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दो तरफ से हुई घेराबंदी, आरोपी पिस्टल से करता रहा फायर
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वाराणसी के ध्यानार्थ
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ठेकेदार के बेटे के अपहरण का मामला
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दो तरफ से हुई थी घेराबंदी, आरोपी पिस्टल से कर रहा था फायर
भदोही में हुए ऑपरेशन में शामिल पुलिसकर्मी ने बयां की आंखों देखी
बच्चे की जान को था खतरा, ऐसे में पुलिस ने नहीं की फायरिंग
गाड़ी रुकने पर पैर में मारी गई गोली, दहशत में किया खुद पर फायर
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। बच्चे की जान को खतरा था, ऐसे में पुलिस टीम फायरिंग से बच रही थी लेकिन, अपहर्ता लगातार फायर कर रहा था। करीब 12 किमी तक पुलिस पीछा करते हुए गाड़ी रोकने को कहती रही लेकिन, वह भागता रहा। सुरियावां गांव में गाड़ी रोककर भागने केलिए उसने दरवाजा खोला ही था कि तभी मौका मिला और उसके पैर में गोली मार दी गई। खुद को घिरा देख अगले ही पल उसने पिस्टल कनपटी पर रखी और फायर झोंक दिया। जिससे वह वहीं ढेर हो गया। रविवार को बच्चे के अपहरणकर्ता को पकड़ने के दौरान हुए घटनाक्रम को इस ऑपरेशन में शामिल एक पुलिसकर्मी ने कुछ इन्हीं शब्दों में बयां किया।
पुलिसकर्मी ने बताया कि 6.50 मिनट पर पुलिस को घटना की सूचना मिली। जिसके फौरन बाद सर्विलांस टीम को एक्टिव कर दिया गया। आधे घंटे के बाद आरोपी की लोकेशन पुलिस को मिल गई थी। पहली लोकेशन सहसों में मिली, जिस पर एक टीम वाराणसी व दूसरी टीम फूलपुर की ओर से उसकी तलाश करते हुए आगे बढ़ गई। इस दौरान रास्ते में पड़ने वाले सभी थानों हंडिया, फूलपुर, सरायइनायत, झूंसी आदि की फोर्स को भी अलर्ट कर दिया गया था। पुलिसकर्मी ने बताया कि टीम में सर्विलांस टीम के सदस्य भी थे और वह लगातार आरोपी की लोकेशन बता रहे थे। इसी दौरान आरोपी की लोकेशन प्रतापपुर रोड और सरायममरेज के मोहद्दीपुर गांव में भी मिली। बताया कि दूसरी टीम फूलपुर में वारी मोड़ के पास पहुंची ही थी कि तभी उसे मैरून रंग की गाड़ी दिखी। पुलिसकर्मियों ने नंबर चेक किया तो पता चला कि बच्चे को जिस गाड़ी से अगवा किया गया, वह यही गाड़ी है। जिसके बाद पुलिस ने उसका पीछा कर लिया। टीम में शामिल पुलिसकर्मियों ने आवाज देकर गाड़ी रोकने को कहा लेकिन, तब तक उसने स्पीड और बढ़ा दी। जिस पर एक दरोगा ने दाईं और स्थित पिछले टायर पर गोली चलाई। गोली लगते ही टायर फट गया। हालांकि इसके बाद भी आरोपी ने गाड़ी नहीं रोकी और वह भागता ही रहा। कुछ दूर जाने पर टीम ने फायरिंग कर दाहिनी ओर का पिछला टायर भी पंक्चर कर दिया। पुलिस का अनुमान था कि टायर पंक्चर होने के बाद आरोपी गाड़ी रोक देगा। लेकिन अनुमान गलत साबित हुआ। आरोपी उसी स्पीड से गाड़ी भगाता रहा। हालात यह हुए कि एक वक्त ऐसा आया जब लगातार चलने की वजह से टायर फट कर अलग हो गए और पहियों पर केवल रिम ही बचे। इसके बावजूद आरोपी रिम पर ही गाड़ी दौड़ाता रहा। सुरियावा के पास पहुंचने पर उसने खिड़की का शीशा खोला और पिस्टल निकालकर फायरिंग शुरू कर दी। चूंकि गाड़ी में बच्चा भी था, ऐसे में पुलिस टीम फायर करने से बचती रही। आखिरकार सुरियावां गांव के भीतर पहुंचने पर पुलिस को मौका मिला। जब गाड़ी रोककर आरोपी ने भागने की कोशिश की। उसने जैसे ही दरवाजा खोला, पुलिस टीम में शामिल एक दरोगा ने उसके पैर में गोली मार दी और उसे पकड़ने के लिए दौड़े। हालांकि खुद को घिरा देख आरोपी ने पिस्टल से अपनी ही कनपटी पर गोली दाग दी और वह लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़ा।
