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कोरोना के कहर से जन्म दर में आई कमी, दो साल में 15 हजार बच्चे हुए कम

Tue, 15 Jun 2021 02:14 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 15 Jun 2021 02:14 AM IST
सार

  • 2018-19 के मुकाबले 2020-21 में आई कमी, कोरोना काल में परिवार बढ़ाने से ज्यादा सुरक्षा रही लोगों की प्राथमिकता
  • स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक कोरोना के डर से लोग फेमिली आगे बढ़ाने में दिखा रहे अनिच्छा

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Corona's havoc reduced birth rate, 15 thousand children were reduced in two years
birth rate

विस्तार

संक्रमण काल में जिले में शिशु जन्म दर में गिरावट आई है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि 2018-19 की तुलना में पिछले साल यह 3.48 फीसदी कम हुई थी। जबकि, इस साल यानी 2020-21 में यह 12.77 फीसदी कम हो गई है। इसकी कई वजहें बताई जा रही है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग इसे जनसंख्या स्थिरता के पक्ष में देखा जा रहा है। लेकिन, तमाम चिकित्सकों का यही मानना है कि कोरोना काल में अधिकतर लोग परिवार नहीं बढ़ाना चाहते। यह आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा, दोनों से जुड़ा निर्णय है।
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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 2018-19 में सरकारी अस्पतालों में कुल 71 हजार, 466 बच्चों ने जन्म लिया था। जबकि, निजी अस्पतालों के आंकड़ों को जोड़ दिया जाए तो यह संख्या तकरीबन एक लाख, 10 हजार है। 2019-20 में यह आंकड़ा एक लाख, छह हजार, 180 पर आ गया। यानी इस दौरान बच्चों की संख्या में तकरीबन तीन हजार, चार सौ की कमी हुई। इसी तरह 2020-21 के आंकड़े को देखे तो इसमें 2018-19 के मुकाबले में साढ़े चौदह हजार की कमी हुई। 2020-21 में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या घटकर 95960 पर आ गई। 
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स्वास्थ्य विभाग जन्मदर में आई कमी के पीछे कई वजहें बता रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रोजेक्ट मैनेजर विनोद कुमार सिंह कहते हैं कि कोरोना इसकी मुख्य वजह है। डेढ़ साल से लोग लगातार परेशान हैं। महामारी का डर, तनाव और भविष्य की चिंता से जन्म दर में गिरवाट दर्ज की गई है। इसके अलावा लोगों का पलायन भी हुआ है। यह भी बड़ा कारण है।
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स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय की गॉयनी विभाग की एचओडी डॉ. अमृता चौरसिया शिशु दर में गिरावट को जागरूकता से जोड़ती हैं। कहती हैं, लोग जागरूक हुए हैं। बच्चे का जीवन अच्छा हो, इसके लिए वे फैमिली प्लानिंग पर बेहतर सोच के साथ काम कर रहे हैं। नए शादीशुदा जोड़े कोरोना के दौर में बच्चे नहीं चाहते हैं। 

अस्पतालों में संक्रमण का डर
सामान्य तौर पर गर्भावस्था में बहुत सारी दिक्कतें होती हैं। डफरिन अस्पताल की एसआईसी डॉ. ज्योति सिंह कहती हैं कि कोरोना की डर से अस्पताल वैसे ही बंद रहे। दिक्कत यह थी कि गर्भावस्था में गर्भवती महिलाएं दिखाने जाएं कहां। ऐसे में लोगों की पहली प्राथमिकता संक्रमण से बचना रहा। इसलिए भी जन्म दर में कमी आई है। 


कोरोना की डर से लोग अस्पताल जाने से बचने के लिए परिवार बढ़ाने से बच रहे हैं। यह जन्म दर में कमी का बड़ा कारण है। जिले के लिए यह एक सकारात्मक बात है। - सीएमओ डॉ. प्रभाकर राय, सीएमओ

सन    जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या
2018-19     - 110000
2019-20     - 106180
2020-21     - 95960
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