे में बताया गया तो वह भी इलाहाबाद रवाना हो गया। मां रेनू को इतना गहरा सदमा पहुंचा कि वह रोते-चीखते बेहोश हो गई। महिलाएं उसे संभालती रहीं। मौके पर मांडा थाना पुलिस भी पहुंची हालांकि शव को कब्जे में नहीं लिया।
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शीतल को अपने भाइयों अखिलेश तथा अंश के साथ तालाब किनारे खड़ा देख गांव के कमलाशंकर तिवारी ने डूबने का खतरा बताकर फटकारा और घर जाने के लिए कहा। मगर बच्चे वहां से हटकर उत्तरी छोर पर जाकर तालाब में नहाने उतर गए। चेतानी के बावजूद तालाब में नहाने की जिद बच्चों के लिए जानलेवा साबित हुई। उनके परिजनों और रिश्तेदारों के ही आसपास के गांव के सैकड़ों लोग गम में डूबे हैं।
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गौरेया कला गांव निवासी देवराज सिंह मुंबई में नौकरी करते हैं। उनकी पत्नी रेनू सिंह यहां गांव में ही ससुरालियों संग रहती है। उनके तीन बच्चे थे। बारह साल की बेटी शीतल कक्षा छह, नौ साल का अखिलेश कक्षा पांच और सात साल का अंश उर्फ कल्लू कक्षा दो में पढ़ता था। बृहस्पतिवार सुबह वे तीनों स्कूल जाने की बजाय अपने दादा बृजराज सिंह के साथ धान की रोपाई करने के लिए खेत की तरफ चले गए। दादा सिंचाई के लिए पाइप लेने चले गए तो बच्चे खेत से निकलकर कुछ दूर पर तालाब में नहाने पहुंच गए। बारिश की वजह से तालाब लबालब है। शीतल, अखिलेश, अंश उर्फ कल्लू तालाब में नहाने उतरे तो गहरे पानी में जाकर डूब गए।
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कुछ देर बाद स्थानीय बस्ती के कुछ लोग उधर आए तो तालाब किनारे बच्चों के कपड़े देख सशंकित हुए। बच्चे नजर नहीं आए तो लोग उनकी तलाश में तालाब में उतरे। तीनों बच्चे पानी में डूबे मिल गए। उनकी मौत हो चुकी थी। यह खबर बच्चों के घर पहुंची तो हाहाकार मच गया। मां रेनू, दादा बृजराज सिंह, दादी नवाबी देवी समेत गांव के दर्जन लोग वहां पहुंच गए। फोन से मुंबई में पिता देवराज सिंह को घटना के बारे में बताया गया तो वह भी इलाहाबाद रवाना हो गया। मां रेनू को इतना गहरा सदमा पहुंचा कि वह रोते-चीखते बेहोश हो गई। महिलाएं उसे संभालती रहीं। मौके पर मांडा थाना पुलिस भी पहुंची हालांकि शव को कब्जे में नहीं लिया।
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शीतल को अपने भाइयों अखिलेश तथा अंश के साथ तालाब किनारे खड़ा देख गांव के कमलाशंकर तिवारी ने डूबने का खतरा बताकर फटकारा और घर जाने के लिए कहा। मगर बच्चे वहां से हटकर उत्तरी छोर पर जाकर तालाब में नहाने उतर गए। चेतानी के बावजूद तालाब में नहाने की जिद बच्चों के लिए जानलेवा साबित हुई। उनके परिजनों और रिश्तेदारों के ही आसपास के गांव के सैकड़ों लोग गम में डूबे हैं।