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हाल ही में जेल से सजा काट बाहर निकला था ज्ञानचंद्र
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 06 Jun 2016 12:24 AM IST
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नैनी जेल
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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योगेंद्र उर्फ बच्चा और धर्मेंद्र की हत्या में चंद्रभान यादव बाबा, उसके बेटे राजेश यादव, राजकुमार यादव, संतोष यादव तथा ज्ञानचंद्र उर्फ वकील आरोपी बनाए गए। राजेश यादव फरार है। जबकि चंद्रभान और राजकुमार को आजीवन कारावास की सजा हो गई। संतोष और ज्ञानचंद्र नाबालिग की सजा काटकर इस वक्त बाहर निकले थे। बताया जाता है कि ज्ञानचंद्र हाल ही में जेल से छूटा था।
एक दशक पहले योगेंद्र की हत्या के बाद गांव में खूब बवाल हुआ था। कई दिन तक गांव में पीएसी तैनात रही। दोबारा धर्मेंद्र की हत्या के बाद गांव में तनाव का माहौल बना। तब भी कई दिन तक पीएसी तैनात रही। रविवार शाम हुए बवाल के एक बार फिर गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। दूसरे गुट के शैलेंद्र यादव उर्फ लादे के घर पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है। घटना के बाद से शैलेंद्र का पूरा परिवार फरार हो गया है। मकान के मुख्य गेटों पर ताला लटका रहा। बवाल की आशंका को देखते हुए घर के बाहर भारी पुलिस फोर्स तैनात की गई है।
शेरडीह ग्रामसभा की महिला प्रधान तथा पूर्व प्रधान चंद्रभान यादव उर्फ बाबा की पत्नी सरस्वती देवी पर माह भर पहले थरवई थाना क्षेत्र में जानलेवा हमला किया गया था। अप्रैल माह के अंत में वह पंडिला महादेव दर्शन करने जा रही थीं। तभी बाइक सवार बदमाशों ने गोली चलाई थी। इसमें महिला ग्राम प्रधान को गोली के छर्रे लगे थे। साथ ही उसका हाथ भी टूट गया था। इस हमले में शैलेंद्र यादव उर्फ लादे व उसके साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था।
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तकरीबन छह माह पहले हुए प्रधानी के चुनाव में भी दोनों परिवार एक बार फिर आमने सामने थे। इसमें पूर्व प्रधान चंद्रभान यादव उर्फ बाबा की पत्नी सरस्वती देवी व दूसरे पक्ष सेे शैलेंद्र यादव उर्फ लादे की पत्नी ऊषा देवी मैदान में रहीं। पर चुनाव में सरस्वती देवी ने रिकार्ड मतों से जीत दर्ज की। उसने ऊषा को तकरीबन 13 सौ मतों के अंतर से शिकस्त दी और एक बार फिर गांव में अपनी खोई प्रतिष्ठा वापस पा ली थी।
महिला ग्राम प्रधान सरस्वती देवी के छोटे बेटे संतोष का विवाह अभी सवा माह पहले ही पूरे धूमधाम से हुआ है। बारात झूंसी से हंडिया के घाटमपुर गांव गई थी। 29 अप्रैल को पूरे रीति रिवाज के साथ संतोष ने गांव की ममता देवी से विवाह किया था। पूरे घर में खुशियों का माहौल था। इसी बीच रविवार की घटना से घर में मातम पसर गया। चारों तरफ रोना-पीटना मचा रहा।
डबल मर्डर में पिता चंद्रभान यादव के साथ आजीवन उम्र कैद की सजा काट रहे राजकुुमार यादव ने एक दिन के पैरोल पर आकर धूमधाम के साथ विवाह किया था। राजकुमार को अदालत से विवाह करने के लिए एक दिन का पैरोल मिला था। 29 अक्तूबर 2015 को उसने शहर की युवती से विवाह रचाया था। अगले दिन उसे जेल भेज दिया गया था।
