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Prayagraj News: पुलिस की सुस्ती से कोर्ट खफा, सात तारीखें बीतीं...पेश नहीं हुई आख्या
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जिला अदालत की ओर से मांगी गई अद्यतन आख्या तहसील बारा के सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) ने सात तारीखों के बाद भी पेश नहीं की। इससे खफा कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट और मारपीट के आरोपी की जमानत अर्जी मंजूर कर ली। साथ ही विवेचक सहायक पुलिस आयुक्त को कड़ी फटकार लगाई।
यह आदेश एससी/एसटी एक्ट के विशेष न्यायाधीश कुमार मयंक की अदालत ने उज्ज्वल सिंह की जमानत अर्जी स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने पत्रावली में पाया कि विवेचक ने मामले में गंभीर धाराओं को कम किया था। इस पर शिकायतकर्ता ने आपत्ति जताई तो अपर पुलिस आयुक्त यमुनानगर के आदेश पर मामले की जांच पूर्व विवेचक से लेकर बारा के सहायक पुलिस आयुक्त को सौंपी गई थी। इसके बाद भी जांच की ताजा स्थिति स्पष्ट नहीं थी। लिहाजा कोर्ट ने विवेचक से जांच की अद्यतन आख्या तलब की।
इसके बाद सात तारीखें बीत गईं लेकिन जांच की अद्यतन आख्या पेश नहीं की गई। यहां तक 19 जून को अनिवार्य रूप से आख्या पेश करने का निर्देश दिया गया। शाम करीब पौने चार बजे तक अदालत ने इंतजार किया लेकिन आख्या पेश नहीं की गई। लिहाजा, विवेचक की सुस्ती से खफा अदालत ने आरोपी को जमानत पर रिहा करने का आदेश दे दिया।
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रामपुर चौराहे पर हुई थी मारपीट
मामला थाना औद्योगिक क्षेत्र नैनी का है। शिकायतकर्ता अमित कुमार ने एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि 27 दिसंबर की रात रामपुर चौराहे पर आरोपी उज्ज्वल ने उसके साथ मारपीट की। जातिसूचक शब्द का प्रयोग करते हुए जान से मारने की धमकी दी। जब वह अपने परिजनों के साथ उलाहना देने आरोपी के घर पहुंचा तो उसने उनपर गाड़ी चढ़ा दी। वह और उसके साथ गए अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज करते हुए आरोपी को जेल भेज दिया था। आरोपी ने कोर्ट में दलील दी कि उस पर लगे आरोप में सजा सात साल से कम है इसलिए वह जमानत का हकदार है।
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यह आदेश एससी/एसटी एक्ट के विशेष न्यायाधीश कुमार मयंक की अदालत ने उज्ज्वल सिंह की जमानत अर्जी स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने पत्रावली में पाया कि विवेचक ने मामले में गंभीर धाराओं को कम किया था। इस पर शिकायतकर्ता ने आपत्ति जताई तो अपर पुलिस आयुक्त यमुनानगर के आदेश पर मामले की जांच पूर्व विवेचक से लेकर बारा के सहायक पुलिस आयुक्त को सौंपी गई थी। इसके बाद भी जांच की ताजा स्थिति स्पष्ट नहीं थी। लिहाजा कोर्ट ने विवेचक से जांच की अद्यतन आख्या तलब की।
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इसके बाद सात तारीखें बीत गईं लेकिन जांच की अद्यतन आख्या पेश नहीं की गई। यहां तक 19 जून को अनिवार्य रूप से आख्या पेश करने का निर्देश दिया गया। शाम करीब पौने चार बजे तक अदालत ने इंतजार किया लेकिन आख्या पेश नहीं की गई। लिहाजा, विवेचक की सुस्ती से खफा अदालत ने आरोपी को जमानत पर रिहा करने का आदेश दे दिया।
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रामपुर चौराहे पर हुई थी मारपीट
मामला थाना औद्योगिक क्षेत्र नैनी का है। शिकायतकर्ता अमित कुमार ने एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि 27 दिसंबर की रात रामपुर चौराहे पर आरोपी उज्ज्वल ने उसके साथ मारपीट की। जातिसूचक शब्द का प्रयोग करते हुए जान से मारने की धमकी दी। जब वह अपने परिजनों के साथ उलाहना देने आरोपी के घर पहुंचा तो उसने उनपर गाड़ी चढ़ा दी। वह और उसके साथ गए अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज करते हुए आरोपी को जेल भेज दिया था। आरोपी ने कोर्ट में दलील दी कि उस पर लगे आरोप में सजा सात साल से कम है इसलिए वह जमानत का हकदार है।