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हाईकोर्ट : सजायाफ्ता कैदियों को पर्याप्त भोजन, वर्दी और मिले उचित मानदेय, भोजन पर कम खर्च करने पर उठाए सवाल

Thu, 06 Apr 2023 09:32 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 06 Apr 2023 09:32 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जेलों में बंद सजायाफ्ता कैदियों को दिए जा रहे मानदेय सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं के न मिलने पर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा है कि सरकार इस संबंध में उपयुक्त कदम उठाए।

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Convicted prisoners get adequate food, uniform and proper honorarium
कैदी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जेलों में बंद सजायाफ्ता कैदियों को दिए जा रहे मानदेय सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं के न मिलने पर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा है कि सरकार इस संबंध में उपयुक्त कदम उठाए। जेलों में कैदियों को पर्याप्त भोजन, वर्दी मिले और उचित मानदेय दिया जाए ताकि जेलों में लंबा समय बिताने वाले कैदियों के जीवन स्तर में सुधार हो सके। कोर्ट ने इस संबंध में महाधिवक्ता से अगली सुनवाई पर जेलों में सुधार के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है। कोर्ट अब इस मामले में 22 मई को सुनवाई करेगी।

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वाराणसी के बच्चे लाल की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति एसडी सिंह की खंडपीठ सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान जेल वित्त सचिव और जेल महानिदेशक कोर्ट में उपस्थित थे। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बताया गया कि जेलों में काम कर रहे कैदियों को दिए जाने वाले मानदेय, प्रतिदिन खाने पर खर्च किए जाने वाले बजट और उनको दी जाने वाली वर्दी का ब्योरा मांगा।

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बताया गया कि कैदियों को प्रतिदिन खाने पर 76 रुपये खर्च हो रहे हैं। इस पर कोर्ट ने आपत्ति जताई। कहा, कि इतने कम बजट में एक कैदी को खाना कैसे दिया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि कागजी बातें और जमीनी हकीकत अलग है। हालत यह है कि कैदियों को उनके शरीर के भार के अनुसार खाना दिया जा रहा है। यह सही नहीं है।

कोर्ट ने मानदेय पर भी चिंता जताई। कहा कि नए जेल सुधार कानूनों के आने के बाद मानदेय जस का तस है। उसमे कोई बदलाव नहीं है। फिर नए और पुराने जेल सुधार कानून में फर्क क्या है। कोर्ट ने पूछा कि यूपी में कितनी वर्टिकल जेलें बनाई जा रही हैं? जेल अधिकारी इसका सटीक जवाब नहीं दे पाए।

कोर्ट ने कैदियों का कौशल विकास किए जाने के मामले में भी ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत बताई। इस पर महाधिवक्ता ने आश्वासन दिया कि वह जेलों की सुधार के मामले में अफसरों से बात कर ठोस कदम उठाएंगे। इस पर कोर्ट ने उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी अगली तिथि पर देने को कहा। साथ ही सुनवाई के लिए तिथि तय कर दी।

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