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कमिश्नर के निलंबन से अफसरों में हड़कंप
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 05 Jun 2015 12:14 AM IST
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इलाहाबाद, 4 जून। अवैध खनन के मामले में सीधे कमिश्नर को निलंबित किए जाने से अफसरों में हड़कंप मचा हुआ है। मामला भले ही फतेहपुर से जुड़ा हो लेकिन मंडल के ही इलाहाबाद एवं कौशाम्बी जिले और कौशाम्बी से सटे प्रतापगढ़ जिले के कुंडा इलाके में गंगा और यमुना में खुलेआम अवैध खनन जारी है। ऐसे में मुख्यमंत्री की ओर से की गई कार्रवाई ने अन्य जिलों के उन अफसरों को भी अलर्ट कर दिया है, जो इसके लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं।
इलाहाबाद मंडल में बतौर कमिश्नर सितंबर-2014 में कार्यभार संभालने वाले बीके सिंह यहां दस माह रहे। इस दौरान प्रदेश में समाजवादी पेंशन योजना में बेहतर कार्य करने के लिए इलाहाबाद को पहला स्थान मिला और इसके लिए सरकार की तरफ से कमिश्नर प्रशस्ति पत्र भी दिया, ऐसे में कमिश्नर के खिलाफ अचानक हुई कार्रवाई से अफसरों में हड़कंप मचा हुआ है। हालांकि इस कार्रवाई ने अफसरों को यह संकेत दे दिए हैं कि शिकायत अगर ऊपर तक पहुंची तो कार्रवाई तय है। कमिश्नर भले ही खनन विभाग से सीधे तौर पर न जुड़े होें लेकिन मंडल का सबसे वरिष्ठ अधिकारी होने के नाते उन्हें मुख्यमंत्री की नाराजगी का शिकार होना पड़ा। सूत्रों के मुताबिक इस कार्रवाई के बाद इलाहाबाद, फतेहपुर और कौशाम्बी के बड़े हिस्से में चल रहे अवैध खनन को रुकवाने के लिए जिला स्तरीय अफसरों ने कवायद तेज कर दी है। इस कार्रवाई के बाद अफसरों ने लखनऊ तक यह खंगालना शुरू कर दिया है कि उनके जिले की कोई शिकायत तो मुख्यमंत्री तक नहीं पहुंची है। खनन से सीधे तौर पर जुड़े अफसरों को यह आशंका भी सता रही है कि कहीं अगली कार्रवाई उनके खिलाफ न हो।
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इलाहाबाद मंडल में बतौर कमिश्नर सितंबर-2014 में कार्यभार संभालने वाले बीके सिंह यहां दस माह रहे। इस दौरान प्रदेश में समाजवादी पेंशन योजना में बेहतर कार्य करने के लिए इलाहाबाद को पहला स्थान मिला और इसके लिए सरकार की तरफ से कमिश्नर प्रशस्ति पत्र भी दिया, ऐसे में कमिश्नर के खिलाफ अचानक हुई कार्रवाई से अफसरों में हड़कंप मचा हुआ है। हालांकि इस कार्रवाई ने अफसरों को यह संकेत दे दिए हैं कि शिकायत अगर ऊपर तक पहुंची तो कार्रवाई तय है। कमिश्नर भले ही खनन विभाग से सीधे तौर पर न जुड़े होें लेकिन मंडल का सबसे वरिष्ठ अधिकारी होने के नाते उन्हें मुख्यमंत्री की नाराजगी का शिकार होना पड़ा। सूत्रों के मुताबिक इस कार्रवाई के बाद इलाहाबाद, फतेहपुर और कौशाम्बी के बड़े हिस्से में चल रहे अवैध खनन को रुकवाने के लिए जिला स्तरीय अफसरों ने कवायद तेज कर दी है। इस कार्रवाई के बाद अफसरों ने लखनऊ तक यह खंगालना शुरू कर दिया है कि उनके जिले की कोई शिकायत तो मुख्यमंत्री तक नहीं पहुंची है। खनन से सीधे तौर पर जुड़े अफसरों को यह आशंका भी सता रही है कि कहीं अगली कार्रवाई उनके खिलाफ न हो।
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