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कांग्रेस ने नेहरू परिवार को ही बढ़ाया: रंजना
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Thu, 25 Dec 2014 01:38 AM IST
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इलाहाबाद। महामना की प्रपौत्री रंजना मालवीय भारत रत्न की घोषणा से काफी खुश हैं। रंजना महामना के पौत्र श्रीधर मालवीय की पुत्री हैं। वह अपनी मां सरस्वती मालवीय और बहन वीणा मालवीय के साथ जार्जटाउन में ही रहती हैं। भारत रत्न देने की घोषणा पर उनकी टिप्पणी थी कि मोदी सरकार ने जो वादा किया, उसे निभा दिया।
यह पूछे जाने पर कि महामना को भारत रत्न देने का निर्णय देर से लिया गया, रंजना का कहना था कि यह राजनीतिक कारणों से हुआ। कांग्रेस ने हमेशा नेहरू परिवार को ही आगे बढ़ाया। देश पर मर मिटने वालों की कोई कमी नहीं थी लेकिन जब नाम आगे बढ़ाने की बात आई तो सामने नेहरू परिवार के सदस्य ही खड़े नजर आए। देश की रंजना मालवीय परिवार के योगदान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई में कूदने के बाद परिवार के आर्थिक स्नोत कम हो गए। उनके बाबा श्रीधर मालवीय और बाबा रमाकांत मालवीय का काफी समय जेल में बीता। जेल में उनको खराब गुणवत्ता वाला खाना दिया जाता था, जिसकी वजह से समय से पहले उनकी मृत्यु हो गई।
महामना को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा होने के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों में भी खुशी की लहर दौड़ गई। हिंदू हॉस्टल के अंत:वासियों ने जश्न मनाते हुए हॉस्टल के सामने स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और देश की आजादी में उनके योगदान को याद किया। छात्रों ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में महामना के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। इलाहाबाद में हिंदू हॉस्टल की स्थापना कर उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय को बड़ा तोहफा दिया। छात्र हमेशा उनके ऋणी रहेंगे। छात्राें ने खुशी में एक-दूसरे को मिठाइयां भी खिलाईं। छात्रनेता अमरेंदु सिंह ने कहा कि हॉस्टल में बृहस्पतिवार को उनकी 151वीं जयंती धूमधाम से मनाई जाएगी। इस मौके पर प्रमोद शर्मा, विश्व प्रताप, पंकज गुप्ता, अंकुर मिश्र, प्रशांत मिश्र, प्रदीप त्रिपाठी, सर्वेश मिश्र, ज्ञान शुक्ला, राजबहादुर, सच्चितांनद मिश्र आदि मौजूद रहे।
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महामना की महानता, प्रतिभा तथा देशभक्ति पूरा देश जानता है। महात्मा गांधी तो महामना को अपना बड़ा भाई मानते थे। वह कहते थे, मैं तो मोहनदास हूं, आप तो मदनमोहन हैं, मैं तो आपका दास हूं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के मशहूर वकील महामना यूपी लेजिस्लेटिव काउंसिल के लिए चुनाव लड़े और जीते।
उन्होंने इलाहाबाद में छात्रों के लिए हिन्दू छात्रावास बनवाया। उन्हें जब भी समय मिलता था, बच्चों को अपने पास बिठा कर महापुरुषों के उपदेश तथा धार्मिक ग्रंथों की कहानियां सुनाते और उनसे भी कविताएं व श्लोक सुना करते थे। घर से बाहर निकलते समय हमेशा नारायण को याद करते थे। उनका गाउन इलाहाबाद का एक विशेष दर्जी बनाता था।
जिस मोहल्ले में महामना का जन्म हुआ था, उसे लालडिग्गी कहा जाता था, फिर उसे अहियापुर और अब उसे महामना मालवीय नगर कर दिया गया है।
महामना ने पुरुषोत्तम दास टंडन को आगे कर हिन्दी साहित्य सम्मेलन की स्थापना प्रयाग में करवाई थी। वर्ष 1918 में जनता की सेवा के लिए महामना ने अखिल भारतीय सेवा समिति की स्थापना की जिसने अनेक वर्षों तक कुंभ मेले सहित अन्य सार्वजनिक अवसरों पर जनता की भरपूर सेवा की।
