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आयोग की सीबीआई जांच पर सुनवाई जारी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 05 Feb 2018 11:51 PM IST
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सीबीअाई
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लोक सेवा आयोग की भर्तियों की सीबीआई जांच रोकने के लिए दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है। सोमवार को आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शशि नंदन ने बहस की। सुनवाई मंगलवार को भी जारी रहेगी। लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष अनिरुद्ध प्रताप सिंह की ओर से दाखिल याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की पीठ सुनवाई कर रही है।
आयोग के अधिवक्ता का कहना था कि आयोग एक संवैधानिक और स्वायत्त संस्था है। सीबीआई को इसकी जांच करने का अधिकार नहीं है। यदि आयोग के अध्यक्ष या सदस्यों के खिलाफ भ्रष्टाचार करने या पद का दुरुपयोग करने का आरोप है तो संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत सुप्रीमकोर्ट को ही इस मामले में जांच और कार्रवाई करने का अधिकार है। नियमानुसार ऐसे मामले में राज्यपाल मामले को राष्ट्रपति को संदर्भित करेंगे और राष्ट्रपति सुप्रीमकोर्ट को अपनी संस्तुति भेजेंगे। इसके बाद सुप्रीमकोर्ट जांच कर दंडित करने की कार्रवाई कर सकता है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने यह सवाल उठाया कि यदि आयोग अपने कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं करता है तो क्या राज्य सरकार मूकदर्शक बनी रहेगी। यदि राज्यपाल के पास ठोस तथ्य नहीं होंगे तो वह अपनी संस्तुति कैसे भेजेंगे। परीक्षा नियंत्रक यदि कोई मनमानी कर रहे हैं तो उनके विरुद्ध ठोस तथ्य मिलने पर ही राज्यपाल कोई सिफारिश भेज सकते हैं। पीठ ने याची के अधिवक्ता से जानना चाहा कि यदि सीबीआई जांच में ऐसे साक्ष्य मिलते हैं, जिस पर प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना करना आवश्यक है तो उसकी प्रक्रिया क्या होगी। कोर्ट ने जानना चाहा कि इस मामले में दोषी पाए जाने पर आगे क्या होगा, दोषियों को सेवा से हटाना पर्याप्त है या दंडात्मक कार्रवाई भी की जानी चाहिए। आयोग के वकील का कहना था कि जांच सिर्फ सुप्रीमकोर्ट के जरिए ही कराई जा सकती है। मामले में बहस मंगलवार को भी जारी रहेगी।
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आयोग के अधिवक्ता का कहना था कि आयोग एक संवैधानिक और स्वायत्त संस्था है। सीबीआई को इसकी जांच करने का अधिकार नहीं है। यदि आयोग के अध्यक्ष या सदस्यों के खिलाफ भ्रष्टाचार करने या पद का दुरुपयोग करने का आरोप है तो संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत सुप्रीमकोर्ट को ही इस मामले में जांच और कार्रवाई करने का अधिकार है। नियमानुसार ऐसे मामले में राज्यपाल मामले को राष्ट्रपति को संदर्भित करेंगे और राष्ट्रपति सुप्रीमकोर्ट को अपनी संस्तुति भेजेंगे। इसके बाद सुप्रीमकोर्ट जांच कर दंडित करने की कार्रवाई कर सकता है।
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सुनवाई के दौरान पीठ ने यह सवाल उठाया कि यदि आयोग अपने कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं करता है तो क्या राज्य सरकार मूकदर्शक बनी रहेगी। यदि राज्यपाल के पास ठोस तथ्य नहीं होंगे तो वह अपनी संस्तुति कैसे भेजेंगे। परीक्षा नियंत्रक यदि कोई मनमानी कर रहे हैं तो उनके विरुद्ध ठोस तथ्य मिलने पर ही राज्यपाल कोई सिफारिश भेज सकते हैं। पीठ ने याची के अधिवक्ता से जानना चाहा कि यदि सीबीआई जांच में ऐसे साक्ष्य मिलते हैं, जिस पर प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना करना आवश्यक है तो उसकी प्रक्रिया क्या होगी। कोर्ट ने जानना चाहा कि इस मामले में दोषी पाए जाने पर आगे क्या होगा, दोषियों को सेवा से हटाना पर्याप्त है या दंडात्मक कार्रवाई भी की जानी चाहिए। आयोग के वकील का कहना था कि जांच सिर्फ सुप्रीमकोर्ट के जरिए ही कराई जा सकती है। मामले में बहस मंगलवार को भी जारी रहेगी।
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