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मंगेतर और मां के सामने युवक की नृशंस हत्या
Updated Fri, 13 Oct 2017 09:47 PM IST
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मंगेतर, मां के सामने युवक पर धारदार हथियारों से हमला, मौत
0 हनुमानगंज में वारदात, बचाने दौड़ी मंगेतर पर भी हमला, हालत गंभीर
0 नवंबर में होने वाली थी शादी, इसीलिए जेल से पेरोल पर छूटा था युवक
0 ताऊ के लड़के की हत्या में जेल में था बंद, मां ने दर्ज कराया हत्या का केस
अमर उजाला ब्यूरो
हनुमानगंज (इलाहाबाद)।
सरायइनायत थाना क्षेत्र के सदरेपुर तिराहे पर बृहस्पतिवार रात एक युवक पर उसकी उसकी मां और मंगेतर के सामने ही धारदार हथियारों से हमला कर दिया। बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। हमले के समय उसे बचाने दौड़ी मंगेतर पर भी कई वार किए गए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। मंगेतर को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। युवक अपने ताऊ के लड़के की हत्या में जेल में बंद था। नवंबर में उसकी शादी थी, इसलिए उसे छह महीने की पेरोल पर दो महीने पहले छोड़ा गया था।
सरायइनायत थाना क्षेत्र के जगबंधनपुर गांव का रहने वाला अखिलेश सिंह उर्फ गुड्डू (27) बृहस्पतिवार सुबह अपनी मां मानो देवी को लेकर क्वालिस गाड़ी से मौसी उमा देवी के घर उतरांव के धनकेसरा गांव गया था। शाम को लौटते समय वह डगरहा का पूरा गांव में अपनी मंगेतर प्रियंका सिंह के घर पहुंचा। प्रियंका को लेकर वह खरीदारी को निकल गया। मां भी साथ थीं। ड्राइवर लल्ला यादव गाड़ी चला रहा था। साथ में अखिलेश सिंह का एक दोस्त भी बैठा था। खरीदारी के बाद रात में करीब साढ़े नौ बजे वह प्रियंका को घर छोड़ने के लिए डगरहा का पूरा गांव की ओर चल दिया। गाड़ी सदरेपुर तिराहा के पास पहुंची थी कि पहले से घात लगाए हमलावरों ने गाड़ी रोक ली और अखिलेश पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। ड्राइवर और उसका दोस्त यह देख भाग निकले। अखिलेश को लहूलुहान देखकर प्रियंका भी गाड़ी से उतरकर उसे बचाने दौड़ी। मां मानो देवी उतरकर लोगों से बचाने की गुहार लगाने लगी। हमलावरों ने प्रियंका पर भी धारदार हथियार से हमला कर लहूलुहान कर दिया। इसके बाद वे भाग निकले।
आसपास केे लोग इकट्ठे हुए। एंबुलेंस से अखिलेश और प्रियंका को सीएचसी ले जाया गया, लेकिन गंभीर हालत को देखते हुए दोनों को पहले एसआरएन अस्पताल फिर जीवन ज्योति अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। जीवन ज्योति में देर रात अखिलेश की मौत हो गई। प्रियंका की हालत गंभीर बनी हुई थी। मां मानो देवी ने अखिलेश के ताऊ दान बहादुर, उसके बेटे मनोज सिंह, रिश्तेदार सचिन सिंह, गेंदा सिंह और राजेंद्र सिंह को नामजद कराते हुए हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है। चार अज्ञात के खिलाफ भी रिपोर्ट लिखी गई है। एसपी गंगापार ने बताया कि दान बहादुर और मनोज को गिरफ्तार कर लिया गया है। अन्य आरोपियों की खोजबीन की जा रही है।
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जमीन के एक टुकड़े ने कराई दुश्मनी
सरायइनायत के जगबंधनपुर के रहने वाले भाइयों यशवंत सिंह और दान बहादुर के बीच दुश्मनी जमीन एक छोटे से टुकड़े ने करा दी। विवाद इतना बढ़ गया कि सात फरवरी 2012 को दान बहादुर के लड़के सुनील की गोली मारकर हत्या कर दी गई। दान बहादुर ने यशवंत सिंह, उसके बेटे अखिलेश और मां मानो देवी को नामजद कराया था। मानो देवी और यशवंत सिंह को जमानत मिल गई थी, लेकिन अखिलेश जेल में बंद था।
शादी के लिए छह महीने की पेरोल पर छूटा था अखिलेश
जेल में रहते हुए ही अखिलेश की शादी डगरहा गांव निवासी बेला सिंह की बेटी प्रियंका के साथ तय हो गई थी। उसने शादी के लिए पेरोल मांगी थी। उसे छह महीने की पेरोल मिली तो करीब दो महीने पहले वह जेल से छूटकर गांव आ गया था। घर में जोर शोर से शादी की तैयारी चल रही थी। अखिलेश और प्रियंका की शादी नवंबर में होनी थी।
होने वाले पति को बचाने के लिए जान की नहीं की परवाह
सदरेपुर तिराहे पर जब अखिलेश को खींचकर हमलावर धारदार हथियार से वार करने लगे तो प्रियंका ने अपनी जान की परवाह नहीं की। उसने पहले तो हमलावरों के हाथ जोड़े फिर अखिलेश से लिपट गई। इसी दौरान उस पर भी हमला कर घायल कर दिया गया। ड्राइवर लल्ला यादव और अखिलेश का दोस्त पहले ही भाग निकले थे।
