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आपदा को अवसर में बदला : रेशम के धागों से सजाया जीवन का गुलदस्ता

Mon, 03 Aug 2020 06:18 PM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अविनाशी श्रीवास्तव
अमर उजाला नेटवर्क, अविनाशी श्रीवास्तव Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 03 Aug 2020 06:18 PM IST
सार

  • कादीपुर के सरस्वती आजीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं की पहल
  • सचिव ने खुद के साथ समूह की 100 महिलाओं को दिया नया आधार

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corona warriors of prayagraj decorated bouquet of life with silk thread
रेशम के धागों से सजाया जीवन का गुलदस्ता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फेसबुक के साथ अमर उजाला ने कोरोना सेनानियों के जज्बे और जुनून पर यह श्रृंखला शुरू की है। इसके तहत आपको साहसी कोरोना सेनानियों की कथाएं नियमित रूप से पढ़ने को मिलेंगी।

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प्रयागराज के सहसों के कादीपुर गांव की महिलाएं अब रेशमी गुलदस्तों से अपने जीवन को संवार रही हैं। लॉकडाउन में चप्पल का कारोबार मंदा पड़ा तो सरस्वती आजीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं 100 महिलाओं ने हैंडीक्राफ्ट को अपनी आमदनी का जरिया बनाया। इस बार भी उनकी प्रणेता बनीं सचिव पल्लवी परमार। पल्लवी ने समूह की महिलाओं को रेशमी धागों से गुलदस्ता, चाबी का गुच्छा आदि  बनाने का प्रशिक्षण दिया। बाजार में समूह की तैयार वस्तुओं की अच्छी खासी मांग है।
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स्वयं सहायता समूह में शामिल महिलाओं ने चप्पल बनाने का काम शुरू किया था। उनके द्वारा बनाए गए चप्पलों की मांग भी खूब है। बहरिया ब्लाॅक के अंतर्गत स्वयं सहायता समूह के 1600 सदस्य तथा फेरीवाले उनके नियमित ग्राहक हैं। इसके अलावा बाजार की तलाश में अलग-अलग स्थानों पर मेला लगाया जाता है।
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बैंक ऑफ बड़ौदा समेत अन्य संस्थाओं ने भी इन महिलाओं से चप्पलें खरीदीं। समूह की महिलाओं ने इसका दायरा बढ़ाने के लिए कई अन्य संस्थाओं से भी संपर्क किया है, लेकिन लॉकडाउन ने फिलहाल इस पर ब्रेक लगा दिया। बाजार सिमटने के साथ चप्पल बनाने के लिए माल भी नहीं आ पा रहा। ऐसे में महिलाओं ने चप्पल के कारोबार के साथ हैंडीक्राफ्ट का काम शुरू किया। सचिव पल्लवी ने महिलाओं को रेशम तथा अन्य धागों से बैग, गुच्छा, टैडीबियर समेत अन्य सजावटी सामान बना कर आत्मनिर्भर बनाया।

प्रधानमंत्री कर चुके हैं सराहना
सरस्वती आजीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं महिलाओं के काम की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सराहना कर चुके है। प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इन महिलाओं का हौसला बढ़ाते हुए इनसे प्रेरणा लेने की बात कही थी। इसके बाद इन महिलाओं के काम और विस्तार लेने लगा।

हर काम के लिए बना रखा है समूह...
रुचि और हुनर के अनुसार 15-20 महिलाओं का समूह बनाया गया है। अलग-अलग समूह में महिलाएं शीशा स्टैंड, सजावटी शीशा, जूट एवं धागे के बैग, मोमबत्ती आदि तैयारी करती हैं।


‘लॉकडाउन में चप्पल का काम कम हो गया। महिलाएं खाली हो गईं। मैंने मुंबई में हस्तकला विषय से पढ़ाई की है। उस पढ़ाई का उपयोग यहां किया। महिलाओं के अलग-अलग समूह बनाए गए। फिर मैंने ही उन्हें मोमबत्ती, शीशा, शीशा स्टैंड, बैग, गुलदस्ता आदि बनाने का प्रशिक्षण दिया। अब सभी के पास पर्याप्त काम और आमदनी है।’
-पल्लवी परमार

(फेसबुक ने इस श्रृंखला के लिए हमारे साथ भागीदारी की है, लेकिन इस कड़ी में प्रकाशित होने वाले समाचारों पर कोई संपादकीय नियंत्रण नहीं लगाया है।)

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