फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Contract ward boy gets justice from High Court, order for reinstatement in service

High Court : हाईकोर्ट से संविदा वार्ड बॉय को मिला न्याय, सेवा बहाली का आदेश

Mon, 21 Apr 2025 06:07 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 21 Apr 2025 06:07 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेरठ के एक संविदा पर कार्यरत वार्डबॉय नावेद अख्तर की सेवा समाप्ति को अवैध घोषित करते हुए नौकरी पर बहाल करने का आदेश दिया।

विज्ञापन
Contract ward boy gets justice from High Court, order for reinstatement in service
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेरठ के एक संविदा पर कार्यरत वार्डबॉय नावेद अख्तर की सेवा समाप्ति को अवैध घोषित करते हुए नौकरी पर बहाल करने का आदेश दिया। कोर्ट ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी के 24 मई, 2022 को पारित आदेश और जिला स्वास्थ्य समिति की 28 अप्रैल 2022 की सिफारिश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा है कि चिकित्सा अधिकारी एक माह के भीतर संविदाकर्मी की बहाली पर विचार करें। यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार ने दिया।

विज्ञापन

मेरठ जिला अस्पताल में याची नावेद अख्तर सात साल से वार्डबॉय के रूप में काम कर रहा था। इसी बीच 19 से 25 अप्रैल तक वह बीमार होने के चलते अनुपस्थित रहा। उन्होंने इसके लिए मेडिकल प्रमाणपत्र और लिखित स्पष्टीकरण प्रशासन को दिया। इन सब तथ्यों की अनदेखी करते हुए उसे 28 अप्रैल 2022 को बिना किसी लिखित नोटिस के नौकरी से निकाल दिया गया। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।

विज्ञापन

याची के वकील ने दलील दी कि निदेशक स्वास्थ्य मिशन, उत्तर प्रदेश की ओर से 7 मार्च, 2019 को जारी सर्कुलर के अनुसार गंभीर आरोप होने पर दुर्लभतम मामलों में ही जिला स्तरीय स्वास्थ्य समिति संविदा कर्मी को नौकरी से निकाल सकती है। अन्यथा कुछ अन्य दंड लगाने का निर्देश दिया गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि स्वास्थ्य मिशन का 7 मार्च 2019 का सर्कुलर संविदाकर्मी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की स्पष्ट प्रक्रिया बताता है। इसके तहत गंभीर मामलों में सेवासमाप्ति का आदेश दिया जा सकता है। अधिकारियों ने न तो मेडिकल प्रमाणपत्र को गंभीरता से लिया और न ही सर्कुलर का पालन किया। कोर्ट ने संविदा कर्मचारी के खिलाफ जारी किए गए बर्खास्तगी आदेश को रद्द कर दिया। निर्देश दिया कि एक माह के भीतर वार्डबॉय की सेवा बहाल करने पर उपयुक्त फैसला लिया जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed