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संक्रांति से पहले मिले स्वच्छ, पर्याप्त गंगाजल
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 07 Jan 2018 01:25 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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गंगा महासभा ने चेतावनी दी है कि मकर संक्रांति स्नानपर्व से पहले सरकार संतों, कल्पवासियों, स्नानार्थियों के लिए गुणवत्तायुक्त पर्याप्त गंगाजल सुनिश्चित कराए। इसके लिए जरूरी हो तो बॉयोमानीटरिंग तकनीक के विशेषज्ञों की मदद भी ले। यदि ऐसा नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा। शनिवार को अलोपीबाग स्थित शंकराचार्य आश्रम में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि गंगा महासभा, अविरल-निर्मल गंगा के मुद्दे पर सुप्रीमकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका में पक्षकार बनेगी।
सदस्यों ने बीते तकरीबन साढे़ तीन वर्षों में केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से निर्मल गंगा के बारे में कोई पहल न किए जाने पर असंतोष व्यक्त किया। महासभा ने उत्तराखंड र्हाईकोर्ट की ओर सेगंगा को जीवंत नदी का दर्जा देने का स्वागत किया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट में गंगा से जुड़े मामले में उत्तराखंड सरकार की ओर से यह कहकर स्टे लेते हुए जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ने की निंदा भी की कि यह पांच राज्यों का विषय है।
कहा, सिर्फ छह महीने में प्रदेश सरकार ने गंगा में खनन से पांच हजार करोड़ का राजस्व वसूला। ऐसे में सरकार बताए कि इसमें से कितना अंश गंगा की सुरक्षा, संरक्षा और इसकी गुणवत्ता बनाए रखने में खर्च किया जाएगा। गंगा के बारे में सरकारों की उदासीनता को देखते हुए संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करते हुए आंदोलन का फैसला किया गया है। स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती की अध्यक्षता में हुई बैठक का संचालन राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने किया। कार्यक्रम में न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय, राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) गोविंद शर्मा, राष्ट्रीय मंत्री धीरज सक्सेना, मयंक कुमार, राजेश राय, डॉ.प्रिया शर्मा, संदीप झा, पूर्व विधायक प्रेमस्वरूप पाठक आदि मौजूद थे।
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गंगा महासभा केंद्र सरकार से यह मांग करती है कि न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय की अध्यक्षता में तैयार हुए ‘नेशनल रीवर गंगाजी संरक्षण अधिनियम’ को अविलंब संसद के पटल पर लाए।
खास यह कि इसे पूरी तरह से इलाहाबाद में ही तैयार किया गया। न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय गंगा महासभा की ओर से तैयार ‘नेशनल रीवर गंगाजी संरक्षण अधिनियम’ और केंद्र सरकार की ड्राफ्टिंग कमेटी दोनों के चेयरमैन हैं।
इसी तह गंगा से जुड़े न्याय मित्र अरुण गुप्ता गंगा महासभा की ड्राफ्टिंग कमेटी और केंद्र सरकार की ओर से इसके लिए बनाई गई समीक्षा समिति के भी सदस्य हैं। ऐसे में समूचे गंगा आंदोलन का प्रमुख केंद्र इलाहाबाद है।
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि माघ मेले में संतों को गंदे काले जल में स्नान कराया जा रहा है। फिलहाल यहां 325 एमएलडी पानी डिस्चार्ज हो रहा है जबकि सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की कुल क्षमता सिर्फ 267 एमएलडी जल के शोधन की है। इसके बावजूद शोधित जल की गुणवत्ता भी संदिग्ध है।
0 आचार्य जितेंद्रानंद सरस्वती
राष्ट्रीय महामंत्री, गंगा महासभा
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सदस्यों ने बीते तकरीबन साढे़ तीन वर्षों में केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से निर्मल गंगा के बारे में कोई पहल न किए जाने पर असंतोष व्यक्त किया। महासभा ने उत्तराखंड र्हाईकोर्ट की ओर सेगंगा को जीवंत नदी का दर्जा देने का स्वागत किया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट में गंगा से जुड़े मामले में उत्तराखंड सरकार की ओर से यह कहकर स्टे लेते हुए जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ने की निंदा भी की कि यह पांच राज्यों का विषय है।
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कहा, सिर्फ छह महीने में प्रदेश सरकार ने गंगा में खनन से पांच हजार करोड़ का राजस्व वसूला। ऐसे में सरकार बताए कि इसमें से कितना अंश गंगा की सुरक्षा, संरक्षा और इसकी गुणवत्ता बनाए रखने में खर्च किया जाएगा। गंगा के बारे में सरकारों की उदासीनता को देखते हुए संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करते हुए आंदोलन का फैसला किया गया है। स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती की अध्यक्षता में हुई बैठक का संचालन राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने किया। कार्यक्रम में न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय, राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) गोविंद शर्मा, राष्ट्रीय मंत्री धीरज सक्सेना, मयंक कुमार, राजेश राय, डॉ.प्रिया शर्मा, संदीप झा, पूर्व विधायक प्रेमस्वरूप पाठक आदि मौजूद थे।
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गंगा महासभा केंद्र सरकार से यह मांग करती है कि न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय की अध्यक्षता में तैयार हुए ‘नेशनल रीवर गंगाजी संरक्षण अधिनियम’ को अविलंब संसद के पटल पर लाए।
खास यह कि इसे पूरी तरह से इलाहाबाद में ही तैयार किया गया। न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय गंगा महासभा की ओर से तैयार ‘नेशनल रीवर गंगाजी संरक्षण अधिनियम’ और केंद्र सरकार की ड्राफ्टिंग कमेटी दोनों के चेयरमैन हैं।
इसी तह गंगा से जुड़े न्याय मित्र अरुण गुप्ता गंगा महासभा की ड्राफ्टिंग कमेटी और केंद्र सरकार की ओर से इसके लिए बनाई गई समीक्षा समिति के भी सदस्य हैं। ऐसे में समूचे गंगा आंदोलन का प्रमुख केंद्र इलाहाबाद है।
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि माघ मेले में संतों को गंदे काले जल में स्नान कराया जा रहा है। फिलहाल यहां 325 एमएलडी पानी डिस्चार्ज हो रहा है जबकि सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की कुल क्षमता सिर्फ 267 एमएलडी जल के शोधन की है। इसके बावजूद शोधित जल की गुणवत्ता भी संदिग्ध है।
0 आचार्य जितेंद्रानंद सरस्वती
राष्ट्रीय महामंत्री, गंगा महासभा