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डॉक्टर का बयान, शराब पीकर गुस्से में गए थे हॉस्टल
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 05 Oct 2017 01:49 AM IST
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बस से निकलती आग की लपटें
- फोटो : अमर उजाला
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बसपा नेता राजेश यादव हत्याकांड में नामजद आरोपी डॉ. मुकुल सिंह ने पुलिस को दिए बयान में घटना का पूरा ब्योरा दिया है। डॉक्टर के अनुसार राजेश उस रात नशे में होने के बाद गुस्से में उनके साथ ताराचंद हॉस्टल गए थे, जहां गेट पर ही छात्रों से झड़प के बाद फायर हुए और उन्हें गोली मार दी गई। वह किसी तरह राजेश को उनकी गाड़ी में लेकर वहां से भागे और नर्सिंग होम ले गए मगर उनकी जान नहीं बची। पुलिस का कहना है कि डॉक्टर के बयान की जांच की जा रही है।
हत्याकांड के विवेचक इंस्पेक्टर कर्नलगंज अवधेश प्रताप सिंह के अनुसार डॉ. मुकुल ने यह बयान दिया- ‘उस रात हम दोनों लगभग साढ़े ग्यारह बजे मेडिकल स्टोर मालिक आलोक यादव के यहां गए। वहां हम दोनों ने शराब पी। फिर रात तकरीबन डेढ़ बजे वहां से निकले तो राजेश ने गुस्से में ताराचंद्र हॉस्टल चलने को कहा। नशे में होने की वजह से रास्ता भटके तो फारच्यूनर गाड़ी पीसीबी हॉस्टल की तरफ चली गई। वहां से गाड़ी मोड़कर राजेश ने ताराचंद्र हॉस्टल के सामने जाकर रोकी और हार्न बजाने लगे। दो-तीन लड़के आए तो उनसे राजेश की कहासुनी हो गई। फिर हॉस्टल से कई लड़के आ गए।
झड़प होने लगी तो राजेश ने अपनी पिस्टल से फायर कर दिया। तभी एक लड़के ने भी फायरिंग की तो राजेश ने कहा कि गोली लग गई है। मुझे बचा लो। मैंने राजेश को सीट पर एक तरफ हल्का किनारे किया और उनके पैर पर बैठकर किसी तरह गाड़ी मोड़ी। पीछे से लड़के ईंट-पत्थर फेंक रहे थे। मैं गाड़ी तेज रफ्तार में बालसन चौराहे पर ले गया। वहां गाड़ी रोक गेट खोला तो राजेश बाहर की तरफ लुढ़क गए। मैंने आवाज देकर कुछ दूर पर खड़े दो रिक्शा चालकों को बुलाया और उनकी मदद से राजेश को बगल की सीट पर लिटाकर फौरन नर्सिंग होम ले गया। इलाज शुरू किया लेकिन उनकी मौत हो गई। फिर चार बजे 100 नंबर पर सूचना दी और भाभी मोनिका (राजेश की पत्नी) को फ्लैट से बुलवाया।’
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इंस्पेक्टर के मुताबिक, अब तक की जांच में पता चला है कि डॉक्टर और राजेश नशे में धुत थे। हॉस्टल के गार्ड ने पुलिस को बयान दिया कि रात दो बजे के बाद वहां गाड़ी रोककर ड्राइविंग सीट पर बैठे व्यक्ति (राजेश) ने गालियां देते हुए कहा था कि ये लड़के चुनाव लड़ रहे हैं और मेरे पास आए तक नहीं। इतना दिमाग खराब है इनका। बताता हूं इन सबको। ये भी कहा कि उनके पास लाखों रुपये हैं। गालीगलौज के दौरान ही बाहर पोस्टर लगा रहे लड़के जुटे और फोनकर हॉस्टल से साथियों को बुलाया। इसके बाद झगड़ा हुआ और गोली चली थी। डॉ. मुकुल, हॉस्टल के गार्ड के बयान तो मेल खा रहे हैं। बाकी घटनाक्रम तफ्तीश में साफ हो जाएगा।
मारे गए बसपा नेता राजेश यादव की फारच्यूनर गाड़ी फोरेंसिक जांच के लिए वाराणसी से सटे रामनगर स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजी जाएगी। वहां गाड़ी की बारीक फोरेंसिक जांच हो सकेगी। कर्नलगंज थाने की पुलिस ने बुधवार को फिर गाड़ी के भीतर तलाशी ली तो प्वाइंट 32 बोर का एक खोखा बरामद हुआ। माना गया है कि यह खोखा राजेश की पिस्टल से चली गोली का है। इंस्पेक्टर कर्नलगंज के मुताबिक, गाड़ी के भीतर एक बुलेट भी सीट पर धंसी मिली। यह बुलेट राजेश के सीने पर दाहिनी ओर से धंसकर बायीं ओर से निकली थी। बुलेट भी प्वाइंट 32 बोर की थी। राजेश की पिस्टल को भी बैलेस्टिक जांच के लिए भेजा जाएगा।
एसआरएन अस्पताल गेट स्थित उमा केमिस्ट के मालिक आलोक यादव ने बुधवार को हत्याकांड के विवेचक कर्नलगंज इंस्पेक्टर के समक्ष बयान दर्ज कराया। आलोक ने बताया कि राजेश और डॉ. मुकुल अक्सर उनके पास आकर शराब पीते थे। सोमवार रात तकरीबन 11.30 पर वे दोनों आए। आलोक के मुताबिक, कुछ देर बाद वह उन दोनों को शराब पीता छोड़कर अपने कमरे में चले गए थे। रात लगभग डेढ़ बजे वे दोनों जाने लगे तो वह उनके पास आए। राजेश नशे में थे। उनसे बोले कि वह अब विश्वविद्यालय की तरफ नेतागिरी करने जा रहे हैं। तभी उन्होंने भाभी यानी राजेश की पत्नी मोनिका से फोन पर कहा कि वह भैया को घर बुला लें, कहीं जाने नहीं दें। आलोक के मुताबिक, उन्हें नशे में उनका विश्वविद्यालय की तरफ जाना सही नहीं लग रहा था इसलिए भाभी से उन्हें घर बुलाने को कहा था।
