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सीएमपी डिग्री कालेज पर एक रुपये का हर्जाना
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 30 Nov 2016 02:11 AM IST
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अदालत
- फोटो : file
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हाईकोर्ट ने बीकॉम छात्रा का मूल अंक कॉलेज में ही जमा होने के बावजूद उसे एमकॉम में एडमिशन देने से इंकार किए जाने को गंभीरता से लिया है। कॉलेज पर एक रुपये का सांकेतिक हर्जाना लगाते हुए छात्रा को दाखिला देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि कॉलेज की इस रवैये से छात्रा को नैतिक नुकसान पहुंचा है। छात्रा अर्पणा श्रीवास्तव की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने यह आदेश दिया।
कोर्ट ने कहा कि अर्हता होने के बावजूद छात्रा को प्रवेश देने से इंकार करने का कोई औचित्य नहीं है। कॉलेज प्रशासन का यह रवैया उचित नहीं है। कोर्ट ने कहा है कि छात्रा को तत्काल एमकॉम में दाखिला दिया जाए। यदि सभी सीटें भर चुकी है तब भी अंतिम छात्र का दाखिला निरस्त कर प्रवेश दिया जाए। याचिका पर अधिवक्ता वीके श्रीवास्तव ने पक्ष रखा।
याची छात्रा ने सत्र 2015-16 में सीएमपी डिग्री कालेज से बीकॉम की परीक्षा उत्तीर्ण की। उसने एमकॉम में प्रवेश के लिए परीक्षा दी। इससे पूर्व बीकॉम में अंक बढ़ाने के लिए दो विषयों की परीक्षा दी थी जिसके लिए उनको मूल अंक पत्र कालेज में जमा करने पड़े। एमकॉम प्रवेश परीक्षा में कट ऑफ मेरिट से अधिक अंक मिलने के बावजूद काउंसलिंग के समय प्रवेश देने से यह कहकर इंकार कर दिया कि छात्र बीकॉम का मूल अंक पत्र प्रस्तुत नहीं कर सकी। कालेज प्रशासन ने ऐसे छात्रों को प्रोविजनल प्रवेश देने का विश्वविद्यालय का नियम भी नहीं माना।
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कोर्ट ने कहा कि अर्हता होने के बावजूद छात्रा को प्रवेश देने से इंकार करने का कोई औचित्य नहीं है। कॉलेज प्रशासन का यह रवैया उचित नहीं है। कोर्ट ने कहा है कि छात्रा को तत्काल एमकॉम में दाखिला दिया जाए। यदि सभी सीटें भर चुकी है तब भी अंतिम छात्र का दाखिला निरस्त कर प्रवेश दिया जाए। याचिका पर अधिवक्ता वीके श्रीवास्तव ने पक्ष रखा।
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याची छात्रा ने सत्र 2015-16 में सीएमपी डिग्री कालेज से बीकॉम की परीक्षा उत्तीर्ण की। उसने एमकॉम में प्रवेश के लिए परीक्षा दी। इससे पूर्व बीकॉम में अंक बढ़ाने के लिए दो विषयों की परीक्षा दी थी जिसके लिए उनको मूल अंक पत्र कालेज में जमा करने पड़े। एमकॉम प्रवेश परीक्षा में कट ऑफ मेरिट से अधिक अंक मिलने के बावजूद काउंसलिंग के समय प्रवेश देने से यह कहकर इंकार कर दिया कि छात्र बीकॉम का मूल अंक पत्र प्रस्तुत नहीं कर सकी। कालेज प्रशासन ने ऐसे छात्रों को प्रोविजनल प्रवेश देने का विश्वविद्यालय का नियम भी नहीं माना।
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