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भरण-पोषण मामलों में अदालतों को संवेदनशील होना चाहिए : हाईकोर्ट
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण के मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए अदालतों को संवदेनशील होना चाहिए। न्यायमूर्ति नलिन कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने गौतमबुद्ध नगर की फैमिली कोर्ट को अंजली सिंह की लंबित भरण-पोषण आवेदन पर तेजी से निर्णय लेने का निर्देश देते हुए यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की।
याची अधिवक्ता ने दलील दी कि याची के पति के असहयोग के कारण मामला लंबे समय से लंबित है और वह गरीब होने के कारण बिना किसी भरण-पोषण के गुजारा कर रही है। कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए कहा कि ऐसे मामले, जिनमें अक्सर पीड़ित पत्नी होती है, का शीघ्र निपटारा आवश्यक है। न्यायालयों को ऐसे मामलों में अधिक संवेदनशील और सतर्क रहना चाहिए।
न्यायालय ने फैमिली कोर्ट को आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के छह महीने के भीतर मामले का निपटारा करने का निर्देश दिया और अनावश्यक स्थगन से बचने की भी सलाह दी। इसके साथ ही याचिका निस्तारित कर दी।
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याची अधिवक्ता ने दलील दी कि याची के पति के असहयोग के कारण मामला लंबे समय से लंबित है और वह गरीब होने के कारण बिना किसी भरण-पोषण के गुजारा कर रही है। कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए कहा कि ऐसे मामले, जिनमें अक्सर पीड़ित पत्नी होती है, का शीघ्र निपटारा आवश्यक है। न्यायालयों को ऐसे मामलों में अधिक संवेदनशील और सतर्क रहना चाहिए।
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न्यायालय ने फैमिली कोर्ट को आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के छह महीने के भीतर मामले का निपटारा करने का निर्देश दिया और अनावश्यक स्थगन से बचने की भी सलाह दी। इसके साथ ही याचिका निस्तारित कर दी।
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