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कोरोना वायरस: जेल बंदियों की सेहत पर नजर रखेगी एसटीएफ
Thu, 19 Mar 2020 01:38 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 19 Mar 2020 01:38 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : सोशल मीडिया
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केंद्रीय कारागार नैनी में बंद करीब 4500 सजायाफ्ता और विचाराधीन कैदियों को कोरोना वायरस से बचाने हेतु पुलिस महानिदेशक/महानिरीक्षक कारागार प्रशासन की ओर से 18 मार्च को एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) का गठन किया गया। जिसका अध्यक्ष वरिष्ठ जेल अधीक्षक हरिबक्श सिंह को बनाया गया है।
सदस्य के रूप में जेल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वेद प्रकाश चंद्र, कारपाल प्रशासन धर्मपाल सिंह, उपकारपाल अभय कुमार शुक्ला एवं चिकित्साधीक्षक द्वारा नामित एक पैरामेडिकल स्टाफ शामिल हैं।
स्पेशल टास्क फ ोर्स के सभी सदस्य प्रतिदिन सुबह और शाम जेल के सभी चक्रों में घूमेंगे और वहां चिन्हित एवं सुनिश्चित करेंगे कि कारागार का कोई बंदी कोरोना वायरस से संक्रमित है अथवा नहीं। यदि कोई बंदी इसकी चपेट में पाया जाता है तो अस्पताल चक्र के अंदर बैरक एक को रिक्त करके आइसोलेशन सेल बनाकर ऐसे बंदियों को सामान्य बंदियों से अलग रखा जाएगा और उसके समुचित उपचार की व्यवस्था की जाएगी।
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सभी चक्राधिकारी अपने चक्र में इस बात का ध्यान रखेंगे कि अगर किसी बंदी को सर्दी, जुखाम, खांसी की शिकायत आती है तो उसे तत्काल उच्चाधिकारी को सूचित करेंगे और उसे भी अलग रखा जाएगा। सभी नए बंदियों को 10 दिन तक स्पेशल चिकित्सकीय बैरक में रखा जाएगा। जिसका चिकित्सक द्वारा नियमित परीक्षण किया जाएगा।
सर्दी जुखाम एवं खासी से पीड़ित मुलाकातियों को बिना मुलाकात के ही जेल प्रशासन ने बाहर से ही वापस कर दिया और हिदायत दी कि इस तरह के संक्रमण से संक्रमित लोग कतई मुलाकात के लिए न आएं। इस संबंध में प्रभारी वरिष्ठ जेल अधीक्षक हरीबक्श सिंह की ओर से समस्त विभागीय अधिकारियों को एक पत्र भेजकर सूचित किया जा चुका है।
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सदस्य के रूप में जेल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वेद प्रकाश चंद्र, कारपाल प्रशासन धर्मपाल सिंह, उपकारपाल अभय कुमार शुक्ला एवं चिकित्साधीक्षक द्वारा नामित एक पैरामेडिकल स्टाफ शामिल हैं।
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स्पेशल टास्क फ ोर्स के सभी सदस्य प्रतिदिन सुबह और शाम जेल के सभी चक्रों में घूमेंगे और वहां चिन्हित एवं सुनिश्चित करेंगे कि कारागार का कोई बंदी कोरोना वायरस से संक्रमित है अथवा नहीं। यदि कोई बंदी इसकी चपेट में पाया जाता है तो अस्पताल चक्र के अंदर बैरक एक को रिक्त करके आइसोलेशन सेल बनाकर ऐसे बंदियों को सामान्य बंदियों से अलग रखा जाएगा और उसके समुचित उपचार की व्यवस्था की जाएगी।
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सभी चक्राधिकारी अपने चक्र में इस बात का ध्यान रखेंगे कि अगर किसी बंदी को सर्दी, जुखाम, खांसी की शिकायत आती है तो उसे तत्काल उच्चाधिकारी को सूचित करेंगे और उसे भी अलग रखा जाएगा। सभी नए बंदियों को 10 दिन तक स्पेशल चिकित्सकीय बैरक में रखा जाएगा। जिसका चिकित्सक द्वारा नियमित परीक्षण किया जाएगा।
सर्दी जुखाम एवं खासी से पीड़ित मुलाकातियों को बिना मुलाकात के ही जेल प्रशासन ने बाहर से ही वापस कर दिया और हिदायत दी कि इस तरह के संक्रमण से संक्रमित लोग कतई मुलाकात के लिए न आएं। इस संबंध में प्रभारी वरिष्ठ जेल अधीक्षक हरीबक्श सिंह की ओर से समस्त विभागीय अधिकारियों को एक पत्र भेजकर सूचित किया जा चुका है।