महामना की सूक्तियां
0 जब तक आंख से आंख भिड़ाए खड़े रहो, शेर भी हमला नहीं करता
0 सबको रोटी, सबको काज, अपने देश में अपना राज
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यह पूछे जाने पर कि महामना को भारत रत्न देने का निर्णय देर से लिया गया, रंजना का कहना था कि यह राजनीतिक कारणों से हुआ। कांग्रेस ने हमेशा नेहरू परिवार को ही आगे बढ़ाया। देश पर मर मिटने वालों की कोई कमी नहीं थी लेकिन जब नाम आगे बढ़ाने की बात आई तो सामने नेहरू परिवार के सदस्य ही खड़े नजर आए। देश की रंजना मालवीय परिवार के योगदान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई में कूदने के बाद परिवार के आर्थिक स्नोत कम हो गए। उनके बाबा श्रीधर मालवीय और बाबा रमाकांत मालवीय का काफी समय जेल में बीता। जेल में उनको खराब गुणवत्ता वाला खाना दिया जाता था, जिसकी वजह से समय से पहले उनकी मृत्यु हो गई।
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महामना को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा होने के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों में भी खुशी की लहर दौड़ गई। हिंदू हॉस्टल के अंत:वासियों ने जश्न मनाते हुए हॉस्टल के सामने स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और देश की आजादी में उनके योगदान को याद किया। छात्रों ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में महामना के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। इलाहाबाद में हिंदू हॉस्टल की स्थापना कर उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय को बड़ा तोहफा दिया। छात्र हमेशा उनके ऋणी रहेंगे। छात्राें ने खुशी में एक-दूसरे को मिठाइयां भी खिलाईं। छात्रनेता अमरेंदु सिंह ने कहा कि हॉस्टल में बृहस्पतिवार को उनकी 151वीं जयंती धूमधाम से मनाई जाएगी। इस मौके पर प्रमोद शर्मा, विश्व प्रताप, पंकज गुप्ता, अंकुर मिश्र, प्रशांत मिश्र, प्रदीप त्रिपाठी, सर्वेश मिश्र, ज्ञान शुक्ला, राजबहादुर, सच्चितांनद मिश्र आदि मौजूद रहे।
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महामना की महानता, प्रतिभा तथा देशभक्ति पूरा देश जानता है। महात्मा गांधी तो महामना को अपना बड़ा भाई मानते थे। वह कहते थे, मैं तो मोहनदास हूं, आप तो मदनमोहन हैं, मैं तो आपका दास हूं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के मशहूर वकील महामना यूपी लेजिस्लेटिव काउंसिल के लिए चुनाव लड़े और जीते।
उन्होंने इलाहाबाद में छात्रों के लिए हिन्दू छात्रावास बनवाया। उन्हें जब भी समय मिलता था, बच्चों को अपने पास बिठा कर महापुरुषों के उपदेश तथा धार्मिक ग्रंथों की कहानियां सुनाते और उनसे भी कविताएं व श्लोक सुना करते थे। घर से बाहर निकलते समय हमेशा नारायण को याद करते थे। उनका गाउन इलाहाबाद का एक विशेष दर्जी बनाता था।
जिस मोहल्ले में महामना का जन्म हुआ था, उसे लालडिग्गी कहा जाता था, फिर उसे अहियापुर और अब उसे महामना मालवीय नगर कर दिया गया है।
महामना ने पुरुषोत्तम दास टंडन को आगे कर हिन्दी साहित्य सम्मेलन की स्थापना प्रयाग में करवाई थी। वर्ष 1918 में जनता की सेवा के लिए महामना ने अखिल भारतीय सेवा समिति की स्थापना की जिसने अनेक वर्षों तक कुंभ मेले सहित अन्य सार्वजनिक अवसरों पर जनता की भरपूर सेवा की।
महामना की सूक्तियां
0 जब तक आंख से आंख भिड़ाए खड़े रहो, शेर भी हमला नहीं करता
0 सबको रोटी, सबको काज, अपने देश में अपना राज