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हत्याकांड के विवेचक इंस्पेक्टर कर्नलगंज अवधेश प्रताप सिंह के अनुसार डॉ. मुकुल ने यह बयान दिया- ‘उस रात हम दोनों लगभग साढ़े ग्यारह बजे मेडिकल स्टोर मालिक आलोक यादव के यहां गए। वहां हम दोनों ने शराब पी। फिर रात तकरीबन डेढ़ बजे वहां से निकले तो राजेश ने गुस्से में ताराचंद्र हॉस्टल चलने को कहा। नशे में होने की वजह से रास्ता भटके तो फारच्यूनर गाड़ी पीसीबी हॉस्टल की तरफ चली गई। वहां से गाड़ी मोड़कर राजेश ने ताराचंद्र हॉस्टल के सामने जाकर रोकी और हार्न बजाने लगे। दो-तीन लड़के आए तो उनसे राजेश की कहासुनी हो गई। फिर हॉस्टल से कई लड़के आ गए।
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झड़प होने लगी तो राजेश ने अपनी पिस्टल से फायर कर दिया। तभी एक लड़के ने भी फायरिंग की तो राजेश ने कहा कि गोली लग गई है। मुझे बचा लो। मैंने राजेश को सीट पर एक तरफ हल्का किनारे किया और उनके पैर पर बैठकर किसी तरह गाड़ी मोड़ी। पीछे से लड़के ईंट-पत्थर फेंक रहे थे। मैं गाड़ी तेज रफ्तार में बालसन चौराहे पर ले गया। वहां गाड़ी रोक गेट खोला तो राजेश बाहर की तरफ लुढ़क गए। मैंने आवाज देकर कुछ दूर पर खड़े दो रिक्शा चालकों को बुलाया और उनकी मदद से राजेश को बगल की सीट पर लिटाकर फौरन नर्सिंग होम ले गया। इलाज शुरू किया लेकिन उनकी मौत हो गई। फिर चार बजे 100 नंबर पर सूचना दी और भाभी मोनिका (राजेश की पत्नी) को फ्लैट से बुलवाया।’
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इंस्पेक्टर के मुताबिक, अब तक की जांच में पता चला है कि डॉक्टर और राजेश नशे में धुत थे। हॉस्टल के गार्ड ने पुलिस को बयान दिया कि रात दो बजे के बाद वहां गाड़ी रोककर ड्राइविंग सीट पर बैठे व्यक्ति (राजेश) ने गालियां देते हुए कहा था कि ये लड़के चुनाव लड़ रहे हैं और मेरे पास आए तक नहीं। इतना दिमाग खराब है इनका। बताता हूं इन सबको। ये भी कहा कि उनके पास लाखों रुपये हैं। गालीगलौज के दौरान ही बाहर पोस्टर लगा रहे लड़के जुटे और फोनकर हॉस्टल से साथियों को बुलाया। इसके बाद झगड़ा हुआ और गोली चली थी। डॉ. मुकुल, हॉस्टल के गार्ड के बयान तो मेल खा रहे हैं। बाकी घटनाक्रम तफ्तीश में साफ हो जाएगा।
मारे गए बसपा नेता राजेश यादव की फारच्यूनर गाड़ी फोरेंसिक जांच के लिए वाराणसी से सटे रामनगर स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजी जाएगी। वहां गाड़ी की बारीक फोरेंसिक जांच हो सकेगी। कर्नलगंज थाने की पुलिस ने बुधवार को फिर गाड़ी के भीतर तलाशी ली तो प्वाइंट 32 बोर का एक खोखा बरामद हुआ। माना गया है कि यह खोखा राजेश की पिस्टल से चली गोली का है। इंस्पेक्टर कर्नलगंज के मुताबिक, गाड़ी के भीतर एक बुलेट भी सीट पर धंसी मिली। यह बुलेट राजेश के सीने पर दाहिनी ओर से धंसकर बायीं ओर से निकली थी। बुलेट भी प्वाइंट 32 बोर की थी। राजेश की पिस्टल को भी बैलेस्टिक जांच के लिए भेजा जाएगा।
एसआरएन अस्पताल गेट स्थित उमा केमिस्ट के मालिक आलोक यादव ने बुधवार को हत्याकांड के विवेचक कर्नलगंज इंस्पेक्टर के समक्ष बयान दर्ज कराया। आलोक ने बताया कि राजेश और डॉ. मुकुल अक्सर उनके पास आकर शराब पीते थे। सोमवार रात तकरीबन 11.30 पर वे दोनों आए। आलोक के मुताबिक, कुछ देर बाद वह उन दोनों को शराब पीता छोड़कर अपने कमरे में चले गए थे। रात लगभग डेढ़ बजे वे दोनों जाने लगे तो वह उनके पास आए। राजेश नशे में थे। उनसे बोले कि वह अब विश्वविद्यालय की तरफ नेतागिरी करने जा रहे हैं। तभी उन्होंने भाभी यानी राजेश की पत्नी मोनिका से फोन पर कहा कि वह भैया को घर बुला लें, कहीं जाने नहीं दें। आलोक के मुताबिक, उन्हें नशे में उनका विश्वविद्यालय की तरफ जाना सही नहीं लग रहा था इसलिए भाभी से उन्हें घर बुलाने को कहा था।