योगेंद्र उर्फ बच्चा और धर्मेंद्र की हत्या में चंद्रभान के अलावा उसके चारों बेटे नामजद हुए। इस मामले में चंद्रभान और राजकुमार नैनी जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। संतोष और ज्ञानचंद्र नाबालिग होने के चलते सजा काट कर बाहर आ चुके हैं। जबकि राजेश यादव अप्रैल 2013 में बालसन चौराहे के पास कुंडी तोड़ कर 10 बंदी फरार हो गए थे। इसमें राजेश यादव भी शामिल रहा। वह तब से अभी तक पकड़ा नहीं गया है। फरार राजेश यादव इनामी भी है।
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एक दशक पहले योगेंद्र की हत्या के बाद गांव में खूब बवाल हुआ था। कई दिन तक गांव में पीएसी तैनात रही। दोबारा धर्मेंद्र की हत्या के बाद गांव में तनाव का माहौल बना। तब भी कई दिन तक पीएसी तैनात रही। रविवार शाम हुए बवाल के एक बार फिर गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। दूसरे गुट के शैलेंद्र यादव उर्फ लादे के घर पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है। घटना के बाद से शैलेंद्र का पूरा परिवार फरार हो गया है। मकान के मुख्य गेटों पर ताला लटका रहा। बवाल की आशंका को देखते हुए घर के बाहर भारी पुलिस फोर्स तैनात की गई है।
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शेरडीह ग्रामसभा की महिला प्रधान तथा पूर्व प्रधान चंद्रभान यादव उर्फ बाबा की पत्नी सरस्वती देवी पर माह भर पहले थरवई थाना क्षेत्र में जानलेवा हमला किया गया था। अप्रैल माह के अंत में वह पंडिला महादेव दर्शन करने जा रही थीं। तभी बाइक सवार बदमाशों ने गोली चलाई थी। इसमें महिला ग्राम प्रधान को गोली के छर्रे लगे थे। साथ ही उसका हाथ भी टूट गया था। इस हमले में शैलेंद्र यादव उर्फ लादे व उसके साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था।
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तकरीबन छह माह पहले हुए प्रधानी के चुनाव में भी दोनों परिवार एक बार फिर आमने सामने थे। इसमें पूर्व प्रधान चंद्रभान यादव उर्फ बाबा की पत्नी सरस्वती देवी व दूसरे पक्ष सेे शैलेंद्र यादव उर्फ लादे की पत्नी ऊषा देवी मैदान में रहीं। पर चुनाव में सरस्वती देवी ने रिकार्ड मतों से जीत दर्ज की। उसने ऊषा को तकरीबन 13 सौ मतों के अंतर से शिकस्त दी और एक बार फिर गांव में अपनी खोई प्रतिष्ठा वापस पा ली थी।
महिला ग्राम प्रधान सरस्वती देवी के छोटे बेटे संतोष का विवाह अभी सवा माह पहले ही पूरे धूमधाम से हुआ है। बारात झूंसी से हंडिया के घाटमपुर गांव गई थी। 29 अप्रैल को पूरे रीति रिवाज के साथ संतोष ने गांव की ममता देवी से विवाह किया था। पूरे घर में खुशियों का माहौल था। इसी बीच रविवार की घटना से घर में मातम पसर गया। चारों तरफ रोना-पीटना मचा रहा।
डबल मर्डर में पिता चंद्रभान यादव के साथ आजीवन उम्र कैद की सजा काट रहे राजकुुमार यादव ने एक दिन के पैरोल पर आकर धूमधाम के साथ विवाह किया था। राजकुमार को अदालत से विवाह करने के लिए एक दिन का पैरोल मिला था। 29 अक्तूबर 2015 को उसने शहर की युवती से विवाह रचाया था। अगले दिन उसे जेल भेज दिया गया था।
योगेंद्र उर्फ बच्चा और धर्मेंद्र की हत्या में चंद्रभान के अलावा उसके चारों बेटे नामजद हुए। इस मामले में चंद्रभान और राजकुमार नैनी जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। संतोष और ज्ञानचंद्र नाबालिग होने के चलते सजा काट कर बाहर आ चुके हैं। जबकि राजेश यादव अप्रैल 2013 में बालसन चौराहे के पास कुंडी तोड़ कर 10 बंदी फरार हो गए थे। इसमें राजेश यादव भी शामिल रहा। वह तब से अभी तक पकड़ा नहीं गया है। फरार राजेश यादव इनामी भी है।