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ठंड का तीखा वार, कंबल-रजाई सब बेकार
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Mon, 22 Dec 2014 11:59 PM IST
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भारी रजाई, मोटा कंबल सब फेल। तीखी पछुआ के साथ गंगा के मैदान में अचानक तीखी सर्दी ने हमला सा बोल दिया है। वातावरण में व्याप्त सौ फीसदी आर्र्दता ने ठंड को और खतरनाक बना दिया है। पछुवा के चलते पारा नीचे चला गया है। मौसम विभाग के मुताबिक सोमवार को न्यूनतम तापमान 4.6 डिग्री और अधिकतम 11.6 डिग्री दर्ज किया गया, जो एक दिन पूर्व न्यूनतम नौ और अधिकतम 19 डिग्री था। सोमवार इस साल का अब तक सबसे ठंडा दिन रहा। 24 घंटे के भीतर तापमान में इतनी अधिक गिरावट ने सर्दी को खतरनाक बना दिया है। जानलेवा सर्दी ने जिले के गंगापार, यमुनापार इलाके में 10 से अधिक लोगों की जान ले ली है। चौंकाने वाली बात यह है कि ठंड से मरने वालों में बुजुर्ग ही नहीं युवा और अधेड़ भी शामिल हैं। पिछले एक सप्ताह के आंकड़ों पर नजर डालें तो 50 से अधिक लोग ठंड से अपनी जान गवां चुके हैं। डरावनी जानलेवा सर्दी के कारण पूरे दिन सड़क पर जो भी दिखा, कांपता ही लगा। भूल से भी जिसने टोपी या मफलर घर छोड़ दिया, वह सिकुड़ा-ठिठका सा दिखा। खतरनाक ठंडी पछुआ का असर यह रहा कि सड़क पर निकलने वालों पर तो शामत सी रही, जो घरों में थे वे भी रजाई, कंबल में कांपते रहे। जिसने अलाव का सहारा लिया वो घंटों अलाव के पास ही बैठा रहा। दोपहर में भी पारा 11.6 डिग्री से ऊपर नहीं जा सका और शाम होते होते पारा और लुढ़क गया।
ठंड के साथ घने कोहरे ने स्थितियों को और दुरूह बना दिया। जबरदस्त कोहरे का आलम यह रहा कि सुबह विजिविलिटी दस मीटर से अधिक नहीं रही। बेहद जरूरी काम से निकले गाड़ी चालकों को दुर्घटना से बचने के लिए दिन में भी हेडलाइट जलानी पड़ी। शहरियों को उम्मीद थी कि दिन चढ़ने के साथ ही कोहरा छंटेगा और ठंड से थोड़ी राहत मिलेगी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। कोहरे का असर पूरे दिन रहा। स्थिति यह रही पल भर के लिए भी सूरज झांकने नहीं आया।
तेज सर्दी ने राहगीरों के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है। फैशनेबल युवा सेहत का ख्याल नहीं करते। शाम लौटते वक्त ज्यादातर को बिना सिर, काम ढंके तेज बाइक चलाते देखा जा सकता है। उन पर खतरनाक ठंडी हवाओं का ऐसा हमला हुआ कि हेकड़ी निकल गई। चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक तेज ठंडी हवाओं के कारण कान के पास की मांसपेशियों में सूजन आ जाती है, जिससे एक तरफ चेहरे से लेकर आंख तक का हिस्सा फूल जाता है। कई बार गले से दिमाग पर भी अटैक का खतरा रहता है।
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मौसम विज्ञानियों के मुताबिक मौसम का बिगड़े मिजाज में खगोलकीय कारण भी हैं। मौसम विज्ञानी प्रो. एसएस ओझा के मुताबिक सोमवार को सूर्य मकर रेखा पर लंबवत हो गया। उत्तरी गोलार्ध में होने की वजह से भारत में यह सबसे छोटा दिन भी हो गया। सूर्य का आयतन कोण 43 डिग्री होने से उसकी किरणें निष्प्रभावी हो र्र्गइं। जिसने ठंड बढ़ाने में अपना योगदान दिया है। सूर्य कमजोर होने से न तो वातावरण की ऊपरी सतह में मौजूद बादल हट रहे हैं और न ही ठंडी हवाओं को गर्म बनाकर वह ऊपर भेज पा रहा है। ऐसे में निचले स्तर पर मौजूद ठंडी हवाएं कहर बरपा रही है।