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0 हनुमानगंज में वारदात, बचाने दौड़ी मंगेतर पर भी हमला, हालत गंभीर
0 नवंबर में होने वाली थी शादी, इसीलिए जेल से पेरोल पर छूटा था युवक
0 ताऊ के लड़के की हत्या में जेल में था बंद, मां ने दर्ज कराया हत्या का केस
अमर उजाला ब्यूरो
हनुमानगंज (इलाहाबाद)।
सरायइनायत थाना क्षेत्र के सदरेपुर तिराहे पर बृहस्पतिवार रात एक युवक पर उसकी उसकी मां और मंगेतर के सामने ही धारदार हथियारों से हमला कर दिया। बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। हमले के समय उसे बचाने दौड़ी मंगेतर पर भी कई वार किए गए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। मंगेतर को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। युवक अपने ताऊ के लड़के की हत्या में जेल में बंद था। नवंबर में उसकी शादी थी, इसलिए उसे छह महीने की पेरोल पर दो महीने पहले छोड़ा गया था।
सरायइनायत थाना क्षेत्र के जगबंधनपुर गांव का रहने वाला अखिलेश सिंह उर्फ गुड्डू (27) बृहस्पतिवार सुबह अपनी मां मानो देवी को लेकर क्वालिस गाड़ी से मौसी उमा देवी के घर उतरांव के धनकेसरा गांव गया था। शाम को लौटते समय वह डगरहा का पूरा गांव में अपनी मंगेतर प्रियंका सिंह के घर पहुंचा। प्रियंका को लेकर वह खरीदारी को निकल गया। मां भी साथ थीं। ड्राइवर लल्ला यादव गाड़ी चला रहा था। साथ में अखिलेश सिंह का एक दोस्त भी बैठा था। खरीदारी के बाद रात में करीब साढ़े नौ बजे वह प्रियंका को घर छोड़ने के लिए डगरहा का पूरा गांव की ओर चल दिया। गाड़ी सदरेपुर तिराहा के पास पहुंची थी कि पहले से घात लगाए हमलावरों ने गाड़ी रोक ली और अखिलेश पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। ड्राइवर और उसका दोस्त यह देख भाग निकले। अखिलेश को लहूलुहान देखकर प्रियंका भी गाड़ी से उतरकर उसे बचाने दौड़ी। मां मानो देवी उतरकर लोगों से बचाने की गुहार लगाने लगी। हमलावरों ने प्रियंका पर भी धारदार हथियार से हमला कर लहूलुहान कर दिया। इसके बाद वे भाग निकले।
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आसपास केे लोग इकट्ठे हुए। एंबुलेंस से अखिलेश और प्रियंका को सीएचसी ले जाया गया, लेकिन गंभीर हालत को देखते हुए दोनों को पहले एसआरएन अस्पताल फिर जीवन ज्योति अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। जीवन ज्योति में देर रात अखिलेश की मौत हो गई। प्रियंका की हालत गंभीर बनी हुई थी। मां मानो देवी ने अखिलेश के ताऊ दान बहादुर, उसके बेटे मनोज सिंह, रिश्तेदार सचिन सिंह, गेंदा सिंह और राजेंद्र सिंह को नामजद कराते हुए हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है। चार अज्ञात के खिलाफ भी रिपोर्ट लिखी गई है। एसपी गंगापार ने बताया कि दान बहादुर और मनोज को गिरफ्तार कर लिया गया है। अन्य आरोपियों की खोजबीन की जा रही है।
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जमीन के एक टुकड़े ने कराई दुश्मनी
सरायइनायत के जगबंधनपुर के रहने वाले भाइयों यशवंत सिंह और दान बहादुर के बीच दुश्मनी जमीन एक छोटे से टुकड़े ने करा दी। विवाद इतना बढ़ गया कि सात फरवरी 2012 को दान बहादुर के लड़के सुनील की गोली मारकर हत्या कर दी गई। दान बहादुर ने यशवंत सिंह, उसके बेटे अखिलेश और मां मानो देवी को नामजद कराया था। मानो देवी और यशवंत सिंह को जमानत मिल गई थी, लेकिन अखिलेश जेल में बंद था।
शादी के लिए छह महीने की पेरोल पर छूटा था अखिलेश
जेल में रहते हुए ही अखिलेश की शादी डगरहा गांव निवासी बेला सिंह की बेटी प्रियंका के साथ तय हो गई थी। उसने शादी के लिए पेरोल मांगी थी। उसे छह महीने की पेरोल मिली तो करीब दो महीने पहले वह जेल से छूटकर गांव आ गया था। घर में जोर शोर से शादी की तैयारी चल रही थी। अखिलेश और प्रियंका की शादी नवंबर में होनी थी।
होने वाले पति को बचाने के लिए जान की नहीं की परवाह
सदरेपुर तिराहे पर जब अखिलेश को खींचकर हमलावर धारदार हथियार से वार करने लगे तो प्रियंका ने अपनी जान की परवाह नहीं की। उसने पहले तो हमलावरों के हाथ जोड़े फिर अखिलेश से लिपट गई। इसी दौरान उस पर भी हमला कर घायल कर दिया गया। ड्राइवर लल्ला यादव और अखिलेश का दोस्त पहले ही भाग निकले थे।