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रैगिंग मामले में सीएम, मंत्री, एमसीआई से शिकायत
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 31 Aug 2018 02:05 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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मेडिकल कॉलेज में नव प्रवेशी एमबीबीएस छात्रों के साथ हुई घटना में जिलाधिकारी के कड़े रुख को देखते हुए पीड़ित छात्रों और उनके अभिभावकों का हौसला बढ़ा है। मामले में कुछ अभिभावकों ने पहल करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन और एमसीआई को पत्र भेजा है, जिसमें रैगिंग के आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। एमसीआई से ईमेल भेजकर शिकायत की गई है। मारपीट के दौरान गंभीर चोट लगने से मायूस तीन छात्रों ने डीएम और प्राचार्य को शिकायती पत्र भेजा है। लोगों ने कॉलेज प्रशासन की ढिलाई पर भी सवाल उठाए हैं।
घटना से मेडिकल छात्रों में दहशत इस कदर है कि वे अभी तक मुंह तो नहीं खोल रहे हैं, लेकिन अभिभावकों के भरोसा दिलाने से बुधवार को करीब सौ छात्र ही शिकायती पत्र पोस्ट करने की हिम्मत जुटा पाए। वहीं कुछ अभिभावकों को घटना को शर्मनाक बताते हुए सूबे के मुख्यमंत्री, चिकित्सा शिक्षा मंत्री और मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया(एमसीआई) से की है। इन शिकायती पत्रों में सोमवार को छात्रों को मुर्गा बनाने, बेरहमी से मारने पीटने, कई छात्रों की पैंट फाड़कर अमानवीय हरकत करने के बाद चुप रहने की धमकी का सिलसिलेवार विवरण दिया गया है।
एक शिकायती पत्र में रैगिंग के आरोपियों की पहचान के बारे में भी कुछ सूचनाएं दी गई हैं। इन पत्रों में सोमवार की घटना में शामिल सभी आरोपियों की संख्या 7 से 8 बताई गई है। मंगलवार को आरोपियों सिफारिश करने वालों को भी कार्रवाई की जद में लाने की मांग की गई है। इन लोगों ने कुछ न बोलने की चिरौरी करते हुए किसी से कुछ कहा तो देख लेने की धमकी भी दी थी। फिलहाल सभी की आस शासन और एमसीआई के साथ कॉलेज प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है।
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डीएम के निर्देश पर एसीएम प्रथम विनय सिंह ने बृहस्पतिवार को मेडिकल कॉलेज में हुई रैगिंग के प्रकरण की करीब ढाई घंटे पड़ताल की। लेक्चर रूम, मेस का भ्रमण कर उन्होंने छात्रावास पहुंचकर घटना के बारे में जानकारी ली। लेकिन किसी भी छात्र ने इस मामले में अपना मुंह नहीं खोला। मामले की रिपोर्ट डीएम को दी गई है।जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने मेडिकल छात्रों की रैगिंग को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए थे। मंगलवार को ही मजिस्ट्रेट के साथ पुलिस ने कॉलेज परिसर और ब्वायज हॉस्टल का जायजा लिया था। बृहस्पतिवार को एसीएम प्रथम विनय सिंह कॉलेज परिसर पहुंचे। उन्होंने कार्यवाहक प्राचार्य, वार्डेन और एंटी रैगिंग सेल के सदस्यों से बातचीत कर घटना के बारे में जानकारी ली। दोपहर एक बजे भोजनावकाश के समय वह फिर छात्रावास पहुंचे। वहां मेस और कमरों में जाकर छात्रों से बातचीत की लेकिन दहशत में रहे छात्रों ने रैगिंग करने वालों के नाम नहीं बताये। एसीएम ने बाल मुंडवाने, ड्रेेस कोड और लाल बटन लगाने का आदेश देने वालों के बारे में जानकारी ली।
एसीएम ने कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. वत्सला मिश्रा और मेडिकल कॉलेज के अन्य प्रशासनिक अफसरों संग दोपहर बाद बैठक की। प्राचार्य से कहा गया कि जूनियर और सीनियर छात्र-छात्राओं के साथ अलग-अलग बैठकें करें। उन्हें रैगिंग के बारे में और उसके दंड प्रावधानों के बारे में जानकारी दें। घटना से सहमे छात्रों का डर दूर करें। उन्हें बताएं कि शिकायत पर नाम गोपनीय रखा जाएगा। किसी के कॅरियर पर शिकायत का कोई असर नहीं पड़ेगा। कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. वत्सला ने बताया कि अमर उजाला के मंगलवार के अंक में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेकर सभी को सचेत कर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। प्रथम वर्ष के छात्रों को एस्कॉर्ट करने के लिए रेजीडेंट डॉक्टरों की तैनाती की गई है। उन्होंने बताया कि छात्रों की चुप्पी बाधा बनी है, प्रयास किए जा रहे हैं कि किसी तरह आरोपियों को चिह्नित कर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
