फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Fact Finding Committee gave clean cheat of Professor

फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में आरोपी प्रोफेसर को क्लीन चिट

Tue, 05 Sep 2017 02:08 AM IST
अमर उजाला/इलाहाबाद
अमर उजाला/इलाहाबाद Updated Tue, 05 Sep 2017 02:08 AM IST
विज्ञापन
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) के पूर्व जूनियर रिसर्च फेलो परमात्मा यादव की आत्महत्या के मामले में गठित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में क्लीन चिट देने की कोशिश की गई है। वरिष्ठ प्रोफेसर यूएस तिवारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट संस्थान को साैंप दी है। रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि आखिर 10 जून को प्रोजेक्ट बंद होने के बाद जब पूर्व रिसर्च फेलो को उनके मूल प्रमाण पत्र वापस नहीं किए गए तो उसने निदेशक सहित किसी वरिष्ठ अधिकारी से शिकायत क्यों नहीं की। फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट को बीओजी में रखे जाने की संभावना है।
विज्ञापन


ट्रिपलआईटी के पूर्व जूनियर रिसर्च फेलो परमात्मा यादव ने 28 अगस्त को संस्थान के बाहर स्थित किराए के आवास पर आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या के बाद संस्थान के डीन रिसर्च प्रो. अनुपम अग्रवाल पर सवाल उठाते हुए परमात्मा के परिवार के लोगों ने निदेशक एवं पुलिस से मिलकर शिकायत की थी। इस शिकायत के बाद निदेशक प्रो. पी नागभूषण ने संस्थान के वरिष्ठ प्रोफेसर यूएस तिवारी, प्रो. शेखर वर्मा, डॉ. मनीष गोस्वामी, डॉ. नितेश पुरोहित की कमेटी से जांच कराई गई। जांच के बाद कमेटी ने बताया ट्रिपलआईटी को यह प्रोजेक्ट दिसंबर 2012 में मिला। परमात्मा यादव की इस प्रोजेक्ट में जूनियर रिसर्च फेलो के रूप में नियुक्ति 16 जुलाई 2014 को हुई।
विज्ञापन


नियुक्ति पत्र में मूल प्रमाण पत्र जमा करने की शर्त का उल्लेख
नियुक्ति पत्र में पांचवें बिन्दु पर यह दिया गया है कि अभ्यर्थी प्रोजेक्ट को बीच में नहीं छोड़ सकता और इसके पूरा होने तक उसका मूल प्रमाण पत्र संस्थान के पास जमा रहेगा। इस प्रोजेक्ट में परमात्मा यादव के साथ चंद्रकांत उपाध्याय काम कर रहे थे। इन दोनों अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र संस्थान में जमा थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


रिमाइंडर भेजे जाने के बाद भी नहीं कराया नोड्यूज
फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में उठाया है कि प्रोजेक्ट की अवधि 10 जून 2017 को खत्म हो गई। इसके बाद भी प्रो.अनुपम अग्रवाल ने प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए पत्र भेजा था परंतु उसे आगे बढ़ाने को कोई पत्र नहीं आया। प्रोजेक्ट खत्म होने से एक महीने पहले दोनों रिसर्च फेलो को संस्थान से नोड्यूज लेने को कहा गया। इसके बाद भी इन रिसर्च फेलो ने नोड्यूज जमा नहीं किया। 10 अगस्त को एक बार फिर से रिसर्च फेलो से नोड्यूज के लिए कहा गया। इसके बाद भी नोड्यूज नहीं मिला। परमात्मा यादव गेट नहीं था, इसलिए उसका प्रवेश पीएचडी में नहीं हो सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed