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चश्मदीद बोले-डॉक्टर ने जिन्हें भगाया उन्होंने ही मारी गोली
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 15 Jan 2017 01:59 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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जीवन ज्योति हॉस्पिटल के निदेशक डॉ.एके बंसल हत्याकांड में कुछ चश्मदीदों से बातचीत में पता चला कि घटना से कुछ मिनट पहले डॉक्टर ने चैंबर में दो लोगों से सख्त लहजे में कुछ कहकर निकाल दिया था। फिर उनमें से एक व्यक्ति यानी शूटर ने चैंबर में घुसकर डॉक्टर को गोलियां मारी थीं। चश्मदीदों के बयान के आधार पर एसटीएफ और क्राइम ब्रांच को छानबीन करनी होगी कि कहीं ऐसा तो नहीं कि ये बदमाश पहले भी डॉक्टर से मिल चुके हों। साथ ही यह भी चश्मदीदों के बयान के बारे में पता करना होगा कि उनका कहना किस हद तक सही है।
बृहस्पतिवार देर शाम जीवन ज्योति हॉस्पिटल के निदेशक डॉ.एके बंसल ने चैंबर में कत्ल से पहले दो मरीज देखे थे। एक मरीज थी मीना केसरवानी और दूसरे थे रीवा में मनगवां इलाके के बुजुर्ग वैद्यनाथ पांडेय। वैद्यनाथ के साथ उनकी पुत्री माला, बेटा बृजेश और भतीजा हीरालाल पांडेय मौजूद थे। माला, बृजेश और हीरालाल ने भी शूटरों को देखा था। शनिवार को बृजेश ने अमर उजाला को बताया कि वह पिता को लेकर चैंबर में बैठा था तभी दो लोग भीतर आए। उनका हुलिया वैसा ही था जैसा शूटरों का बताया जा रहा है। एक ने सिर पर मफलर बांधा था, जैकेट पहने था जबकि दूसरे के सिर पर टोपी थी।
डॉ.बंसल ने उन दोनों को देखा तो नाराजती जताते हुए कहा कि-तुम लोग जाओ, अभी काम नहीं हो पाएगा। इसके बाद दोनों व्यक्ति चैंबर का दरवाजा खोलकर बाहर निकल गए थे। बृजेश भी पिता का अल्ट्रासाऊंड स्कैन कराने के लिए रसीद कटवाने चला गया तभी गोलियां चलीं। वह लौटकर आया तो बहन माला और चचेरे भाई हीरालाल ने बताया कि गोली मारकर भागने वाले वही व्यक्ति हैं जिन्हें डॉक्टर बंसल ने चले जाने के लिए कहा था। हीरालाल ने अमर उजाला को बताया कि उसने शूटरों को भागते देखा था। एक ने सिर पर गमछा या मफलर बांधा था जबकि दूसरा कैप लगाए था।
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वह उन्हें पहचान भी सकता है। गौरतलब है कि सीसीटीवी फुटेज में भी दो शूटर दिखे हैं जिनके सिर पर मफलर और टोपी थी। इन तीन चश्मदीदों के बयान से एक बात सामने आ रही है कि डॉक्टर ने चैंबर में दो लोगों को गुस्से में चले जाने को कहा था। घटना के चश्मदीदों की बात पर भरोसा किया जाए उन्हीं में एक से व्यक्ति यानी शूटर ने कुछ पल बाद चैंबर में घुसकर डॉक्टर के सिर पर गोलियों की बौछार की थी।
चश्मदीद बृजेश की बहन मीना और चचेरा भाई हीरालाल घटना के वक्त डॉक्टर के चैंबर के बाहर बेंच पर बैठे थे। उन दोनों ने शूटर और उसके साथी को देखा था। हीरालाल के अनुसार, कपड़े और हावभाव से तो उन्हें दोनों अपराधी ग्रामीण इलाके के रहने वाले लगे हैं। शूटर की जैकेट भी सामान्य थी जैसे गांव में लोग पहने दिखते हैं। सिर पर मफलर लपेटा बदमाश डॉक्टर को गोलियां मारकर चैंबर से बाहर निकला तो वह बेंच पर बैठे लोगों पर भी पिस्टल तानकर लहराते हुए पिछले रास्ते की तरफ भागा था। शूटर और उसके साथी कद में लंबे थे। हीरालाल के मुताबिक, गोलियां मारने वाला बदमाश उन्हें सांवला लगा। दोनों की लंबाई में कुछ फर्क था।
