{"_id":"5eee4af984e50a5e5633f7be","slug":"cocid-19-the-doctor-denied-delivery-in-the-hospital","type":"story","status":"publish","title_hn":"अस्पताल में प्रसव कराने से डॉक्टर ने किया इनकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अस्पताल में प्रसव कराने से डॉक्टर ने किया इनकार
Sat, 20 Jun 2020 11:18 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 20 Jun 2020 11:18 PM IST
विज्ञापन
इस इंजेक्शन से तीन माह तक प्रेगनेंसी रोकने का दावा किया गया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोविड काल में निजी अस्पतालों की बेरुखी से मरीज परेशान हैं। ऐसा ही एक मामला शनिवार सुबह सामने आया। कमला नेहरू स्मारक अस्पताल के जिस डॉक्टर ने नौ महीने तक महिला मरीज का इलाज किया, उसी ने प्रसव के समय किनारा कर लिया। मरीज और उसके तीमारदार डॉक्टर के सामने गुहार लगाते रहे, लेकिन डॉक्टर ने एक न सुनी और कोविड जांच के बाद ही भर्ती करने को कहा।
विज्ञापन
परेशान तीमारदार महिला को लेकर एसआरएन गए, जहां सामान्य प्रसव हुआ। हालांकि, वहां नवजात को टीका नहीं लग सका। देर रात जच्चा-बच्चा घर चले गए। चौक के सब्जी मंडी इलाके की रहने वाली आरती त्रिपाठी पत्नी अरुणेश त्रिपाठी कमला नेहरू अस्पताल में प्रेगनेंसी की शुरुआत से एक सीनियर डॉक्टर को दिखा रही थी।
विज्ञापन
शुक्रवार रात उन्हें तकलीफ हुई तो वह अस्पताल में प्रसव के लिए चली गईं। वहां मौजूद जूनियर डॉक्टरों ने देखा और उसके बाद कहां शायद सिजेरियन करना पड़ेगा। कोई सीनियर डॉक्टर भी नहीं है। कोविड की जांच हुए बिना भर्ती नहीं कर सकते हैं। युवती के परिजनों ने सीनियर डॉक्टर से फोन पर बात की, लेकिन उन्होंने भी प्रसव कराने से मना कर दिया।
विज्ञापन
इसी दौरान युवती की सेहत बिगड़ने लगी। परेशान परिजन मरीज को लेकर एसआरएन पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने युवती को भर्ती कर सामान्य प्रसव कराया। देर रात जच्चा और बच्चा दोनों घर चले गए। प्रसव के बाद गॉयनी विभाग के चिकित्सकों ने शिशु को टीका लगाने के लिए भेजा, लेकिन मौजूद स्वास्थ्य कर्मी ने टीका नहीं लगाया।
उन्हें सोमवार को बुलाया गया है। वहीं जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. तीरथ लाल ने कहा कि बच्चे को टीका जल्दी ही लगना चाहिए। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने कहा कि मामले में जांच कर कार्रवाई होगी। उधर, युवती के तीमारदारों ने कहा कि कमला नेहरू अस्पताल के चिकित्सकों ने मानवीयता भी नहीं दिखाई और कोविड के नाम पर उसे भर्ती नहीं किया। अगर आगे भी ऐसा होता रहेगा तो मरीज कहां जाएगा।
सांप के काटे हुए को भी भर्ती नहीं किया
अस्पतालों की अमानवीयता का दूसरा उदाहरण भी देखने को मिला। सर्प दंश का शिकार युवक चार नर्सिंगहोमों की चौखट पर पहुंचा, लेकिन उसे भर्ती नहीं किया गया। चार घंटे तक भटकने के बाद उसे एसआरएन में भर्ती कर लिया गया। युवक जारी का रहने वाला है और फाइनेंस कंपनी में काम करता है। शुक्रवार की रात वह सर्प दंश का शिकार हो गया।
युवक शहर आया और यहां बैरहना स्थित शारदा हॉस्पिटल, बाईकाबाग स्थित जीवन ज्योति हॉस्पिटल, सिविल लाइंस स्थित शकुंतला हॉस्पिटल, बालसन स्थित पार्वती हॉस्पिटल गया, लेकिन उसे किसी ने भर्ती नहीं किया। बाद में युवक एसआरएन पहुंचा, तब उसको भर्ती शुरू कर उपचार शुरू किया गया। देर से उपचार शुरू होने से उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। उसे वेंटिलेटर पर रख दिया गया है।