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UPPSC :  एपीओ भर्ती में आरक्षण को लेकर विवाद, 44 में से आठ पद सामान्य के लिए

Mon, 15 Aug 2022 12:51 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 15 Aug 2022 12:51 AM IST
सार

अभियोजन निदेशालय की ओर से बताया गया है कि चयन वर्ष 2018-19, 2019-20, 2020-21 से उत्पन्न हुईं कुल 44 रिक्तियों पर भर्ती के लिए अधियाचन शासन को प्रेषित किया गया है,

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Controversy over reservation in APO recruitment
UPPSC - फोटो : Social media

विस्तार

सहायक अभियोजन अधिकारी (एपीओ) भर्ती में आरक्षण को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) एपीओ के जिन 44 पदों पर भर्ती करने जा रहा है, उसमें सामान्य वर्ग के महज आठ पद हैं। यह जानकारी उत्तर प्रदेश अभियोजन निदेशालय ने सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के तहत प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडेय को दी है। अवनीश ने अभियोजन निदेशालय से पूछा था कि एपीओ भर्ती परीक्षा-2022 के लिए यूपीपीएससी को कुल कितने पद प्रेषित किए गए। अभियोजन निदेशालय से इन पदों का वर्गवार विवरण भी मांगा था।

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अभियोजन निदेशालय की ओर से बताया गया है कि चयन वर्ष 2018-19, 2019-20, 2020-21 से उत्पन्न हुईं कुल 44 रिक्तियों पर भर्ती के लिए अधियाचन शासन को प्रेषित किया गया है, जिनमें श्रेणीवार सामान्य के आठ, अनुसूचित जाति के आठ, अनुसूचित जनजाति के तीन, अन्य पिछड़ा वर्ग के 21, ईडब्ल्यूएस के चार और क्षैतिज आरक्षण महिलाओं के लिए 20 फीसदी के अनुसार आठ पद आरक्षित हैं।

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एपीओ प्रारंभिक परीक्षा-2022 के लिए 64390 अभ्यर्थियों ने आवेदन किए हैं और यह परीक्षा 21 अगस्त को लखनऊ एवं प्रयागराज के विभिन्न केंद्रों में आयोजित होने जा रही है। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडेय और मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय का आरोप है कि भर्ती में आरक्षण के नियमों की पूरी तरह से अनदेखी की गई है।


आरक्षण नियमों के तहत आधे यानी 22 पद सामान्य वर्ग के लिए होने चाहिए थे, जबकि सामान्य वर्ग के महज आठ पद हैं, जो संविधान की मूल भावना के प्रतिकूल है। समिति के अध्यक्ष एवं मीडिया प्रभारी का कहना है कि इस मुद्द पर हर स्तर से लड़ाई लड़ी जाएगी और प्रतियोगी छात्र न्यायालय की शरण में भी जाएंगे।

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