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गलत आपरेशन करने पर सीएमओ ने जंघई में अस्पताल को किया सील
Wed, 21 Oct 2020 11:55 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 21 Oct 2020 11:55 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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जंघई में पेट दर्द से परेशान महिला का गलत आपरेशन करने वाले डॉक्टर का अस्पताल मंगलवार को सीएमओ ने सील करा दिया। इस संबंध में दी गई नोटिस का जवाब न देने पर चिकित्साधिकारियों ने पुलिस संग कार्रवाई को अंजाम दिया। सीएमओ मेजर डॉ. जीएस बाजपेयी के मुताबिक इस संबंध में भदोही निवासी पुष्पा देवी ने 25 सितंबर को साक्ष्यों के साथ शिकायती पत्र दिया था। जांच कराने पर मामला सही पाया गया। पुष्पा का आरोप है कि वह पेट दर्द का इलाज कराने चौका जंघई स्थित जीवनदीप चेरिटेबल मेडिकेयर अस्पताल गई थी। वहां डॉ. एचएस यादव ने परीक्षण के बाद बताया कि पथरी है, तुरंत ऑपरेशन करना पडे़गा।
छह अगस्त को उसे भर्ती कर सात अगस्त को ऑपरेशन किया गया। इस दौरान आयुष्मान कार्ड से गलत भुगतान कराने का प्रयास किया गया। 13 अगस्त को उसकी हालत गंभीर हो गई। इलाज करने के बजाय उसे भदोही एक अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। वहां भी राहत नहीं मिली तो उन्हें बीएचयू रेफर किया गया। पुष्पा के मुताबिक लापरवाही से किए गए ऑपरेशन के कारण उनके करीब साढ़े चार लाख रुपये खर्च हो गए। मानसिक प्रताड़ना का शिकार भी होना पड़ा।
शिकायत का संज्ञान लेते हुए सीएमओ की ओर गठित टीम ने 17 सितंबर को जीवनदीप चेरिटेबल मेडिकेयर अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। वहां पांच मरीज भर्ती थे। इनमें एक महिला ऐसी थी, जिसने ऑपरेशन के बाद बच्चे का जन्म दिया था। अस्पताल में आकस्मिक स्थिति के लिए कोई इंतजाम नहीं थे। वहां एक्सरे मशीन लगी थी। मेडिकल स्टोर और पैथालॉजी भी संचालित की जा रही थी, लेकिन सीएमओ के यहां पंजीकरण नहीं था।
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मौके पर कोई डॉक्टर भी नहीं था। वहां मौजूद मंजू यादव ने खुद को गृहणी बताया। वह संचालक के बारे में जानकारी और पंजीकरण प्रपत्र नहीं दिखा सकीं। यह स्थिति मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ की थी। सीएमओ की टीम ने दो गवाहों की मौजूदगी में अस्पताल संचालक को नोटिस देकर तीन दिन में जवाब मांगा था। जवाब न मिलने पर मंगलवार 20 अक्तूबर को टीम ने सीएचसी अधीक्षक, पुलिस बल की मौजूदगी में अनधिकृत पैथालॉजी के संचालन और कुशल चिकित्सकों के बगैर चिकित्सकीय कार्य करने के आरोप में जीवनदीप चेरिटेबल मेडिकेयर अस्पताल सील कर दिया गया।
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छह अगस्त को उसे भर्ती कर सात अगस्त को ऑपरेशन किया गया। इस दौरान आयुष्मान कार्ड से गलत भुगतान कराने का प्रयास किया गया। 13 अगस्त को उसकी हालत गंभीर हो गई। इलाज करने के बजाय उसे भदोही एक अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। वहां भी राहत नहीं मिली तो उन्हें बीएचयू रेफर किया गया। पुष्पा के मुताबिक लापरवाही से किए गए ऑपरेशन के कारण उनके करीब साढ़े चार लाख रुपये खर्च हो गए। मानसिक प्रताड़ना का शिकार भी होना पड़ा।
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शिकायत का संज्ञान लेते हुए सीएमओ की ओर गठित टीम ने 17 सितंबर को जीवनदीप चेरिटेबल मेडिकेयर अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। वहां पांच मरीज भर्ती थे। इनमें एक महिला ऐसी थी, जिसने ऑपरेशन के बाद बच्चे का जन्म दिया था। अस्पताल में आकस्मिक स्थिति के लिए कोई इंतजाम नहीं थे। वहां एक्सरे मशीन लगी थी। मेडिकल स्टोर और पैथालॉजी भी संचालित की जा रही थी, लेकिन सीएमओ के यहां पंजीकरण नहीं था।
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मौके पर कोई डॉक्टर भी नहीं था। वहां मौजूद मंजू यादव ने खुद को गृहणी बताया। वह संचालक के बारे में जानकारी और पंजीकरण प्रपत्र नहीं दिखा सकीं। यह स्थिति मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ की थी। सीएमओ की टीम ने दो गवाहों की मौजूदगी में अस्पताल संचालक को नोटिस देकर तीन दिन में जवाब मांगा था। जवाब न मिलने पर मंगलवार 20 अक्तूबर को टीम ने सीएचसी अधीक्षक, पुलिस बल की मौजूदगी में अनधिकृत पैथालॉजी के संचालन और कुशल चिकित्सकों के बगैर चिकित्सकीय कार्य करने के आरोप में जीवनदीप चेरिटेबल मेडिकेयर अस्पताल सील कर दिया गया।