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एकौनी में पुलिस पहरे में रहा सन्नाटा

Tue, 31 May 2016 02:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Tue, 31 May 2016 02:10 AM IST
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kept silence in Akauni
कौंधियारा में मृत लोगों के दुखी परिजन। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
एकौनी गांव में रविवार को रात भर विलाप गूंजता रहा लेकिन सोमवार को दिन भर सन्नाटा पसरा रहा। पीड़ित परिवार और गांव के ज्यादातर पुरुष घटना के बाद फरार हो गए। कुछ पकड़ गए। दोनों परिवार की रोती-कलपती चार महिलाओं को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। ऐसे में घरों में रोने क लिए भी कोई नहीं बचा। रिश्ते के लोग भी पुलिस के पहरे में गांव में आने से कतरा गए। एकौनी में घटना के बाद से ही पुलिस-पीएसी का कड़ा पहरा रहा ताकि दोनों तरफ के लोगों में फिर टकराव नहीं होने पाए। आलम यह था कि मवेशियों को चारा-पानी के लिए तरसना पड़ गया। 
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रविवार शाम की घटना ने गांव वालों को दहलाया तो पुलिस विभाग में भी खलबली मचा दी। एक साथ पांच लोगों का कत्ल। मरने वालों में दरोगा समेत तीन खाकी वाले शामिल। खबर मिलने के बाद एकौनी गांव में आईजी जोन, कमिश्नर, डीआईजी, एसएसपी, प्रभारी डीएम समेत कई अफसर दस थानों की पुलिस फोर्स के साथ पहुंच गए। रात में ही पुलिस ने हत्याकांड में शामिल लोगों की धरपकड़ शुरू कर दी। सात लोगों को पुलिस ने आधी रात तक पकड़ लिया था। पुलिस छापेमारी की वजह से मृतकों के घरों में महिलाएं दरवाजे बंदकर रोती-चीखती रहीं। आधी रात बाद पुलिस ने बलपूर्वक घर में घुसकर दोनों तरफ की चार महिलाओं को भी पकड़ा तो गिरफ्तारी के डर से दोनों परिवार और गांव के ज्यादातर पुरुष भाग गए। सोमवार सुबह से गांव में आधा दर्जन थानों की पुुलिस के साथ पीएसी की भी कई टुकड़ियों को मुस्तैद कर दिया गया। भारी पुलिस बल और घरों से पुरुषों की फरारी की वजह से गांव में सन्नाटा छाया रहा। मृतकों के घर रिश्तेदार आते मगर परिजनों की गिरफ्तारी और पुलिस की मौजूदगी की वजह से कुछ देर ठहरकर चले जाते। पीड़ित परिवारों के मवेशियों को दोपहर तक चारा-पानी नहीं मिला। कहीं से यह बात पुलिस अफसरों तक पहुंची तो एक लड़के को लगाकर मवेशियों को चारा डलवाया गया। एसपी यमुनापार और एसडीएम बारा वहां मुस्तैद रहे। पुलिस अधिकारियों को आशंका है कि गांवं में दोनों पक्षों के बीच फिर टकराव और खून-खराबा हो सकता है। ऐसे में अगले कुछ रोज तक एकौनी गांव में पुलिस को निगरानी करनी पड़ेगी। 
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उनमें दुश्मनी थी पुरानी, मंदिर तो बना बहाना
एकौनी गांव में रविवार शाम हुए दो विरोधी परिवारों के बीच टकराव में पांच लोगों की हत्या की वारदात के पीछे मंदिर ही एकमात्र कारण नहीं था। पुलिस को जांच में पता चला कि मंदिर और जमीन पर रखा घूर हटाने को लेकर तनातनी जरूर हाल ही में बनी लेकिन उनके बीच दुश्मनी बरसों से बनी थी। इस रंजिश में मारपीट हुई तो केस भी दर्ज हुए। पूर्व दरोगा और उनके भाई-भतीजे के खिलाफ अलग से केस दर्ज हुए और गुंडा एक्ट भी पुलिस ने लगाया था। हालांकि इसके पीछे कहा जा रहा है कि मारे गए दरोगा सुरेश पांडेय का हाथ था जो स्थानीय पुलिस पर दबाव बनाता था।
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पांच कत्ल के बाद ग्रामीणों से पूछताछ और थाने का रेकार्ड चेक करने पर पुलिस को मालूम हुआ कि रामकैलाश पांडेय और शिवसेवक पांडेय के परिवार के बीच दुश्मनी दो दशक से भी ज्यादा पुरानी बनी थी। करीब बाइस साल पहले शिवसेवक पांडेय ने दरोगा रहते रामकैलास पांडेय समत तीन लोगों के खिलाफ चोरी के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था। फिर 2001 में विरोक्षी पक्ष की ओर से शिवसेवक पांडेय, भाई रामसेवक पांडेय, झल्लर पांडेय, कृष्ण सेवक के खिलाफ मारपीट, गालीगलौज और धमकी का केस लिखाया गया। रामकैलाश का पुत्र सुरेश पांडेय भी दरोगा बन गया तो वह अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर शिवसेवक पक्ष को मुकदमों में फंसाने लगा। छह साल पहले 2010 में भी रामसेवक पांडेय, झल्लर पांडेय, विमल पांडेय, अनिल कुमार उर्फ छोटकऊ और रोहित पांडेय के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज कराया गया था। पुलिस ने धरपकड़ भी की थी। रामसेवक और झल्लर के खिलाफ दो बार गुंडा एक्ट भी लगा। रविवार को दरोगा सुरेश की गोली का शिकार हुए शिवसेवक पांडेय के भतीजे विमल पांडेय के खिलाफ पिछले साल छेड़खानी का केस लिखा गया था। यूं दोनों पक्षों के बीच अदावत पुरानी थी। मगर तीन साल पहले रामकैलाश के मंदिर में पूजा को लेकर कहासुनी के बाद जब शिवसेवक ने वहीं बगल में अलग काली माता का मंदिर बनाने का फैसला किया तो रंजिश गहरा गई। रामकैलाश की तरफ से अलग मंदिर बनाने का विरोध किया जाता रहा। एसपी यमुनापार अशोक कुमार के मुताबिक, शिवसेवक ने ग्राम सभा की बंजर जमीन पर काली मंदिर का निर्माण शुरू किया था।

