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Prayagraj News : भ्रष्टाचार की नींव पर बस रहीं कॉलोनियां, दांव पर किसानों की जिंदगियां

Mon, 15 Sep 2025 03:50 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 15 Sep 2025 03:50 PM IST
सार

शहर के बाहरी इलाकों में भ्रष्टाचार की नींव पर अवैध कॉलोनियां खड़ी हो रही हैं। मोटी कमाई का खेल अफसरों से लेकर प्रॉपर्टी डीलरों तक फैला है। इसका सबसे बड़ा खामियाजा उन किसानों को भुगतना पड़ रहा है जिनकी ज़मीन इन धंधेबाजों की चालबाजी में फंस गई है।

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Colonies are being built on the foundation of corruption, lives of farmers are at stake
अवैध कॉलोनी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

शहर के बाहरी इलाकों में भ्रष्टाचार की नींव पर अवैध कॉलोनियां खड़ी हो रही हैं। मोटी कमाई का खेल अफसरों से लेकर प्रॉपर्टी डीलरों तक फैला है। इसका सबसे बड़ा खामियाजा उन किसानों को भुगतना पड़ रहा है जिनकी ज़मीन इन धंधेबाजों की चालबाजी में फंस गई है। प्रॉपर्टी डीलर पहले किसानों को ज़मीन बेचने के लिए तरह-तरह का प्रलोभन देते हैं, फिर एग्रीमेंट कराकर उन्हें अपनी जालसाजी में फंसा लेते हैं। जब प्लॉटिंग का काम शुरू होता है तो पीडीए की कार्रवाई का बहाना बनाकर उन्हें धमकाया जाता है। कई बार बुलडोजर चलने और केस दर्ज होने के डर से किसान चुप्पी साध लेते हैं।

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वर्ष 1990 के बाद से प्रयागराज विकास प्राधिकरण कोई नई प्लॉटिंग योजना धरातल पर नहीं उतार सका है। लाखों लोग विवाद रहित भूखंड लेकर घर बनाने का सपना देख रहे हैं। इसका फायदा उठाकर प्रॉपर्टी डीलरों ने किसानों को अपने शिकंजे में जकड़ लिया है। उधर पीडीए के सचिव अजीत सिंह का कहना है कि लेआउट पास न होने पर पीडीए कार्रवाई करता है। दोबारा निर्माण कराने पर केस दर्ज कराता है। किसानों को सोच समझकर अपनी जमीन का एग्रीमेंट करना चाहिए।

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किसानों की मजबूरी, धंधेबाजों की मौज

भीटी, उपरहार, झलवा, सैदपुर खास, रसूलपुर मरियाडीह, बरवा भगवतपुर, कनिहार हेतापुर रोड, लीलापुर रोड, लीलापुर रोड, दैलतपुर बजहां, देवघाट, नसीरपुर सिलना, उस्तापुर महमूदाबाद, चमनगंज, कोइलहा जीटी रोड सहित 100 से अधिक ऐसे इलाके हैं जहां अवैध प्लाटिंग हो रही है। लीलापुर झूंसी के किसान रामानंद, झलवा के बद्री और नैनी के राम तपेसर गुप्ता बताते हैं कि प्रॉपर्टी डीलर मामूली रकम देकर जमीन का तीन से पांच साल का एग्रीमेंट करा लेते हैं।

बाद में जब प्लॉटिंग पर पीडीए का बुलडोजर चलता है तो किसान न तो मुकदमा कर पाते हैं और न ही अपनी जमीन वापस ले पाते हैं। एग्रीमेंट की अवधि खत्म होने के बाद उन्हें औने-पौने दाम पर जमीन प्रॉपर्टी डीलर को बेचनी पड़ती है। उधर प्रॉपर्टी डीलर जमीन पर प्लॉटिंग कर चुके होते हैं और करोड़ों का मुनाफा कमा लेते हैं। किसानों का कहना है कि यह खेल वर्षों से चल रहा है। पीडीए की ढीली व्यवस्था और भ्रष्ट गठजोड़ ने किसानों की जमीन और उनकी जिंदगियों को दांव पर लगा दिया है।

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ऐसे होता है खेल

प्रलोभन का जाल : प्रॉपर्टी डीलर किसानों को थोड़े पैसे देकर जमीन बेचने का लालच देते हैं।
एग्रीमेंट का हथकंडा : ज़मीन का तीन से पांच साल का एग्रीमेंट कराते हैं।
प्लॉटिंग की शुरुआत : किसानों की जमीन को टुकड़ों में बांटकर बेचने की तैयारी होती है।
पीडीए की कार्रवाई : अवैध प्लॉटिंग पर पीडीए बुलडोजर चलाता है और केस दर्ज होता है।
किसानों की मजबूरी : केस के डर और अत्यधिक खर्च के कारण किसान चुप हो जाते हैं।

औने-पौने दम पर बिक्री : एग्रीमेंट खत्म होते ही किसान मजबूर होकर जमीन सस्ते दाम पर डीलरों को बेच देते हैं।
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