{"_id":"ff34dc51384c353120b39b30badf73fa","slug":"crime-hindi-news-118","type":"story","status":"publish","title_hn":"शराब पीने के बाद सिरफिरों ने बनाया था ट्रेन गिराने का प्लान","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
शराब पीने के बाद सिरफिरों ने बनाया था ट्रेन गिराने का प्लान
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Sat, 10 Jan 2015 11:51 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
औद्योगिक थाना क्षेत्र के महुआरी गांव में दिल्ली-हावड़ा ट्रैक पर स्लीपर डालने वाले दो सिरफिरों को पुलिस ने शनिवार को जेल भेज दिया। दोनों के खिलाफ रेलवे संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत औद्योगिक क्षेत्र थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। पकड़े गए दोनों लड़कों ने बृहस्पतिवार रात शराब पीने के बाद ट्रेन को गिराने के बाद लूटपाट के लिए ट्रैक पर स्लीपर डालने की बात कुबूली है। दोनों ने मालगाड़ी के गुजरने के बाद दोबारा फिर से ट्रैक पर स्लीपर डाल दिया था। अगर शाहगंज मालगाड़ी स्पेशल मालगाड़ी के ड्राइवर ने खबर रेलवे कंट्रोल रूम को न दी होती तो कालका मेल रात में बड़े हादसे का शिकार हो सकती थी। हालांकि पुलिस दोनों के नक्सली या किसी आतंकी संगठन से कनेक्शन के तार नहीं तलाश सकी है।
आरपीएफ ने बृहस्पतिवार रात महुआरी में रेलवे ट्रैक के पास से अकोढ़ा कौंधियारा के विकास सिंह और कोरांव के बदौनी गांव के एक किशोर को पकड़ा था। दोनों रिश्ते में भाई लगते हैं। किशोर नैनी के एक स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ता है। पकड़े जाने के बाद से दोनों लगातार बयान बदल रहे थे। दोनों ने नैनी के एक ट्रांसपोर्टर को भी फंसाने की कोशिश की लेकिन बात नहीं बन पाई। जब ट्रांसपोर्टर से पुलिस ने सामना करवाया गया तो विकास ने बयान पलट दिया। विकास ट्रांसपोर्टर की बस चलाता था। वह पहले कह रहा था कि ट्रांसपोर्टर ने ही तीन-तीन हजार रुपये देने के बहाने से बुलवाया था और तमंचा सटाकर पटरी पर स्लीपर रखवाने लगा था। जब पुलिस ने अपने तरीके से पूछताछ की तो दोनों ने सच उगल दिया।
ढाई कुंतल के स्लीपर को विकास और उसके नाबालिग साथी ने ही उठाया था। पुलिस को दोनों की बात पर पहले भरोसा नहीं हुआ। सच जानने के लिए पुलिस शनिवार को फिर से घटना स्थल पर पहुंची। दोनों से स्लीपर उठवाया गया। दोनों ने स्लीपर के एक सिरे को उठाकर आसानी से पटरी पर रख दिया। दोनों ने जैसे ही धकेला, स्लीपर पटरियों के बीच पहुंच गया। सीओ करछना समर बहादुर और आरपीएफ के इंस्पेक्टर यह देखकर दंग रह गए। जिस स्लीपर को आधा दर्जन लोग भी नहीं उठा पाते थे, उसे दोनोें ने एक मिनट के भीतर ही सरका दिया था।
विज्ञापन
विकास ने बताया कि दोनों ने नैनी में शराब पी थी। इसके बाद ट्रेन को गिराने की योजना बनाई गई। पकड़े जाने के बाद उसने ट्रांसपोर्टर का नाम जानबूझकर बता दिया था ताकि पुलिस उसे पकड़ ले। ऐसा उसने इसलिए किया था क्योंकि ट्रांसपोर्टर ने उसकी तनख्वाह रोक ली थी।
विज्ञापन
आरपीएफ ने बृहस्पतिवार रात महुआरी में रेलवे ट्रैक के पास से अकोढ़ा कौंधियारा के विकास सिंह और कोरांव के बदौनी गांव के एक किशोर को पकड़ा था। दोनों रिश्ते में भाई लगते हैं। किशोर नैनी के एक स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ता है। पकड़े जाने के बाद से दोनों लगातार बयान बदल रहे थे। दोनों ने नैनी के एक ट्रांसपोर्टर को भी फंसाने की कोशिश की लेकिन बात नहीं बन पाई। जब ट्रांसपोर्टर से पुलिस ने सामना करवाया गया तो विकास ने बयान पलट दिया। विकास ट्रांसपोर्टर की बस चलाता था। वह पहले कह रहा था कि ट्रांसपोर्टर ने ही तीन-तीन हजार रुपये देने के बहाने से बुलवाया था और तमंचा सटाकर पटरी पर स्लीपर रखवाने लगा था। जब पुलिस ने अपने तरीके से पूछताछ की तो दोनों ने सच उगल दिया।
विज्ञापन
ढाई कुंतल के स्लीपर को विकास और उसके नाबालिग साथी ने ही उठाया था। पुलिस को दोनों की बात पर पहले भरोसा नहीं हुआ। सच जानने के लिए पुलिस शनिवार को फिर से घटना स्थल पर पहुंची। दोनों से स्लीपर उठवाया गया। दोनों ने स्लीपर के एक सिरे को उठाकर आसानी से पटरी पर रख दिया। दोनों ने जैसे ही धकेला, स्लीपर पटरियों के बीच पहुंच गया। सीओ करछना समर बहादुर और आरपीएफ के इंस्पेक्टर यह देखकर दंग रह गए। जिस स्लीपर को आधा दर्जन लोग भी नहीं उठा पाते थे, उसे दोनोें ने एक मिनट के भीतर ही सरका दिया था।
विज्ञापन
विकास ने बताया कि दोनों ने नैनी में शराब पी थी। इसके बाद ट्रेन को गिराने की योजना बनाई गई। पकड़े जाने के बाद उसने ट्रांसपोर्टर का नाम जानबूझकर बता दिया था ताकि पुलिस उसे पकड़ ले। ऐसा उसने इसलिए किया था क्योंकि ट्रांसपोर्टर ने उसकी तनख्वाह रोक ली थी।