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आयोग की सीबीआई जांच पर निर्णय सुरक्षित
इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 07 Feb 2018 11:41 PM IST
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सीबीआई
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लोक सेवा आयोग में पिछले पांच वर्षों के दौरान हुई भर्तियों की जांच सीबीआई से कराने के निर्णय की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया है। इस दौरान सीबीआई जांच जारी रहेगी तथा अध्यक्ष और सदस्यों को तलब कर पूछताछ करने पर पहले की तरह रोक रहेगी। तीन दिन तक चली बहस के दौरान लोक सेवा आयोग के अलावा राज्य और केंद्र सरकार तथा प्राइवेट पक्षकारों के वकीलों ने तर्क रखे। याचिका आयोग के अध्यक्ष अनिरुद्ध सिंह और अन्य सदस्यों की ओर दाखिल की गई है। इस पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की पीठ ने सुनवाई की।
राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने कहा कि सरकार को भर्तियों की जांच सीबीआई से कराने का अधिकार है। पंजाब और हरियाणा लोक सेवा आयोग के मामले में विजिलेंस ने जांच की थी, जिसे सुप्रीमकोर्ट ने सही माना। आयोग ने विजिलेंस को दस्तावेज देने से मना कर दिया था, पंजाब हाईकोर्ट के आदेश पर दस्तावेज दिए गए थे। अनुच्छेद 317 के तहत आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की जांच करने का अधिकार सुप्रीमकोर्ट को है। मगर कोई अपराध होता है तो सरकार को जांच कराने, प्राथमिकी दर्ज कराने और विवेचना का अधिकार है।
लोक सेवा आयोग पर कॉपियां बदलने, जाति विशेष के अभ्यर्थियों को गलत तरीके से लाभ पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप हैं, जो अपराध की श्रेणी में आते हैं। अनुच्छेद 317 में आपराधिक मामलों की जांच पर कोई रोक नहीं है। आयोग के खिलाफ 2012 से अब तक 58 शिकायतें की गई हैं। किसी भी शिकायत पर कार्रवाई नहीं की गई। आयोग ने कॉपियां बदलने की बात स्वीकार की है। पेपर लीक होने के मामले में कुछ लोगों की गिरफ्तारियां भी की गईं। मगर आयोग ने किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है।
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पूर्व राज्यपाल एफआई रिबेलो और अन्य रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों की ओर से अधिवक्ता आलोक मिश्र ने कहा कि जांच होने से आयोग की विश्वसनीयता बढ़ेगी। सहायक सॉलीसिटर जनरल ज्ञान प्रकाश और विनय कुमार सिंह का कहना था कि आयोग के खिलाफ कई राज्यों के अभ्यर्थियों की शिकायत है। इसलिए सीबीआई जांच का आदेश दिया गया है। यदि पुख्ता साक्ष्य मिलते हैं तो प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना होगी। उन्होंने कहा कि कोई भी संस्था अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकती है। आयोग की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
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राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने कहा कि सरकार को भर्तियों की जांच सीबीआई से कराने का अधिकार है। पंजाब और हरियाणा लोक सेवा आयोग के मामले में विजिलेंस ने जांच की थी, जिसे सुप्रीमकोर्ट ने सही माना। आयोग ने विजिलेंस को दस्तावेज देने से मना कर दिया था, पंजाब हाईकोर्ट के आदेश पर दस्तावेज दिए गए थे। अनुच्छेद 317 के तहत आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की जांच करने का अधिकार सुप्रीमकोर्ट को है। मगर कोई अपराध होता है तो सरकार को जांच कराने, प्राथमिकी दर्ज कराने और विवेचना का अधिकार है।
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लोक सेवा आयोग पर कॉपियां बदलने, जाति विशेष के अभ्यर्थियों को गलत तरीके से लाभ पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप हैं, जो अपराध की श्रेणी में आते हैं। अनुच्छेद 317 में आपराधिक मामलों की जांच पर कोई रोक नहीं है। आयोग के खिलाफ 2012 से अब तक 58 शिकायतें की गई हैं। किसी भी शिकायत पर कार्रवाई नहीं की गई। आयोग ने कॉपियां बदलने की बात स्वीकार की है। पेपर लीक होने के मामले में कुछ लोगों की गिरफ्तारियां भी की गईं। मगर आयोग ने किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है।
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पूर्व राज्यपाल एफआई रिबेलो और अन्य रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों की ओर से अधिवक्ता आलोक मिश्र ने कहा कि जांच होने से आयोग की विश्वसनीयता बढ़ेगी। सहायक सॉलीसिटर जनरल ज्ञान प्रकाश और विनय कुमार सिंह का कहना था कि आयोग के खिलाफ कई राज्यों के अभ्यर्थियों की शिकायत है। इसलिए सीबीआई जांच का आदेश दिया गया है। यदि पुख्ता साक्ष्य मिलते हैं तो प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना होगी। उन्होंने कहा कि कोई भी संस्था अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकती है। आयोग की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।