फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Complete the search, many records in the commission

तलाशी पूरी, आयोग में कई अभिलेख सीज

Tue, 22 May 2018 02:08 AM IST
allahabad
allahabad Updated Tue, 22 May 2018 02:08 AM IST
विज्ञापन
Complete the search, many records in the commission
डेमो - फोटो : डेमो
सीबीआई ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) में अपना तलाशी अभियान पूरा कर लिया है। इस दौरान सीबीआई ने कई महत्वपूर्ण अभिलेख सीज किए हैं तो कई अभिलेख सीबीआई की टीम अपने साथ ले गई। तकरीबन सप्ताह भर तक चली कार्रवाई के दौरान सीबीआई ने कई चार्ट भी बनाए हैं और आयोग के अधिकतर कर्मचारियों से पूछताछ भी की। तलाशी अभियान के दौरान अहम सुबूत जुटाने के बाद सीबीआई अब बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है।
विज्ञापन


सीबीआई के 60 सदस्यों की आठ टीमों ने 15 मई से आयोग में तलाशी अभियान शुरू किया था। इस दौरान टीम ने वे सभी दस्तावेज खंगाले, जो आयोग ने सीबीआई को उपलब्ध नहीं कराए थे। तलाशी अभियान सीबीआई की ओर से आपराधिक धाराओं में दर्ज मुकदमे के तहत चलाया गया, सो इस बार टीम ने आयोग से अभिलेख मांगने की जगह सीधे उन्हें जब्त या सीज कर दिया। इस दौरान सीबीआई ने मॉडरेटर्स, परीक्षकों की सूची अपने कब्जे में ली। साथ ही परीक्षा केंद्रों की सूची भी जब्त की। इसके अलावा चार्ट फाइलिंग की। जो अभिलेख संदिग्ध लगे, उन्हें गवाहों के सामने सीज कर दिया गया। सीज अभिलेख आयोग में रखवा दिए गए हैं।
विज्ञापन


सीबीआई कई अभिलेख सीबीआई अपने साथ ले गई है। इनमें आयोग के कई विवादित फैसलों की प्रतियां भी हैं। सूत्रों का कहना है कि तलाशी अभियान के दौरान सीबीआई को अप्रैल 2013 से मार्च 2017 तक हुईं ज्यादातर परीक्षाओं में गड़बड़ी मिली है। यही वजह है कि सीबीआई को बड़ी मात्रा में अभिलेख सीज करने पड़े हैं। गोपनीय अनुभाग, अति गोपनीय विभाग और परीक्षा अनुभाग में तलाशी अभियान दौरान सीबीआई ने चार्ट फाइलिंग की और इस दौरान जो भी खामियां मिलीं, उनके बारे में संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ भी की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन



- आयोग में तलाशी अभियान के दौरान सीबीआई को विज्ञापन में भी गड़बड़ी किए जाने के सुबूत मिले हैं। कई विज्ञापनों में दिव्यांग कोटे के पद किसी दूसरे कोटे में शिफ्ट कर दिए गए। सिर्फ इतना ही नहीं, पदों को शिफ्ट किए जाने के आयोग के प्रस्ताव को तत्कालीन शासन ने भी अपनी मंजूरी दे दी। यही वजह है कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद यूपीपीएससी की ओर से शासन को पत्र भेजकर कहा गया था कि आरक्षण का निर्धारण आयोग नहीं, बल्कि पदों का अधियाचन भेजने वाले संबंधित विभाग करेंगे। वर्तमान में विभाग ही आरक्षण का निर्धारण कर रहे हैं। नियमत: पदों के आरक्षण के निर्धारण की जिम्मेदारी विभागों की है लेकिन पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव के कार्यकाल में यह अधिकार आयोग ने अपने पास रखा था। आयोग किस नियम के तहत ऐसा कर रहा था, सीबीआई अब इसकी जांच कर रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed