प्रेम प्रसंग में मारा गया कारोबारी
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पुलिस लाइन में शुक्रवार शाम कारोबारी प्रभात की हत्या में गिरफ्तार मकान मालिक सत्येंद्र सिंह की 28 वर्षीय बेटी चित्रा सिंह और उसके चचेरे भाई अपूर्व उर्फ कौशिक उर्फ गोलू को मीडिया के सामने पेश किया। एसपी सिटी विपिन टाडा ने बताया कि प्रभात कोतवाली के बहादुरगंज इलाके में क ई सालों से किराए पर कमरा लेकर हार्डवेयर की दुकान चलाता था। इस दौरान उसका मकान मालकिन की बेटी चित्रा सिंह से प्रेम प्रसंग बन गया। मांगलिक होने के चलते प्रभात भी अविवाहित था। प्रभात और गीता की उम्र के बीच लगभग दूने का अंतर था। इधर दो-तीन साल से चित्रा प्रभात सेे दूरी बनाने लगी। वह अपनी उम्र के किसी युवक से बात करती तो प्रभात नाराज हो उठता। वह चित्रा को टोकता भी था।
मंगलवार को प्रभात दुकान पर पहुंचा तो सीधे मकान मालिक के घर में घुस गया। चित्रा उस समय घर में अकेले थी। वह चित्रा से फोन न उठाने को लेकर सवाल करने लगा। इसे लेकर उनके बीच कहासुनी होने लगी। शोर सुनकर बगल में रहने वाला चित्रा का चचेरा भाई गोलू भी पहुंच गया। झगड़े के बीच बहन को बचाने के लिए उसने प्रभात पर लोहे की राड से हमला कर दिया। माथे पर राड लगते ही प्रभात लहूलुहान होकर गिर पड़ा। मामला खुलने के डर से दोनों ने उसे फांसी पर लटकाने की साजिश रच डाली। सूचना पर पुलिस पहुंची तो फर्श पर पड़े खून के बारे में पूछा। इस पर चित्रा और गोलू ने बताया था कि यह चुकंदर का रस गिरा है। उसी समय पुलिस की नजर में वे शक के दायरे में आ गए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की बात सामने आने पर पुलिस ने चित्रा और गोलू को उठाकर पूछताछ की तो मामला खुल गया। चित्रा और कारोबारी के मोबाइल की कॉल डिटेल से भी हत्याकांड की गुत्थी सुलझ गई।
चित्रा के पिता सत्येंद्र सिंह के प्रभात से अच्छे संबंध थे। उनका एक दूसरे के घर आना-जाना था। प्रतापगढ़ में सरकारी नौकरी करने वाले सत्येंद्र ने दोस्ती के नाते ही प्रभात को घर में दुकान खोलने की जगह दी थी। बताते हैं कि प्रभात से किराया भी नहीं लेते थे। प्रभात दुकान खोलने के बाद जब तब सत्येंद्र के घर पहुंचा जाता था। मकान मालिक की इकलौती बेटी को वह अपने प्रेम जाल में फंसाने लगा। हालांकि उन दोनों की उम्र में दोगुने का फासला था। प्रभात और चित्रा के बीच संबंध बात घरवालों को भी पता चल गई, लेकिन उन दोनों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। उम्र बढ़ने के साथ चित्रा को दुनियादारी की समझ आई तो वह प्रभात से दूरी बनाने लगी। यही कत्ल की वजह बताई जाती है। फर्श पर पड़े खून के दाग को छिपाने के लिए चुकंदर का रस गिराया गया। सुसाइड नोट भी लिखकर रखा गया। राड मारकर हत्या के बाद फांसी पर लटकाया गया।
हत्या के जुर्म में पकडे़े जाने के बाद चित्रा ने खुद को बेगुनाह बताया। उसका कहना था कि प्रभात से वह प्रेम नहीं करती थी। वह उससे इकतरफा प्यार करता था। वह उससे बातचीत करती थी, जिसे वह प्यार समझता था। वह नासमझ थी। इसका उसने पूरा फायदा उठाया। चित्रा सिविल लाइंस स्थित एक फाइनेंस कंपनी में नौकरी करती थी। वह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी भी कर रही थी। वहीं दूसरे आरोपी गोलू ने भी बताया कि उसे कुछ नहीं पता। वह शोर सुनकर पहुंचा तो देखा कि प्रभात उसकी बहन चित्रा का गला दबा रहा था। गोलू ने खुद को बेकसूर बताया।