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विदेशों में बढ़े हमलों से अभिभावक भी चिंतित

Thu, 14 Apr 2016 01:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Thu, 14 Apr 2016 01:09 AM IST
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Concerned parents from abroad increased attacks
छात्र
आस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर लगातार हमले को लेकर पूरे देश में काफी शोर हुआ था। आतंकी संगठनों से संबंध की आशंका में भारतीय मूल के खास वर्ग के छात्रों तथा युवाओं पर भी विदेशों में हमले की घटनाएं अक्सर सुनने में आती हैं लेकिन अब बात इससे आगे निकल गई है। अच्छे कॅरियर की चाहत में विदेशों में पढ़ाई या नौकरी के लिए जा रहे आम युवा निशाने पर हैं। इन घटनाओं ने अभिभावकों तथा रिश्तेदारों को दहशत में ला दिया है। इनकेपीछे वे पहचान का संकट और विदेशाें में भारतीय युवाओं के बढ़ते प्रभाव को कारण मान रहे हैं। ऐसी घटनाओं से सहमे और चिंतित अभिभावकों ने भारत सरकार से सुरक्षा के मद्देनजर हर जरूरी कदम उठाने की मांग की है।
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कनाडा से डिग्री वेरिफिकेशन के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय आए एक व्यक्ति ने नाम बताने से मना कर दिया लेकिन वहां के हालात पर खुलकर चर्चा की। बताया,कनाडा में आईएसआईएस का काफी आतंक है। उनके समाने एक भारतीय छात्र की कई लोगों ने आईएसआईएस के नाम पर पिटाई कर दी। कनाडा, अमेरिका जैसे में भारतीयों के सामने पहचान का संकट खड़ा हो गया है। वहीं यूक्रेन में लोगाें की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। इन परिस्थितियों के बावजूद यहां से अच्छे परिवारों केयुवा वहां पढ़ाई के लिए जाते और हर सुविधा को प्राप्त करते हैं, जो वहां के युवाओं को अच्छा नहीं लगता। भारतीय छात्र हर क्षेत्र में आगे निकल रहे हैं। अमेरिका समेत ज्यादातर देशों के युवाओं को लगता है कि भारतीय छात्र उनका हक छीन रहे हैं। यह भावना इस दौरान ज्यादा प्रचारित है। यह हमले उसी का नतीजा है।

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अल्लापुर के अरुण द्विवेदी का भांजा एचआरआई से पीएचडी करने के बाद आयरलैंड में है। अरुण कहते हैं, पहले विदेशों में सिक्योरिटी थी लेकिन अब कुछ असुरक्षा सी महसूस होने लगी है। जैसे-जैसे यहां के लोगों का विदेशों में प्रभाव बढ़ा है, वहां के लोगों में हीन भावना बढ़ती जा रही है। यहां के छात्र अधिक योग्य हैं लेकिन कम सैलेरी और सुविधा में भी वहां जाने को तैयार हैं क्योंकि वह वेतन ही उन्हें ज्यादा लगता है। ऐसी स्थिति में यहां के छात्र विदेशों में आगे तो बढ़ रहे हैं लेकिन सुरक्षा का संकट खड़ा होने से उनका शोषण भी बढ़ा है। ज्यादातर विद्यार्थी तो ऐसी बातें बताते ही नहीं। वे सिर्फ वहां की खूबियां ही बयां करते हैं।

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भारतीय दूतावास को इस बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए। सेवानिवृत्त चिकित्साधिकारी डॉ.प्रदीप का एक बेटा अमेरिका और दूसरा कनाडा में है। कहते हैं, विदेशों में भारतीय युवाओं के साथ अनहोनी की घटनाएं डराती हैं। जब भी कोई दूसरे देश या स्थान पर बसने की कोशिश करता है, ऐसी घटनाएं बढ़ती हैं। भारतीय छात्र अधिक योग्य हैं। उनकी यही योग्यता विदेशी छात्रों में ईष्या का कारण बनती है, जिससे वे इनके खिलाफ आक्रामक हुए हैं। सौहार्द बनाए रखने केलिए कोशिश जरूरी है। चिकित्सा विभाग में संयुक्त निदेशक डॉ.सुधाकर पांडेय का बेटा भी पढ़ाई के लिए कनाडा में था। कहते हैं, वहां लोगसहयोगात्मक भावना रखते हैं लेकिन ऐसी घटनाएं डराती तो हैं। वहां युवाओं का एक वर्ग आक्रामक है जो भारतीय छात्रों को बेवजह परेशान करता है। कहां से आए हो, क्या करते हो जैसे सवाल करता है। विवाद बढ़ने पर हमलावर भी होता है।



विदेशों में पढ़ाई या नौकरी महज एक अंधी दौड़ है। विदेशों में जाना आधुनिकता का प्रतीक बन गया है। यह आदर्श शून्यता भी है। इससे बाहर जाने वाले छात्र संस्कृति और अपनों से दूर होते जा रहे हैं। हत्या या हमले की घटनाएं ही हमें पता चल पाती हैं। इसके अलावा भी वे बहुत तरह की परेशानियों का सामना करते हैं। खासतौर, पर विकसित देश के लोगों में श्रेष्ठता की भावना है। वे अपनी संस्कृति से मजबूती से जुडे़ हैं। इससे यहां के लोगों को झटका भी लगता है। लोग वापस भी आते हैं।
0 डॉ.इंदिरा श्रीवास्तव
वरिष्ठ समाजशास्त्री, ईश्वर शरण डिग्री कालेज

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