मौसम विज्ञानियों के मुताबिक हिमालयी इलाकों में लगातार हो रही बर्फबारी से पश्चिमी विक्षोेभ उत्पन्न हो गया है। यहीं बर्फीली ठंडी हवाएं बहकर गंगा के मैदान में पहुंचकर खतरनाक साबित हो रही हैं। पिछले दिनों पूर्व से आई नम हवाओं के चलते वातावरण के ऊपरी हिस्से में बादल मौजूद हैं, जो ठंडी खतरनाक पछुवा को ऊपरी हिस्से में जाने से रोक रही हैं।
नगर निगम की ओर से नहीं जले अलाव
जहां एक तरफ ठंड ने हमला बोल दिया है, वहीं नगर निगम प्रशासन की ओर से अलाव के इंतजाम नहीं किए गए हैं। यह स्थिति तब है कि जबकि ठंड से प्रतिदिन लोगों की जान जा रही है। अलाव जलाने को लेकर तमाम सामाजिक, राजनीतिक संगठन भी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी से मिलकर शिकायत दर्ज करा चुके हैं।
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ठंड के साथ घने कोहरे ने स्थितियों को और दुरूह बना दिया। जबरदस्त कोहरे का आलम यह रहा कि सुबह विजिविलिटी दस मीटर से अधिक नहीं रही। बेहद जरूरी काम से निकले गाड़ी चालकों को दुर्घटना से बचने के लिए दिन में भी हेडलाइट जलानी पड़ी। शहरियों को उम्मीद थी कि दिन चढ़ने के साथ ही कोहरा छंटेगा और ठंड से थोड़ी राहत मिलेगी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। कोहरे का असर पूरे दिन रहा। स्थिति यह रही पल भर के लिए भी सूरज झांकने नहीं आया।
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तेज सर्दी ने राहगीरों के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है। फैशनेबल युवा सेहत का ख्याल नहीं करते। शाम लौटते वक्त ज्यादातर को बिना सिर, काम ढंके तेज बाइक चलाते देखा जा सकता है। उन पर खतरनाक ठंडी हवाओं का ऐसा हमला हुआ कि हेकड़ी निकल गई। चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक तेज ठंडी हवाओं के कारण कान के पास की मांसपेशियों में सूजन आ जाती है, जिससे एक तरफ चेहरे से लेकर आंख तक का हिस्सा फूल जाता है। कई बार गले से दिमाग पर भी अटैक का खतरा रहता है।
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मौसम विज्ञानियों के मुताबिक मौसम का बिगड़े मिजाज में खगोलकीय कारण भी हैं। मौसम विज्ञानी प्रो. एसएस ओझा के मुताबिक सोमवार को सूर्य मकर रेखा पर लंबवत हो गया। उत्तरी गोलार्ध में होने की वजह से भारत में यह सबसे छोटा दिन भी हो गया। सूर्य का आयतन कोण 43 डिग्री होने से उसकी किरणें निष्प्रभावी हो र्र्गइं। जिसने ठंड बढ़ाने में अपना योगदान दिया है। सूर्य कमजोर होने से न तो वातावरण की ऊपरी सतह में मौजूद बादल हट रहे हैं और न ही ठंडी हवाओं को गर्म बनाकर वह ऊपर भेज पा रहा है। ऐसे में निचले स्तर पर मौजूद ठंडी हवाएं कहर बरपा रही है।
मौसम विज्ञानियों के मुताबिक हिमालयी इलाकों में लगातार हो रही बर्फबारी से पश्चिमी विक्षोेभ उत्पन्न हो गया है। यहीं बर्फीली ठंडी हवाएं बहकर गंगा के मैदान में पहुंचकर खतरनाक साबित हो रही हैं। पिछले दिनों पूर्व से आई नम हवाओं के चलते वातावरण के ऊपरी हिस्से में बादल मौजूद हैं, जो ठंडी खतरनाक पछुवा को ऊपरी हिस्से में जाने से रोक रही हैं।
नगर निगम की ओर से नहीं जले अलाव
जहां एक तरफ ठंड ने हमला बोल दिया है, वहीं नगर निगम प्रशासन की ओर से अलाव के इंतजाम नहीं किए गए हैं। यह स्थिति तब है कि जबकि ठंड से प्रतिदिन लोगों की जान जा रही है। अलाव जलाने को लेकर तमाम सामाजिक, राजनीतिक संगठन भी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी से मिलकर शिकायत दर्ज करा चुके हैं।