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जीवंत दस्तावेज और दर्शन है भारत का संविधान- न्यायमूर्ति सुनीत कुमार
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जीवंत दस्तावेज और दर्शन है भारत का संविधान- न्यायमूर्ति सुनीत कुमार
प्रयागराज। संविधान दिवस के अवसर पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में आयोजित संगोष्ठी में न्यायमूूर्ति सुनीत कुमार ने कहा कि भारत का संविधान मात्र एक साहित्य और दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह एक जीवंत दस्तावेज और दर्शन है। बीते 75 वर्षों में सौ से अधिक संशोधनों के साथ यह आज की पीढ़ी के भी अनुकूल है। संगोष्ठी का आयोजन अधिवक्ता परिषद हाईकोर्ट की इकाई ने किया था। संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि न्यायमूर्ति रामकृष्ण गौतम ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 51 ए हमें मौलिक कर्तव्यों की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि मात्र अधिकारों की बात करने वाला समाज अराजकता को जन्म देता है। अगर हम सभी अपने कर्तव्यों का पालन सही तरीके से कर लें तो हमारे अधिकार खुद ही सुरक्षित हो जाएंगे।
वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने मौलिक कर्तव्यों की चर्चा करते हुए कहा कि कर्तव्यों का सिद्धांत नया नहीं है। यह हमारे शास्त्रों में वर्णित है, जिसे संविधान में लाया गया। मगर सवाल यह है कि क्या हम संविधान में वर्णित अपने मौलिक कर्तव्यों का पालन कर पाए हैं। देश हमें सबकुछ देता है, मगर यह सोचने की बात है कि हम देश को क्या दे पाए हैं। उन्होंने कहा कि जितना जरूरी अपने अधिकारों के प्रति सजग होना है, उससे कहीं जरूरी अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक होना है।
अधिवक्ता परिषद के महामंत्री शीतल ने मौजूदा समय में अधिवक्ता परिषद की उपयोगिता और प्रासंगिकता की जानकारी दी। संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे अधिवक्ता परिषद के अध्यक्ष वीपी श्रीवास्तव ने सभी अधिवक्ताओं से इस मौके पर एक पौधा लगाने का संकल्प लेने के लिए कहा। संगोष्ठी में अपर सॉलिसिटर जनरल शशि प्रकाश सिंह और अन्य गण्यमान्य नागरिक व अधिवक्ता मौजूद थे। संचालन पवन तिवारी ने किया। अधिवक्ता परिषद के महामंत्री अजय कुमार मिश्र ने अतिथियों का स्वागत किया। इस दौरान अतुल शाही, मनोज, अरुण गुप्ता, विक्रम शाह, विवेक शर्मा आदि मौजूद रहे।
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प्रयागराज। संविधान दिवस के अवसर पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में आयोजित संगोष्ठी में न्यायमूूर्ति सुनीत कुमार ने कहा कि भारत का संविधान मात्र एक साहित्य और दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह एक जीवंत दस्तावेज और दर्शन है। बीते 75 वर्षों में सौ से अधिक संशोधनों के साथ यह आज की पीढ़ी के भी अनुकूल है। संगोष्ठी का आयोजन अधिवक्ता परिषद हाईकोर्ट की इकाई ने किया था। संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि न्यायमूर्ति रामकृष्ण गौतम ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 51 ए हमें मौलिक कर्तव्यों की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि मात्र अधिकारों की बात करने वाला समाज अराजकता को जन्म देता है। अगर हम सभी अपने कर्तव्यों का पालन सही तरीके से कर लें तो हमारे अधिकार खुद ही सुरक्षित हो जाएंगे।
वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने मौलिक कर्तव्यों की चर्चा करते हुए कहा कि कर्तव्यों का सिद्धांत नया नहीं है। यह हमारे शास्त्रों में वर्णित है, जिसे संविधान में लाया गया। मगर सवाल यह है कि क्या हम संविधान में वर्णित अपने मौलिक कर्तव्यों का पालन कर पाए हैं। देश हमें सबकुछ देता है, मगर यह सोचने की बात है कि हम देश को क्या दे पाए हैं। उन्होंने कहा कि जितना जरूरी अपने अधिकारों के प्रति सजग होना है, उससे कहीं जरूरी अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक होना है।
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अधिवक्ता परिषद के महामंत्री शीतल ने मौजूदा समय में अधिवक्ता परिषद की उपयोगिता और प्रासंगिकता की जानकारी दी। संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे अधिवक्ता परिषद के अध्यक्ष वीपी श्रीवास्तव ने सभी अधिवक्ताओं से इस मौके पर एक पौधा लगाने का संकल्प लेने के लिए कहा। संगोष्ठी में अपर सॉलिसिटर जनरल शशि प्रकाश सिंह और अन्य गण्यमान्य नागरिक व अधिवक्ता मौजूद थे। संचालन पवन तिवारी ने किया। अधिवक्ता परिषद के महामंत्री अजय कुमार मिश्र ने अतिथियों का स्वागत किया। इस दौरान अतुल शाही, मनोज, अरुण गुप्ता, विक्रम शाह, विवेक शर्मा आदि मौजूद रहे।
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