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घटना से मेडिकल छात्रों में दहशत इस कदर है कि वे अभी तक मुंह तो नहीं खोल रहे हैं, लेकिन अभिभावकों के भरोसा दिलाने से बुधवार को करीब सौ छात्र ही शिकायती पत्र पोस्ट करने की हिम्मत जुटा पाए। वहीं कुछ अभिभावकों को घटना को शर्मनाक बताते हुए सूबे के मुख्यमंत्री, चिकित्सा शिक्षा मंत्री और मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया(एमसीआई) से की है। इन शिकायती पत्रों में सोमवार को छात्रों को मुर्गा बनाने, बेरहमी से मारने पीटने, कई छात्रों की पैंट फाड़कर अमानवीय हरकत करने के बाद चुप रहने की धमकी का सिलसिलेवार विवरण दिया गया है।
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एक शिकायती पत्र में रैगिंग के आरोपियों की पहचान के बारे में भी कुछ सूचनाएं दी गई हैं। इन पत्रों में सोमवार की घटना में शामिल सभी आरोपियों की संख्या 7 से 8 बताई गई है। मंगलवार को आरोपियों सिफारिश करने वालों को भी कार्रवाई की जद में लाने की मांग की गई है। इन लोगों ने कुछ न बोलने की चिरौरी करते हुए किसी से कुछ कहा तो देख लेने की धमकी भी दी थी। फिलहाल सभी की आस शासन और एमसीआई के साथ कॉलेज प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है।
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डीएम के निर्देश पर एसीएम प्रथम विनय सिंह ने बृहस्पतिवार को मेडिकल कॉलेज में हुई रैगिंग के प्रकरण की करीब ढाई घंटे पड़ताल की। लेक्चर रूम, मेस का भ्रमण कर उन्होंने छात्रावास पहुंचकर घटना के बारे में जानकारी ली। लेकिन किसी भी छात्र ने इस मामले में अपना मुंह नहीं खोला। मामले की रिपोर्ट डीएम को दी गई है।जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने मेडिकल छात्रों की रैगिंग को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए थे। मंगलवार को ही मजिस्ट्रेट के साथ पुलिस ने कॉलेज परिसर और ब्वायज हॉस्टल का जायजा लिया था। बृहस्पतिवार को एसीएम प्रथम विनय सिंह कॉलेज परिसर पहुंचे। उन्होंने कार्यवाहक प्राचार्य, वार्डेन और एंटी रैगिंग सेल के सदस्यों से बातचीत कर घटना के बारे में जानकारी ली। दोपहर एक बजे भोजनावकाश के समय वह फिर छात्रावास पहुंचे। वहां मेस और कमरों में जाकर छात्रों से बातचीत की लेकिन दहशत में रहे छात्रों ने रैगिंग करने वालों के नाम नहीं बताये। एसीएम ने बाल मुंडवाने, ड्रेेस कोड और लाल बटन लगाने का आदेश देने वालों के बारे में जानकारी ली।
एसीएम ने कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. वत्सला मिश्रा और मेडिकल कॉलेज के अन्य प्रशासनिक अफसरों संग दोपहर बाद बैठक की। प्राचार्य से कहा गया कि जूनियर और सीनियर छात्र-छात्राओं के साथ अलग-अलग बैठकें करें। उन्हें रैगिंग के बारे में और उसके दंड प्रावधानों के बारे में जानकारी दें। घटना से सहमे छात्रों का डर दूर करें। उन्हें बताएं कि शिकायत पर नाम गोपनीय रखा जाएगा। किसी के कॅरियर पर शिकायत का कोई असर नहीं पड़ेगा। कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. वत्सला ने बताया कि अमर उजाला के मंगलवार के अंक में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेकर सभी को सचेत कर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। प्रथम वर्ष के छात्रों को एस्कॉर्ट करने के लिए रेजीडेंट डॉक्टरों की तैनाती की गई है। उन्होंने बताया कि छात्रों की चुप्पी बाधा बनी है, प्रयास किए जा रहे हैं कि किसी तरह आरोपियों को चिह्नित कर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।