दस मई से नई दीवार बनाने का काम हो रहा था जो तल्खी का कारण बना। दोनों मंदिर के बीच में एक जगह पर रामकैलाश परिवार द्वारा घूर (गोबर) फेंका जाता रहा है। रविवार को शिवसेवक के भाई प्रेमसेवक ने यह घूर हटाने को कहा तो रामकैलाश ने कहा कि जमीन उनके कब्जे में है। घूर नहीं हटाया जाएगा। इसी बात पर झड़प होने लगी। शनिवार को ही रामकैलाश का पुत्र दरोगा सुरेश पांडेय कानपुर से पांच दिन की छुट्टी लेकर आया था। रविवार शाम करीब सवा छह बजे झड़प के दौरान वह तैश में आकर घर से लाइसेंसी राइफल लेकर बाहर निकला। झगड़ा बढ़ा और उसने शिवसेवक, उसके भाई कृष्ण सेवक, भतीजे विमल को गोली मार दी। उन तीनों की मौत हो गई। फिर गुस्साए लोगों ने दरोगा सुरेश और उसके पिता रामकैलाश को हमलाकर डाला।  

चार मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख मुआवजा
एसडीएम बारा ने ऐलान किया कि इस हत्याकांड में उन चार मृतकों के परिवार को किसान बीमा योजना के तहत पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी जिनके पास जमीन थी। ऐसे में शिवसेवक पांडेय, कृष्ण सेवक पांडेय, विमल पांडेय तथा दूसरी तरफ से रामकैलाश पांडेय को पांच-पांच लाख रुपये की सहायता मिलेगी। इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।  

रसूलाबाद और दारागंज घाट पर हुई अंत्येष्टि
दो पक्ष के पांच लोगों की टकराव में मौत की घटना में पुलिस को यह भी आशंका थी कि पोस्टमार्टम के बाद शव को अंतिम संस्कार की खातिर ले जाते समय फिर हंगामा किया जा सकता है। लोग शव रखकर चक्काजाम कर सकते हैं। ऐसे में अफसरों ने ऐसी स्थिति टालने के लिए पोस्टमार्टम हाऊस पर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी थी। साथ ही यह भी तय किया कि दोनों पक्ष के शव अलग-अलग समय पर पोस्टमार्टम हाऊस पर निकाले जाएं। यूं दोपहर बाद पहले दरोगा सुरेश पांडेय और उसके पिता रामकैलाश का शव पोस्टमार्टम हाऊस से पुलिस निगरानी में सीधे दारागंज घाट भेजा गया। फिर करीब पौन घंटे बाद शिवसेवक, कृष्णसेवक और नवीन के शवों को पोस्टमार्टम के बाद उनके रिश्तेदार पुलिस पहरे में रसूलाबाद गंगाघाट ले गए। सभी पांच शवों की अंत्येष्टि के दौरान पुलिस अधिकारी फोर्स के साथ मौजूद रहे। 

पिस्टल की गोली से मारा गया था दरोगा
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। वो यह कि दरोगा सुरेश पांडेय की मौत पिस्टल की गोली लगने से हुई थी। उसके माथे में गोली धंसकर नाक के नीचे से निकल गई थी। शरीर में गोली नहीं मिली लेकिन मौत का कारण गोली लगना ही था। अब सवाल उठ रहा है कि उसे किसने गोली मारी। वो भी पिस्टल से। पता चला है कि सुरेश के पास राइफल के साथ ही लाइसेंसी पिस्टल भी थी। चर्चा रही कि उसकी  पिस्टल छीनकर ही गोली मार दी गई थी। यह जांच का विषय है। उसके पिता रामकैलाश की मौत का कारण सरिया, लाठी, ईंट से पीटना रहा। दूसरे पक्ष के शिवसेवक के सीने से, विमल के चेहरे और कृषण मोहन के कमर में राइफल की गोली लगी थी। कृष्ण मोहन के शरीर में गोली फंसी मिली।


गर्भवती पत्नी बेहाल, बच्चे भी बेसहारा
जरा सी बात पर हुए पांच कत्ल ने कई परिवार को गम और मुसीबत में डाल दिया। मारे गए विमल की पत्नी पूनम के बारे में पता चला कि वह गर्भवती है। घटना के बाद से वह लगातार रोते-कलपते बेहाल हो गई। उधर, दरोगा सुरेश की पत्नी प्रवीण जेल चली गई तो उसके तीन बच्चे मुसीबत में फंस गए। वह ननिहाल वालों के भरोसे हैं। बाकी तीन मृतकों के भी परिवार के लोग भारी गम में डूबे हैं।
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