दहशत में था बच्चा, बिलखने लगा
पुलिसकर्मी ने बताया पुलिस टीम भागकर बदमाश के पास पहुंची तो उसकी सांसें चल रही थीं। उधर दहशत में आया मासूम बिलख रहा था। जिस पर रणवीर को कार से बाहर निकलाने के बाद पुलिस आरोपी को लेकर अस्पताल भागी। उसकी हालत नाजुक बनी हुई थी। वहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया लेकिन कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। पुलिस टीम ने बताया कि आरोपी के पास से .32 बोर की पिस्टल भी बरामद हुई।
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फूफा के गले लगकर बिलखने लगा मासूम
जो दो टीमें इस ऑपरेशन में लगी हुई थीं उनमें से एक के साथ रणवीर के फूफा शीबू भी थे। कुछ ही देर में दूसरी टीम भी मौके पर पहुंच गई। शीबू को देखते ही मासूम रणवीर उनके गले लगकर बिलखने लगा। जिस पर उनकी भी आंखें भर आईं। उन्होंने बहुत ढ़ांढ़स बंधाया और तब जाकर वह शांत हुआ। कुछ देर बाद पिता अभिषेक व अन्य परिजन भी आ गए। बेटे को देखते ही उनकी भी आंखें नम हो गईं।
खुद की कार से किया था बच्चे को अगवा
पुलिस का कहना है कि बच्चे को अगवा करने में जिस अल्टो कार का इस्तेमाल हुआ, वह आरोपी की ही थी। इसे 2006 में खरीदा गया था और यह उसी केनाम से आरटीओ में पंजीकृत भी थी। पुलिस का कहना है कि गाड़ी को कब्जे में ले लिया गया है।
बच्चे को नुकसान पहुंचाने की नहीं थी नीयत
पुलिस का कहना है कि इस पूर घटनाक्रम से यह भी लग रहा है कि आरेापी बच्चे को
किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता था। आरोपी को गोली लगने के बाद पुलिस ने जांच पड़ताल की तो कार में कोल्ड ड्रिंक व चिप्स के पैकेट मिले। साथ ही सीट पर टॉवेल भी मिला। जब पुलिसकर्मियों ने मासूम रणवीर से पूछा कि आरोपी संजय ने उसे मारा तो नहीं, तो उसने इंकार किया। पुलिस अफसरों का मानना है कि फिलहाल यह लग रहा है कि वह सिर्फ रणवीर के माध्यम से बच्चे के परिवारवालों से रकम ऐंठना चाहता था।
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दो तरफ से हुई थी घेराबंदी, आरोपी पिस्टल से कर रहा था फायर
भदोही में हुए ऑपरेशन में शामिल पुलिसकर्मी ने बयां की आंखों देखी
बच्चे की जान को था खतरा, ऐसे में पुलिस ने नहीं की फायरिंग
गाड़ी रुकने पर पैर में मारी गई गोली, दहशत में किया खुद पर फायर
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। बच्चे की जान को खतरा था, ऐसे में पुलिस टीम फायरिंग से बच रही थी लेकिन, अपहर्ता लगातार फायर कर रहा था। करीब 12 किमी तक पुलिस पीछा करते हुए गाड़ी रोकने को कहती रही लेकिन, वह भागता रहा। सुरियावां गांव में गाड़ी रोककर भागने केलिए उसने दरवाजा खोला ही था कि तभी मौका मिला और उसके पैर में गोली मार दी गई। खुद को घिरा देख अगले ही पल उसने पिस्टल कनपटी पर रखी और फायर झोंक दिया। जिससे वह वहीं ढेर हो गया। रविवार को बच्चे के अपहरणकर्ता को पकड़ने के दौरान हुए घटनाक्रम को इस ऑपरेशन में शामिल एक पुलिसकर्मी ने कुछ इन्हीं शब्दों में बयां किया।
पुलिसकर्मी ने बताया कि 6.50 मिनट पर पुलिस को घटना की सूचना मिली। जिसके फौरन बाद सर्विलांस टीम को एक्टिव कर दिया गया। आधे घंटे के बाद आरोपी की लोकेशन पुलिस को मिल गई थी। पहली लोकेशन सहसों में मिली, जिस पर एक टीम वाराणसी व दूसरी टीम फूलपुर की ओर से उसकी तलाश करते हुए आगे बढ़ गई। इस दौरान रास्ते में पड़ने वाले सभी थानों हंडिया, फूलपुर, सरायइनायत, झूंसी आदि की फोर्स को भी अलर्ट कर दिया गया था। पुलिसकर्मी ने बताया कि टीम में सर्विलांस टीम के सदस्य भी थे और वह लगातार आरोपी की लोकेशन बता रहे थे। इसी दौरान आरोपी की लोकेशन प्रतापपुर रोड और सरायममरेज के मोहद्दीपुर