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डेढ़ सौ और भूमाफिया पर होगी कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 12 Aug 2017 02:20 AM IST
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Crime Scene
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मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के इलाहाबाद आने से पहले प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने पहले से चर्चित भूूमाफिया के खिलाफ तो कार्रवाई कर दी है। लेकिन इनसे ज्यादा जमीन कब्जाने वाले डेढ़ सौ और भूमाफिया के खिलाफ अफसरों की चुप्पी है। इनमें से कुछ का तो नाम सूची में शामिल कर लिया है। अभी भी दो दर्जन से अधिक भूमाफिया पुलिस के शिकंजे से बाहर है। उनको शामिल न करने की चर्चाएं जोरों पर हैं। हालांकि उनको प्रशासनिक और पुलिस अफसर इन बड़े माफिया से जोड़ने का तर्क दे रहे हैं।
जिले की आठ तहसील और नगर निगम की सरकारी जमीन भूमाफिया के कब्जे में होने का प्रशासनिक स्तर पर रिकार्ड तैयार कर लिया है। जिसमें पांच हजार बीघा से अधिक जमीन पर 150 से अधिक भूमाफिया कब्जे बताए गए हैं। यह जमीन नजूल, ग्राम पंचायत की बंजर, चरागाह, चकरोड, तालाब, पोखर आदि की हैं। जिसका खुलासा भूमाफिया के खिलाफ अभियान के दौरान पुलिस, प्रशासन और तहसील टीम ने संयुक्त जांच में किया है। यह टीम एक सप्ताह से माफियाओं और उनके गुर्गों के नाम से दर्ज जमीन और उनके अभिलेखों को खंगाल रही है। ज्यादातर जमीन यमुना और गंगा पार के अलावा शहर के आसपास धूमनगंज, करेली, फाफामऊ, झूंसी आदि इलाकों की है।
अकेले धूमनगंज, करेली और कैंट इलाके के 35 गांवों की 350 बीघा सरकारी जमीन इन माफिया के गुर्गों ने कब्जाने का खुलासा हुआ है। इन तीन इलाकों में ग्राम पंचायत के छह तालाब, 22 पोखरों के अलावा बंजर, चरागाह और ग्रीन वेल्ट वाली जमीनें हैं। नगर निगम और विकास प्राधिकरण की जमीन भी शामिल है। इन जमीनों को गुर्गों के नाम दर्ज कराने के लिए अभिलेखों में हेराफेरी की गई थी।
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पांच साल के दौरान कमजोर वर्ग के लोगों की जमीन पर अवैध कब्जों के आंकड़े तैयार किए जा रहे हैं। किस माफिया और उसके गुर्गों ने लोगों की जमीन पर कब्जे किए हैं, उनके पुराने पत्र निकाल लिए गए हैं। उसी के बाद पीड़ितों से संपर्क कर उनकी जमीन को अवैध कब्जों से मुक्त कराने की थानावार कार्रवाई की जाएगी। प्राइवेट जमीन पर कब्जे का ब्योरा कंप्यूटराइज्ड किया जा रहा है। बुधवार को इलाहाबाद आए प्रमुख सचिव गृह ने माफियाओं के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी मांगी थी। उन्होंने कहा था कि पूरे प्रदेश में माफिया और उनके गुर्गों की ओर से किए गए जमीन पर कब्जे का ब्योरा कंप्यूटराइज्ड कर आन लाइन किया जाएगा। जिससे यह पता चल सकेगा कि एक शहर का माफिया किन किन शहरों की जमीन पर कब्जा किए हुए हैं।
‘भूमाफिया का विस्तृत ब्योरा तैयार करने के साथ-साथ सरकारी और प्राइवेट जमीन को उनके कब्जे से मुक्त करने का अभियान चलाया जाएगा। जिसकी शुरुआत शहर के आसपास के इलाकों की बेशकीमती जमीनों को कब्जा मुक्त कराके की जा रही है।’ आनंद कुलकर्णी, एसएसपी
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जिले की आठ तहसील और नगर निगम की सरकारी जमीन भूमाफिया के कब्जे में होने का प्रशासनिक स्तर पर रिकार्ड तैयार कर लिया है। जिसमें पांच हजार बीघा से अधिक जमीन पर 150 से अधिक भूमाफिया कब्जे बताए गए हैं। यह जमीन नजूल, ग्राम पंचायत की बंजर, चरागाह, चकरोड, तालाब, पोखर आदि की हैं। जिसका खुलासा भूमाफिया के खिलाफ अभियान के दौरान पुलिस, प्रशासन और तहसील टीम ने संयुक्त जांच में किया है। यह टीम एक सप्ताह से माफियाओं और उनके गुर्गों के नाम से दर्ज जमीन और उनके अभिलेखों को खंगाल रही है। ज्यादातर जमीन यमुना और गंगा पार के अलावा शहर के आसपास धूमनगंज, करेली, फाफामऊ, झूंसी आदि इलाकों की है।
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अकेले धूमनगंज, करेली और कैंट इलाके के 35 गांवों की 350 बीघा सरकारी जमीन इन माफिया के गुर्गों ने कब्जाने का खुलासा हुआ है। इन तीन इलाकों में ग्राम पंचायत के छह तालाब, 22 पोखरों के अलावा बंजर, चरागाह और ग्रीन वेल्ट वाली जमीनें हैं। नगर निगम और विकास प्राधिकरण की जमीन भी शामिल है। इन जमीनों को गुर्गों के नाम दर्ज कराने के लिए अभिलेखों में हेराफेरी की गई थी।
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पांच साल के दौरान कमजोर वर्ग के लोगों की जमीन पर अवैध कब्जों के आंकड़े तैयार किए जा रहे हैं। किस माफिया और उसके गुर्गों ने लोगों की जमीन पर कब्जे किए हैं, उनके पुराने पत्र निकाल लिए गए हैं। उसी के बाद पीड़ितों से संपर्क कर उनकी जमीन को अवैध कब्जों से मुक्त कराने की थानावार कार्रवाई की जाएगी। प्राइवेट जमीन पर कब्जे का ब्योरा कंप्यूटराइज्ड किया जा रहा है। बुधवार को इलाहाबाद आए प्रमुख सचिव गृह ने माफियाओं के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी मांगी थी। उन्होंने कहा था कि पूरे प्रदेश में माफिया और उनके गुर्गों की ओर से किए गए जमीन पर कब्जे का ब्योरा कंप्यूटराइज्ड कर आन लाइन किया जाएगा। जिससे यह पता चल सकेगा कि एक शहर का माफिया किन किन शहरों की जमीन पर कब्जा किए हुए हैं।
‘भूमाफिया का विस्तृत ब्योरा तैयार करने के साथ-साथ सरकारी और प्राइवेट जमीन को उनके कब्जे से मुक्त करने का अभियान चलाया जाएगा। जिसकी शुरुआत शहर के आसपास के इलाकों की बेशकीमती जमीनों को कब्जा मुक्त कराके की जा रही है।’ आनंद कुलकर्णी, एसएसपी