हीरालाल और बृजेश ने अमर उजाला को बताया कि उन्हें तो शूटर के चेहरे पर ऐसा निशान दिखा जैसे किसी चोट पर पहुंचती है। क्या वह पूरे यकीन से कहते हैं कि शूटर के चेहरे पर ऐसा घाव था। इस पर बृजेश का कहना है कि डॉक्टर ने चैंबर में जिन दो लोगों को चले जाने को कहा था उनमें से एक के चेहरे पर निशान था। बाद में उनके चचेरे भाई हीरालाल ने भागते शूटर को देखा था और उसके भी गाल पर किसी चोट की वजह से बना निशान दिखा था। हीरालाल के शब्द थे कि बदमाश तो रोडछाप लग रहा था।
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बृहस्पतिवार देर शाम जीवन ज्योति हॉस्पिटल के निदेशक डॉ.एके बंसल ने चैंबर में कत्ल से पहले दो मरीज देखे थे। एक मरीज थी मीना केसरवानी और दूसरे थे रीवा में मनगवां इलाके के बुजुर्ग वैद्यनाथ पांडेय। वैद्यनाथ के साथ उनकी पुत्री माला, बेटा बृजेश और भतीजा हीरालाल पांडेय मौजूद थे। माला, बृजेश और हीरालाल ने भी शूटरों को देखा था। शनिवार को बृजेश ने अमर उजाला को बताया कि वह पिता को लेकर चैंबर में बैठा था तभी दो लोग भीतर आए। उनका हुलिया वैसा ही था जैसा शूटरों का बताया जा रहा है। एक ने सिर पर मफलर बांधा था, जैकेट पहने था जबकि दूसरे के सिर पर टोपी थी।
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डॉ.बंसल ने उन दोनों को देखा तो नाराजती जताते हुए कहा कि-तुम लोग जाओ, अभी काम नहीं हो पाएगा। इसके बाद दोनों व्यक्ति चैंबर का दरवाजा खोलकर बाहर निकल गए थे। बृजेश भी पिता का अल्ट्रासाऊंड स्कैन कराने के लिए रसीद कटवाने चला गया तभी गोलियां चलीं। वह लौटकर आया तो बहन माला और चचेरे भाई हीरालाल ने बताया कि गोली मारकर भागने वाले वही व्यक्ति हैं जिन्हें डॉक्टर बंसल ने चले जाने के लिए कहा था। हीरालाल ने अमर उजाला को बताया कि उसने शूटरों को भागते देखा था। एक ने सिर पर गमछा या मफलर बांधा था जबकि दूसरा कैप लगाए था।
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वह उन्हें पहचान भी सकता है। गौरतलब है कि सीसीटीवी फुटेज में भी दो शूटर दिखे हैं जिनके सिर पर मफलर और टोपी थी। इन तीन चश्मदीदों के बयान से एक बात सामने आ रही है कि डॉक्टर ने चैंबर में दो लोगों को गुस्से में चले जाने को कहा था। घटना के चश्मदीदों की बात पर भरोसा किया जाए उन्हीं में एक से व्यक्ति यानी शूटर ने कुछ पल बाद चैंबर में घुसकर डॉक्टर के सिर पर गोलियों की बौछार की थी।
चश्मदीद बृजेश की बहन मीना और चचेरा भाई हीरालाल घटना के वक्त डॉक्टर के चैंबर के बाहर बेंच पर बैठे थे। उन दोनों ने शूटर और उसके साथी को देखा था। हीरालाल के अनुसार, कपड़े और हावभाव से तो उन्हें दोनों अपराधी ग्रामीण इलाके के रहने वाले लगे हैं। शूटर की जैकेट भी सामान्य थी जैसे गांव में लोग पहने दिखते हैं। सिर पर मफलर लपेटा बदमाश डॉक्टर को गोलियां मारकर चैंबर से बाहर निकला तो वह बेंच पर बैठे लोगों पर भी पिस्टल तानकर लहराते हुए पिछले रास्ते की तरफ भागा था। शूटर और उसके साथी कद में लंबे थे। हीरालाल के मुताबिक, गोलियां मारने वाला बदमाश उन्हें सांवला लगा। दोनों की लंबाई में कुछ फर्क था।
हीरालाल और बृजेश ने अमर उजाला को बताया कि उन्हें तो शूटर के चेहरे पर ऐसा निशान दिखा जैसे किसी चोट पर पहुंचती है। क्या वह पूरे यकीन से कहते हैं कि शूटर के चेहरे पर ऐसा घाव था। इस पर बृजेश का कहना है कि डॉक्टर ने चैंबर में जिन दो लोगों को चले जाने को कहा था उनमें से एक के चेहरे पर निशान था। बाद में उनके चचेरे भाई हीरालाल ने भागते शूटर को देखा था और उसके भी गाल पर किसी चोट की वजह से बना निशान दिखा था। हीरालाल के शब्द थे कि बदमाश तो रोडछाप लग रहा था।