बीएसएफ जवान का शव रखकर धरना और जाम
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करछना इलाके में सुलमई गांव निवासी बीएसएफ के सिपाही गिरीश प्रसाद शुक्ला (55) तीन जून को कश्मीर में हुए आतंकी हमले में शहीद हो गए थे। कश्मीर से उनका शव लाकर यहां करछना में अंतिम संस्कार किया गया था। उनके तीन पुत्रों में बड़ा राघवेंद्र प्रसाद शुक्ला (25) भी बीएसएफ में सिपाही था। उसकी तैनाती मेघालय में थी। पिता की शहादत पर वह घर आया था। 14 जुलाई को वह मेघालय में अपनी तैनाती के लिए रवाना हुआ था। रविवार को मेघालय में हुए भूस्खलन में बस खड्ड में गिरने से राघवेंद्र समेत तीन जवानों की मौत हो गई। मंगलवार दोपहर बाद करीब तीन बजे राघवेंद्र का शव सुलमई गांव लाया गया तो नाराज रिश्तेदारों और परिजनों ने घर के बाहर शव के पास धरना दे दिया।
उनमें इस बात का गुस्सा था कि राघवेंद्र के पिता गिरीश की शहादत पर शासन-प्रशासन द्वारा किया गया एक भी वायदा न पूरा किया गया और न कोई सहायता की गई। डीएम ने बीस लाख रुपये की सहायता का वायदा डेढ़ महीने बाद भी नहीं पूरा किया। राघवेंद्र को छह जुलाई को ही मेघालय वापस जाना था लेकिन वह वरासत का काम कराने के लिए तहसील का चक्कर काटता रहा लेकिन अफसर टालते रहे। एसडीएम करछना कुलदेव सिंह और सीओ बृजनंदन राय बात करने आए तो ग्रामीणों ने डीएम को बुलाने की बात कही। ऐसा नहीं हुआ तो देर शाम करीब सात बजे गुस्साए लोग शव को पिकअप वाहन पर रखकर करछना-कोहराड़ मार्ग पहुंचे और वहां जाम लगा दिया।
खबर पाकर एडीएम प्रशासन वहां पहुंचे मगर ग्रामीण अड़े रहे कि डीएम को बुलाया जाए। साथ ही उनकी बात मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री तक पहुंचाई जाए। रात करीब सवा नौ बजे एडीएम प्रशासन ने ग्रामीणों को बताया कि उनकी बात शासन तक पहुंचा दी गई है। पांच दिन में मांग पूरी करने का आश्वासन दिया गया है। इसलिए जाम खत्म कर फौजी के शव को अंतिम संस्कार की खातिर ले जाएं। एडीएम के समझाने पर ग्रामीण और परिजन मान गए। फिर राघवेंद्र के शव को अंत्येष्टि की खातिर अरैल घाट ले जाया गया।
पिता की शहादत के लगभग डेढ़ माह बाद ही मेघालय में हादसे का शिकार हुए बीएसएफ के जवान राघवेंद्र प्रसाद शुक्ला के परिजनों और रिश्तेदारों का सवाल है कि जब मुख्यमंत्री दूसरे शहीदों के घर जा सकते हैं तो शहीद गिरीश के गांव क्यों नहीं आ सकते? डेढ़ माह बाद भी क्यों शहीद का परिवार शासन की उपेक्षा सह रहा है। इस परिवार पर एक साथ ऐसी मुसीबत टूटी है लेेकिन शासन-प्रशासन ऐसा संवेदनहीनता क्यों दिखा रहा है? रिश्तेदारों ने मारे गए जवान की पत्नी प्रियंका और छह माह के बेटे के भरण पोषण के लिए केंद्र तथा राज्य सरकार से एक-एक करोड़ रुपये, पेट्रोल पंप या गैस एजेंसी, शहीद गिरीश के बेटे को सरकारी नौकरी तथा शहीद आश्रित कार्ड की मांग की।
करछना से अरैल घाट के लिए रवाना होने के बाद ग्रामीणों ने रात करीब दस बजे रामपुर चौराहे पर मिर्जापुर मार्ग पर बीएसएफ जवान राघवेंद्र का शव रखकर चक्काजाम कर दिया। सीओ और एसडीएम ने किसी तरह आधा घंटे बाद शव को सड़क किनारे कर जाम खत्म कराया तो लोग अड़ गए कि अब अंतिम संस्कार बुधवार को किया जाएगा वो भी अरैल की बजाय मनैया घाट पर। करीब घंटे भर तक खींचतान के बाद पुलिस ने शव को जबरन अरैल के लिए रवाना किया। साथ में कई थानों की पुलिस फोर्स भी लगी रही ताकि फिर ग्रामीण हंगामा नहीं कर सके।