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कंप्यूटर ऑपरेटर भर्ती में धांधली का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Wed, 01 Feb 2017 12:47 AM IST
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पुलिस विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटर गेड ए की भर्ती में धांधली का आरोप है। इसे लेकर अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में भर्ती में धांधली के अलावा 273 रिक्त रह गए पदों को अगली भर्ती के लिए कैरी फारवर्ड करने के निर्णय को भी चुनौती दी गई है। आरोप है कि चयन प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और भर्तियों में मनमानी की गई है। याचिका पर न्यायमूर्ति बी अमित स्थालेकर सुनवाई कर रहे हैं। कोर्ट ने पुलिस विभाग और प्रदेश सरकार से छह सप्ताह में जवाब मांगा है।
अंबेश त्रिपाठी और 81 अन्य अभ्यर्थियों की याचिका पर अधिवक्ता विजय गौतम ने पक्ष रखा। उनका कहना था कि कंप्यूटर ऑपरेटर ग्रेड ए के 1865 पदों पर भर्ती के लिए 23 फरवरी 2016 को विज्ञापन जारी किया गया था। करीब 40 हजार लोगों ने आवेदन किया। 19 मई 2016 को ऑन लाइन लिखित परीक्षा आयोजित की गई। परीक्षा में 40 प्रतिशत अंक पाने वाले 14 हजार अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया। इनको कंप्यूटर टेस्ट के लिए बुलाया गया। टेस्ट में 2200 लोग सफल हुए। सभी को दस्तावेजों के सत्यापन हेतु बुलाया गया। इसके बाद 1590 चयनित लोगों की सूची जारी की गई। इसमें 273 रिक्त रह गए पदों को अगली भर्ती के लिए कैरी फारवर्ड कर दिया गया।
अधिवक्ता का कहना था कि चयन में आरक्षण नियमों का पालन नहीं किया गया। चयन करने में अधिकारियों ने विज्ञापन की शर्तें का उल्लंघन कर मनमानी की है। किस अभ्यर्थी को कितने अंक प्राप्त हुए हैं यह भी नहीं बताया गया। याचिका पर छह सप्ताह के बाद सुनवाई होगी।
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अंबेश त्रिपाठी और 81 अन्य अभ्यर्थियों की याचिका पर अधिवक्ता विजय गौतम ने पक्ष रखा। उनका कहना था कि कंप्यूटर ऑपरेटर ग्रेड ए के 1865 पदों पर भर्ती के लिए 23 फरवरी 2016 को विज्ञापन जारी किया गया था। करीब 40 हजार लोगों ने आवेदन किया। 19 मई 2016 को ऑन लाइन लिखित परीक्षा आयोजित की गई। परीक्षा में 40 प्रतिशत अंक पाने वाले 14 हजार अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया। इनको कंप्यूटर टेस्ट के लिए बुलाया गया। टेस्ट में 2200 लोग सफल हुए। सभी को दस्तावेजों के सत्यापन हेतु बुलाया गया। इसके बाद 1590 चयनित लोगों की सूची जारी की गई। इसमें 273 रिक्त रह गए पदों को अगली भर्ती के लिए कैरी फारवर्ड कर दिया गया।
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अधिवक्ता का कहना था कि चयन में आरक्षण नियमों का पालन नहीं किया गया। चयन करने में अधिकारियों ने विज्ञापन की शर्तें का उल्लंघन कर मनमानी की है। किस अभ्यर्थी को कितने अंक प्राप्त हुए हैं यह भी नहीं बताया गया। याचिका पर छह सप्ताह के बाद सुनवाई होगी।
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