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समाज शास्त्र विभाग के अध्यक्ष के पत्र पर विवाद
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आंतरिक मूल्यांकन में अधिकतम 70 फीसदी अंक देने की बाबत सीएमपी प्राचार्य को लिखा पत्र
ऑक्टा महासचिव ने जताई आपत्ति, कहा, यह शिक्षकों की निष्ठा-योग्यता पर सवाल
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के समाज शास्त्र विभाग के अध्यक्ष की ओर से सीएमपी पीजी कॉलेज के प्राचार्य को पत्र लिखने पर विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने पीजी कक्षाओं की सेमेस्टर परीक्षा में आंतरिक मूल्यांकन में अधिकतम 70 फीसदी अंक देने को कहा है। इससे अधिक अंक देने पर विभागाध्यक्ष ने पुनर्मूल्यांकन की बात कही है। समाज शास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. आशीष सक्सेना की ओर से पत्र भेजे जाने पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय संघटक कॉलेज अध्यापक संघ (ऑक्टा) ने कड़ी आपत्ति जताई है। उसका कहना है कि इससे संघटक कॉलेजों के शिक्षकों की योग्यता, निष्ठा एवं कॉलेजों की स्वायत्तता को चोट पहुंची है।
सीएमपी प्राचार्य को लिखे पत्र में प्रो. आशीष सक्सेना यह भी कहा है कि आंतरिक मूल्यांकन के अंकों की सूची दो प्रति में तैयार करके एक परीक्षा नियंत्रक तथा दूसरी विभाग को भेजी जाए। प्रो. सक्सेना का कहना है कि कॉलेज में विभाग की संरचना में बदलाव के बाद इस प्रकार का आदेश जरूरी था, इसलिए यह पत्र लिखा गया है। सीएमपी पीजी कॉलेज में दो दिन पहले विभाग का संयोजक बदल दिए जाने के बाद इस प्रकार का पत्र लिखे जाने को लेकर ऑक्टा ने सवाल उठाए हैं। सीएमपी में प्रो. सक्सेना की पत्नी समाज शास्त्र विभाग की संयोजक के पद पर तैनात थीं, दो दिन पहले उनके पद से हटने के बाद यह पत्र भेजे जाने को लेकर ऑक्टा ने आपत्ति उठाई है।
आक्टा महासचिव डॉ. उमेश प्रताप सिंह का कहना है कि पता चला है कि ऑक्टा के व्हाट्सएप ग्रुप में इस पत्र को पोस्ट करने वाले शिक्षक को प्रो. सक्सेना की पत्नी ने धमकी भी दी है। ऑक्टा महासचिव ने कहा कि विवि के किसी विभागाध्यक्ष की ओर से कॉलेज के किसी विभाग को पहली बार दिशा निर्देश जारी किया गया है, यह निर्देश स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने इसे शिक्षकों की योग्यता और निष्ठा के खिलाफ बताया। ऑक्टा महासचिव का कहना था कि समाज शास्त्र विभाग के अध्यक्ष यदि आगे इस प्रकार की बात करेंगे तो उनका विरोध होगा। वहीं दूसरी ओर समाज शास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. आशीष सक्सेना का कहना है कि उन्होंने सेमेस्टर परीक्षा के सीबीसीएस मूल्यांकन में नियमों के अनुसार ही पत्र लिखा है।
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ऑक्टा महासचिव ने जताई आपत्ति, कहा, यह शिक्षकों की निष्ठा-योग्यता पर सवाल
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के समाज शास्त्र विभाग के अध्यक्ष की ओर से सीएमपी पीजी कॉलेज के प्राचार्य को पत्र लिखने पर विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने पीजी कक्षाओं की सेमेस्टर परीक्षा में आंतरिक मूल्यांकन में अधिकतम 70 फीसदी अंक देने को कहा है। इससे अधिक अंक देने पर विभागाध्यक्ष ने पुनर्मूल्यांकन की बात कही है। समाज शास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. आशीष सक्सेना की ओर से पत्र भेजे जाने पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय संघटक कॉलेज अध्यापक संघ (ऑक्टा) ने कड़ी आपत्ति जताई है। उसका कहना है कि इससे संघटक कॉलेजों के शिक्षकों की योग्यता, निष्ठा एवं कॉलेजों की स्वायत्तता को चोट पहुंची है।
सीएमपी प्राचार्य को लिखे पत्र में प्रो. आशीष सक्सेना यह भी कहा है कि आंतरिक मूल्यांकन के अंकों की सूची दो प्रति में तैयार करके एक परीक्षा नियंत्रक तथा दूसरी विभाग को भेजी जाए। प्रो. सक्सेना का कहना है कि कॉलेज में विभाग की संरचना में बदलाव के बाद इस प्रकार का आदेश जरूरी था, इसलिए यह पत्र लिखा गया है। सीएमपी पीजी कॉलेज में दो दिन पहले विभाग का संयोजक बदल दिए जाने के बाद इस प्रकार का पत्र लिखे जाने को लेकर ऑक्टा ने सवाल उठाए हैं। सीएमपी में प्रो. सक्सेना की पत्नी समाज शास्त्र विभाग की संयोजक के पद पर तैनात थीं, दो दिन पहले उनके पद से हटने के बाद यह पत्र भेजे जाने को लेकर ऑक्टा ने आपत्ति उठाई है।
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आक्टा महासचिव डॉ. उमेश प्रताप सिंह का कहना है कि पता चला है कि ऑक्टा के व्हाट्सएप ग्रुप में इस पत्र को पोस्ट करने वाले शिक्षक को प्रो. सक्सेना की पत्नी ने धमकी भी दी है। ऑक्टा महासचिव ने कहा कि विवि के किसी विभागाध्यक्ष की ओर से कॉलेज के किसी विभाग को पहली बार दिशा निर्देश जारी किया गया है, यह निर्देश स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने इसे शिक्षकों की योग्यता और निष्ठा के खिलाफ बताया। ऑक्टा महासचिव का कहना था कि समाज शास्त्र विभाग के अध्यक्ष यदि आगे इस प्रकार की बात करेंगे तो उनका विरोध होगा। वहीं दूसरी ओर समाज शास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. आशीष सक्सेना का कहना है कि उन्होंने सेमेस्टर परीक्षा के सीबीसीएस मूल्यांकन में नियमों के अनुसार ही पत्र लिखा है।
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