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एडेड कॉलेजों से संबद्ध प्राइमरी स्कूलों को ग्रांट इन एड पर लेने का आदेश

Fri, 07 Jun 2019 12:50 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 07 Jun 2019 12:50 AM IST
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Commission to move High Court against STF proceedings
School
वित्तीय सहायता प्राप्त हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों से संबद्ध प्राइमरी स्कूलों को हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने इन प्राइमरी स्कूलों को ग्रांट इन एड में शामिल करने का निर्देश दिया है और राज्य सरकार को इस बारे में नीति निर्धारित करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने 27 अक्तूबर 2016 के शासनादेश के उस उपखंड को मनमानापूर्ण मानते हुए रद्द कर दिया है, जिसमें प्राइमरी स्कूलों को ग्रांट इन एड में शामिल करने की  21 जून 1973 की कट ऑफ  डेट तय की गई थी। कोर्ट ने 13 जुलाई 2017 के उस संशोधन को रद्द कर दिया है, जिसके तहत पांच साल तक ग्रांट देने पर पुनर्विचार करने पर रोक लगाई गई थी।
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हालांकि, कोर्ट ने जूनियर हाई स्कूलों से संबद्ध स्कूलों को कोई लाभ देने से इंकार करते हुए कहा कि वे 2017 के संशोधन को चुनौती दे सकते हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने जय राम सिंह व 11 अन्य सहित सैकड़ों याचिकाओं को निर्णीत करते हुए दिया है।
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सर्व शिक्षा अभियान के तहत 27 अक्तूबर 2016 के शासनादेश से प्रदेश में 300 की आबादी और एक किलोमीटर की दूरी पर नए स्कूल खोलने का निर्णय लिया गया। कहा गया कि जिन 2055 बस्तियों में स्कूल नहीं हैं, उनमें 21 जून 1973 के पहले के एडेड हाईस्कूल और इंटर कालेज से संबद्ध प्राइमरी स्कूलों को अनुदान में शामिल किया जाए। प्रदेश में एक लाख 13 हजार 247 प्राइमरी और 45590 अपर प्राइमरी स्कूल हैं, जिनमें पांच लाख 63 हजार 275 अध्यापक, शिक्षामित्र और अनुदेशक कार्यरत हैं। जिन्हें सरकार द्वारा वेतन दिया जा रहा है।
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हाईकोर्ट ने परिपूर्णानंद त्रिपाठी केस में कहा है कि निशुल्क शिक्षा देना सरकार का दायित्व है। अनिवार्य शिक्षा कानून 2009 ने यह दायित्व राज्य सरकार को सौंपा है। प्राइवेट स्कूल सरकार का ही कार्य कर रहे हैं। इसलिए सरकार नीति बनाए और मानक पूरा करने वाले स्कूलों को सरकार मदद दे। कोर्ट ने कहा कि प्राइवेट एडेड कालेजों से संबद्ध प्राइमरी स्कूलों को सरकार ग्रांट में शामिल करे। इस आदेश के क्रम में सरकार ने नीति तय की और 2055 बस्तियों के संबद्ध प्राइमरी स्कूलों की ग्रांट रोक दी। जिसको लेकर याचिकाएं दाखिल की गईं। कोर्ट ने कट ऑफ  डेट 21 जून 1973 और पांच साल तक पुनर्विचार पर रोक लगाने के संशोधन कानून को रद्द कर दिया है और नई नीति बनाने का आदेश दिया है।
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