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कोर्ट जाने की तैयारी में प्रतियोगी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 06 Mar 2017 01:39 AM IST
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यूपीपीसीएस
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की पीसीएस-2015 भर्ती की भर्ती शुरू से ही विवादों में रही है। पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा में एक पेपर आउट हो गया था। इसके बाद 2015 में 10 मई को दोबारा परीक्षा कराई गई। प्रारंभिक परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों की 29 जून से 16 जुलाई के बीच मुख्य परीक्षा हुई। मुख्य परीक्षा का रिजल्ट एक दिसंबर 2015 को घोषित हुआ। साक्षात्कार के बाद अंतिम परिणाम 2016 में 29 फरवरी को घोषित हुआ था। अब इसके परिणाम पर भी विवाद खड़ा हो गया है। महिला अभ्यर्थी के रिजल्ट में गड़बड़ी सामने आने के बाद आयोग की कार्यप्रणाली एक बार फिर कटघरे में है और नाराज प्रतियोगी कोर्ट जाने की तैयारी में हैं।
मुख्य परीक्षा में असफल महिला अभ्यर्थी को आरटीआई के अंतर्गत पहले 14 सिंतबर 2016 को कॉपी दिखाई गई। आरोप है कि उस दिन दूसरे की कॉपी दिखाई गई थी। उसमें समाजकार्य के एक पेपर में मात्र 47 अंक मिले थे। इस पर अभ्यर्थी ने फिर आपत्ति जताई तो 17 नवंबर को दोबारा कॉपी दिखाई गई। इसमें महिला अभ्यर्थी को 88 अंक मिले थे। इसके बाद कुल मिलाकर अभ्यर्थी के अंक कटऑफ से अधिक हो गए।
इस आधार पर उनका 16 फरवरी 2017 को को साक्षात्कार हुआ। फिर आयोग की ओर से 22 फरवरी को पत्र भेजकर बताया गया कि अंतिम रूप से उनका चयन नहीं हो सका है। समिति के अवनीश पांडेय का कहना है कि इस मामले ने कई सवाल खड़े किए हैं। अवनीश का आरोप है कि इतनी बड़ी गड़बड़ी सामने आने के बाद आयोग ने फिर से साक्षात्कार क्यों नहीं कराया। इसके अलावा यह भी आपत्ति है कि इस पूरे प्रकरण की जानकारी आयोग की वेबसाइट पर क्यों नहीं उपलब्ध कराई गई। अवनीश का कहना है कि हाईकोर्ट में पहले से याचिका दाखिल है। सप्लीमेंटरी दाखिल कर इस मामले को भी उसमें शामिल किया जाएगा।
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उत्तर पुस्तिका के कोड के मिलान में चूक की वजह से छात्रा के अंक दूसरे अभ्यर्थी के प्राप्तांक में जुड़ गए थे। जबकि, दूसरे अभ्यर्थी के अंक छात्रा के प्राप्तांक में जुड़ गए। गड़बड़ी सामने आने के बाद पाया गया कि छात्रा के प्राप्तांक मुख्य परीक्षा के कटऑफ से अधिक हैं। इसलिए उन्हें साक्षात्कार में शामिल किया गया। छात्रा के अंक जुड़ने के बाद भी दूसरे अभ्यर्थी के प्राप्तांक मुख्य परीक्षा के कटऑफ से कम थे। इसलिए उन्हें साक्षात्कार में शामिल नहीं किया गया था। अटल राय, सचिव, लोक सेवा आयोग
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मुख्य परीक्षा में असफल महिला अभ्यर्थी को आरटीआई के अंतर्गत पहले 14 सिंतबर 2016 को कॉपी दिखाई गई। आरोप है कि उस दिन दूसरे की कॉपी दिखाई गई थी। उसमें समाजकार्य के एक पेपर में मात्र 47 अंक मिले थे। इस पर अभ्यर्थी ने फिर आपत्ति जताई तो 17 नवंबर को दोबारा कॉपी दिखाई गई। इसमें महिला अभ्यर्थी को 88 अंक मिले थे। इसके बाद कुल मिलाकर अभ्यर्थी के अंक कटऑफ से अधिक हो गए।
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इस आधार पर उनका 16 फरवरी 2017 को को साक्षात्कार हुआ। फिर आयोग की ओर से 22 फरवरी को पत्र भेजकर बताया गया कि अंतिम रूप से उनका चयन नहीं हो सका है। समिति के अवनीश पांडेय का कहना है कि इस मामले ने कई सवाल खड़े किए हैं। अवनीश का आरोप है कि इतनी बड़ी गड़बड़ी सामने आने के बाद आयोग ने फिर से साक्षात्कार क्यों नहीं कराया। इसके अलावा यह भी आपत्ति है कि इस पूरे प्रकरण की जानकारी आयोग की वेबसाइट पर क्यों नहीं उपलब्ध कराई गई। अवनीश का कहना है कि हाईकोर्ट में पहले से याचिका दाखिल है। सप्लीमेंटरी दाखिल कर इस मामले को भी उसमें शामिल किया जाएगा।
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उत्तर पुस्तिका के कोड के मिलान में चूक की वजह से छात्रा के अंक दूसरे अभ्यर्थी के प्राप्तांक में जुड़ गए थे। जबकि, दूसरे अभ्यर्थी के अंक छात्रा के प्राप्तांक में जुड़ गए। गड़बड़ी सामने आने के बाद पाया गया कि छात्रा के प्राप्तांक मुख्य परीक्षा के कटऑफ से अधिक हैं। इसलिए उन्हें साक्षात्कार में शामिल किया गया। छात्रा के अंक जुड़ने के बाद भी दूसरे अभ्यर्थी के प्राप्तांक मुख्य परीक्षा के कटऑफ से कम थे। इसलिए उन्हें साक्षात्कार में शामिल नहीं किया गया था। अटल राय, सचिव, लोक सेवा आयोग