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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Four arrested with pistol at the prison gate

जेल गेट पर पिस्टल समेत चार गिरफ्तार

Thu, 08 Oct 2015 01:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Thu, 08 Oct 2015 01:53 AM IST
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नैनी। सेंट्रल जेल नैनी में बुधवार को हत्या की सजा काट रहे दो कैदियों से मिलने आए एक शख्स के पास पिस्टल-कारतूस मिलने से खलबली मच गई। पहला गेट पार करने के बाद गेट नंबर दो पर चेकिंग के दौरान उसकी कमर में पिस्टल और दो मैगजीन मिली। उसके साथ तीन लोग और थे। ये सभी प्रतापगढ़ के रहने वाले हैं। पिस्टल के साथ पकड़े गए शख्स के बारे में शक है कि वह बीएसएफ का सिपाही है। यह भी अंदेशा है कि वे जेल में किसी की हत्या करने आए थे या फिर कैदी को पिस्टल देते जो किसी दूसरे कैदी का कत्ल करता। उन चारों को नैनी पुलिस को सौंप दिया गया है।
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सेन्ट्रल जेल में बंद सलीम निवासी कसाई टोला कन्नौज और हाशिम निवासी विसडिया हथिगवां प्रतापगढ़ हत्या की वारदात में सजा काट रहे हैं। वे सर्किल नंबर दो की बैरक नंबर पांच में बंद है। सलीम 2005 से नैनी जेल में है जबकि हासिम कुछ दिनों पहले ही प्रतापगढ़ जेल से यहां शिफ्ट किया गया है। सलीम आजीवन कारावास और हाशिम हत्या की कोशिश के मामले में पांच साल की सजा काट रहा है। बुधवार को उन दोनों से मिलने के लिये काशीपुर कुंडा प्रतापगढ़ के रहने वाले विनोद कुमार पाण्डेय, मोहम्मद काजिम, अकरम और सादात नैनी जेल आए थे।
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विनोद ने अपना मोबाइल जेल गेट के पहले ही जमा करा दिया था। जेल के पहले गेट पर तलाशी के बाद सिपाहियों ने चारों को अंदर जाने दिया। वे दूसरे गेट पर पहुंचे  तो वहां नंबरदार रामसूरत सिपाही राजेन्द्र तिवारी और जेलर वीएस मुकुंद मौजूद थे। चेकिंग के दौरान नंबरदार रामसूरत को विनोद के कमर में पिस्टल लगी मिली। उसने पिस्टल कब्जे में लेकर जेलर को दिखाई। पिस्टल के साथ तीन जिंदा कारतूस और दो खाली मैग्जीन मिली। उन चारों को हिरासत में लेकर डीआईजी जेल संतोष श्रीवास्तव को खबर दी गई।
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डीआईजी ने भी उन चारों से पूछताछ की। जेल के अफसर यह तो कहते रहे कि उन्होंने चेकिंग में पिस्टल बरामद कर जेल में कत्ल की कोशिश नाकाम कर दी। मगर वे यह नहीं बता सके कि किसकी हत्या की जानी थी और क्यों? या विनोद किसी कैदी को पिस्टल देने जा रहा था तो इसके पीछे क्या साजिश थी? डीआईजी जेल इन सवालों के बारे में कुछ नहीं बता सके। चेकिंग के बावजूद जेल के गेट नंबर दो तक पिस्टल लेकर पहुंच जाना सरासर जेल कर्मियों की लापरवाही है मगर इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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