गांव में भी मिली। बताया कि दूसरी टीम फूलपुर में वारी मोड़ के पास पहुंची ही थी कि तभी उसे मैरून रंग की गाड़ी दिखी। पुलिसकर्मियों ने नंबर चेक किया तो पता चला कि बच्चे को जिस गाड़ी से अगवा किया गया, वह यही गाड़ी है। जिसके बाद पुलिस ने उसका पीछा कर लिया। टीम में शामिल पुलिसकर्मियों ने आवाज देकर गाड़ी रोकने को कहा लेकिन, तब तक उसने स्पीड और बढ़ा दी। जिस पर एक दरोगा ने दाईं और स्थित पिछले टायर पर गोली चलाई। गोली लगते ही टायर फट गया। हालांकि इसके बाद भी आरोपी ने गाड़ी नहीं रोकी और वह भागता ही रहा। कुछ दूर जाने पर टीम ने फायरिंग कर दाहिनी ओर का पिछला टायर भी पंक्चर कर दिया। पुलिस का अनुमान था कि टायर पंक्चर होने के बाद आरोपी गाड़ी रोक देगा। लेकिन अनुमान गलत साबित हुआ। आरोपी उसी स्पीड से गाड़ी भगाता रहा। हालात यह हुए कि एक वक्त ऐसा आया जब लगातार चलने की वजह से टायर फट कर अलग हो गए और पहियों पर केवल रिम ही बचे। इसके बावजूद आरोपी रिम पर ही गाड़ी दौड़ाता रहा। सुरियावा के पास पहुंचने पर उसने खिड़की का शीशा खोला और पिस्टल निकालकर फायरिंग शुरू कर दी। चूंकि गाड़ी में बच्चा भी था, ऐसे में पुलिस टीम फायर करने से बचती रही। आखिरकार सुरियावां गांव के भीतर पहुंचने पर पुलिस को मौका मिला। जब गाड़ी रोककर आरोपी ने भागने की कोशिश की। उसने जैसे ही दरवाजा खोला, पुलिस टीम में शामिल एक दरोगा ने उसके पैर में गोली मार दी और उसे पकड़ने के लिए दौड़े। हालांकि खुद को घिरा देख आरोपी ने पिस्टल से अपनी ही कनपटी पर गोली दाग दी और वह लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़ा।
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दहशत में था बच्चा, बिलखने लगा
पुलिसकर्मी ने बताया पुलिस टीम भागकर बदमाश के पास पहुंची तो उसकी सांसें चल रही थीं। उधर दहशत में आया मासूम बिलख रहा था। जिस पर रणवीर को कार से बाहर निकलाने के बाद पुलिस आरोपी को लेकर अस्पताल भागी। उसकी हालत नाजुक बनी हुई थी। वहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया लेकिन कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। पुलिस टीम ने बताया कि आरोपी के पास से .32 बोर की पिस्टल भी बरामद हुई।
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फूफा के गले लगकर बिलखने लगा मासूम
जो दो टीमें इस ऑपरेशन में लगी हुई थीं उनमें से एक के साथ रणवीर के फूफा शीबू भी थे। कुछ ही देर में दूसरी टीम भी मौके पर पहुंच गई। शीबू को देखते ही मासूम रणवीर उनके गले लगकर बिलखने लगा। जिस पर उनकी भी आंखें भर आईं। उन्होंने बहुत ढ़ांढ़स बंधाया और तब जाकर वह शांत हुआ। कुछ देर बाद पिता अभिषेक व अन्य परिजन भी आ गए। बेटे को देखते ही उनकी भी आंखें नम हो गईं।
खुद की कार से किया था बच्चे को अगवा
पुलिस का कहना है कि बच्चे को अगवा करने में जिस अल्टो कार का इस्तेमाल हुआ, वह आरोपी की ही थी। इसे 2006 में खरीदा गया था और यह उसी केनाम से आरटीओ में पंजीकृत भी थी। पुलिस का कहना है कि गाड़ी को कब्जे में ले लिया गया है।
बच्चे को नुकसान पहुंचाने की नहीं थी नीयत
पुलिस का कहना है कि इस पूर घटनाक्रम से यह भी लग रहा है कि आरेापी बच्चे को
किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता था। आरोपी को गोली लगने के बाद पुलिस ने जांच पड़ताल की तो कार में कोल्ड ड्रिंक व चिप्स के पैकेट मिले। साथ ही सीट पर टॉवेल भी मिला। जब पुलिसकर्मियों ने मासूम रणवीर से पूछा कि आरोपी संजय ने उसे मारा तो नहीं, तो उसने इंकार किया। पुलिस अफसरों का मानना है कि फिलहाल यह लग रहा है कि वह सिर्फ रणवीर के माध्यम से बच्चे के परिवारवालों से रकम ऐंठना चाहता था।