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संगम के पास कुटिया में युवा साधु का कत्ल
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 12 Aug 2017 02:20 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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बहरिया में नेपाली बाबा की हत्या के महीने भर के भीतर ही अब संगम इलाके में कुटिया के भीतर एक युवा साधु का कत्ल कर दिया गया। उसके सिर पर कुटिया में ईंट-पत्थर से वार किए गए। शुक्रवार सुबह साधु की रक्तरंजित लाश देख कंट्रोल रूम को सूचना दी गई तो दारागंज थाने की पुलिस पहुंची। पुलिस ने मौके पर छानबीन के अलावा तमाम साधुओं और भिखारियों से बात की मगर फिलहाल साधु की पहचान नहीं हो सकी और न कातिलों का सुराग लग सका है।
संगम नोज से कुछ दूर गंगा और नाले के बीच बने टापू पर जयपुर से आए साधु रामनाथ ने कुटिया बना रखी है। रामनाथ का कहना है कि बृहस्पतिवार रात वह जंक्शन स्टेशन की तरफ भिक्षा मांगने चले गए थे। भोर में लौटे तो अपनी कुटिया में करीब 35 वर्षीय गेरुआ वस्त्रधारी इस युवा साधु का शव पड़ा देखा। वहां कुछ और लोग आ गए। घबराए साधु ने पहले संगम चौकी जाने की सोची फिर लोगों की सलाह पर मोबाइल से 100 नंबर पर फोन से जानकारी दी। कुछ देर में दारागंज थाने की पुलिस के साथ सीओ आदेश कुमार त्यागी भी पहुंच गए।
युवा साधु के सिर और माथे पर ईंट से वार किए गए थे। आसपास खून सने ईट भी पड़े थे। साधु रामनाथ ने कहा कि वह नहीं जानते कि मारा गया युुवा साधु कौन है? कहां से आया है? वह रात में जंक्शन स्टेशन चले गए थे। उसके बाद ही वह उनकी कुटिया में आया होगा। साधु की कुटिया दारागंज और झूंसी क्षेत्र की सीमा पर होने की वजह से वहां झूंसी पुलिस को भी बुलाया गया। झूंसी और दारागंज पुलिस के बीच सीमा विवाद बना तो दारागंज सीओ ने हस्तक्षेप किया। फिर केस दारागंज थाने में लिखे जाने पर सहमति बनी। शव को सीलकर चीरघर भेज दिया गया। यह रहस्य बना है कि आखिर उस युवा साधु को दूसरे बाबा की कुटिया में किसने और क्यों मारा? यह नशेड़ियों की करतूत तो नहीं है? पुलिस छानबीन कर रही है।
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संगम नोज से कुछ दूर गंगा और नाले के बीच बने टापू पर जयपुर से आए साधु रामनाथ ने कुटिया बना रखी है। रामनाथ का कहना है कि बृहस्पतिवार रात वह जंक्शन स्टेशन की तरफ भिक्षा मांगने चले गए थे। भोर में लौटे तो अपनी कुटिया में करीब 35 वर्षीय गेरुआ वस्त्रधारी इस युवा साधु का शव पड़ा देखा। वहां कुछ और लोग आ गए। घबराए साधु ने पहले संगम चौकी जाने की सोची फिर लोगों की सलाह पर मोबाइल से 100 नंबर पर फोन से जानकारी दी। कुछ देर में दारागंज थाने की पुलिस के साथ सीओ आदेश कुमार त्यागी भी पहुंच गए।
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युवा साधु के सिर और माथे पर ईंट से वार किए गए थे। आसपास खून सने ईट भी पड़े थे। साधु रामनाथ ने कहा कि वह नहीं जानते कि मारा गया युुवा साधु कौन है? कहां से आया है? वह रात में जंक्शन स्टेशन चले गए थे। उसके बाद ही वह उनकी कुटिया में आया होगा। साधु की कुटिया दारागंज और झूंसी क्षेत्र की सीमा पर होने की वजह से वहां झूंसी पुलिस को भी बुलाया गया। झूंसी और दारागंज पुलिस के बीच सीमा विवाद बना तो दारागंज सीओ ने हस्तक्षेप किया। फिर केस दारागंज थाने में लिखे जाने पर सहमति बनी। शव को सीलकर चीरघर भेज दिया गया। यह रहस्य बना है कि आखिर उस युवा साधु को दूसरे बाबा की कुटिया में किसने और क्यों मारा? यह नशेड़ियों की करतूत तो नहीं है? पुलिस छानबीन कर रही है।
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