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पीजी मेडिकल कोर्स में कमेटी से द्वारा निर्धारित फीस से अधिक फीस नहीं ले सकते कॉलेज: हाईकोर्ट

Mon, 12 Oct 2020 02:35 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 12 Oct 2020 02:35 AM IST
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Colleges cannot charge more than the fees prescribed by the committee in PG medical courses: High Court
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि मेडिकल कॉलेजों को फीस निर्धारण कमेटी से तय फीस से अधिक फीस लेने का अधिकार नहीं है।  कोर्ट ने  मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज एवं हास्पिटल द्वारा शुल्क वृद्धि का मामला शुल्क निर्धारण कमेटी के पास भेजते हुए पी जी कोर्स के छात्रों को 15 अक्तूबर 20 को 11 बजे कमेटी के समक्ष हाजिर होकर अपना पक्ष रखने का आदेश दिया है। और कमेटी को अधिक फीस वसूली मामले मे  नौ नवंबर से पहले निर्णय लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि तब तक छात्रों के खिलाफ   फीस जमा करने के लिए उत्पीड़न कार्यवाही न की जाए।
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यह आदेश न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता तथा न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की खंडपीठ ने डाक्टर साक्षी मित्तल व 26अन्य पीजी छात्रों  की याचिकाओं को निस्तारित करते हुए दिया है। याचियों का कहना था कि उन्होंने दो वर्ष की फीस के साथ अतिरिक्त फीस जमा की है।कालेज प्रबंधन तीसरे वर्ष की फीस जमा करने के लिए कार्यवाही कर रहा है। याचियो का कहना है कि कमेटी की निर्धारित फीस से अधिक जमा कराई गई फीस को तीसरे वर्ष की फीस मे समायोजित की जाए। याचियों ने हास्टल फीस पांच लाख रुपये जमा की है।जिसे बढाकर 12 लाख 88 हजार रुपये कर दिया गया है और सात लाख 88 हजार रुपये अतिरिक्त फीस जमा करने के लिए बाध्य किया जा रहा है।
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याचीगण पी जी कोर्स के छात्र हैं और कोविड की ड्यूटी के लिए तैयार है। याचियों का कहना था कि महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा ने तीन जुलाई 19 को कालेजों को छात्रों को फीस के लिए परेशान न करने का निर्देश दिया है। इसके बावजूद पांच जून 20 को उनसे फीस जमा कराने के लिए कालेज दबाव डाल रहा है। हाईकोर्ट ने 23अगस्त 18 को महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा को भी निर्णय लेने का निर्देश दिया है। जिसपर निर्णय नहीं लिया गया है। अपर महाधिवक्ता ने भी कहा कि सरकारी आदेश को रद्दी पेपर नहीं बनने दिया जाएगा।कानून के तहत तय फीस ही ली जा सकती है।
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