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High Court : सीजेएम जवाब दें... मर्जी के खिलाफ युवती को कैसे भेजा नारी निकेतन, रिहा करने का आदेश

Wed, 18 Sep 2024 01:57 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 18 Sep 2024 01:57 PM IST
सार

मामला सिद्धार्थनगर के मोहना थाना क्षेत्र का है। याची आरती ने परिजनों की मर्जी के खिलाफ गांव के ही हेसामुद्दीन के साथ शादी की। इसके बाद विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह के पंजीकरण का आवेदन किया। नोटिस मिलने पर खफा पिता ने विवाह पंजीकरण के आवेदन के खिलाफ आपत्ति दाखिल की।

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CJM should answer... How the girl was sent to Nari Niketan against her will, order to release her
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोरखपुर के नारी निकेतन में कैद दूसरे धर्म में विवाह करने वाली युवती को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है। साथ ही सिद्धार्थनगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) से स्पष्टीकरण तलब कर पूछा है कि विधि विरुद्ध तरीके से युवती की मर्जी के खिलाफ उसे नारी निकेतन कैसे भेजा गया। यह आदेश न्यायमूर्ति अरविंद सिंह सांगवान और न्यायमूर्ति मो. अजहर हुसैन इदरीशी की खंडपीठ ने याची आरती की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

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मामला सिद्धार्थनगर के मोहना थाना क्षेत्र का है। याची आरती ने परिजनों की मर्जी के खिलाफ गांव के ही हेसामुद्दीन के साथ शादी की। इसके बाद विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह के पंजीकरण का आवेदन किया। नोटिस मिलने पर खफा पिता ने विवाह पंजीकरण के आवेदन के खिलाफ आपत्ति दाखिल की। साथ ही हेसामुद्दीन व उसके परिजनों के खिलाफ मारपीट और धमकी देने के आरोप मेंं एफआईआर भी दर्ज कराई।

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इसके बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सिद्धार्थनगर ने अग्रिम आदेश तक याची को अगस्त 2024 में नारी निकेतन गोरखपुर भेज दिया। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि याची बालिग है। उसे अपनी मर्जी से शादी करने का हक है। सीजेएम ने बिना कलमबंद बयान दर्ज किए अग्रिम आदेश तक याची को नारी निकेतन भेज दिया। इसके बाद अब तक नया आदेश पारित नहीं किया। याची नारी निकेतन से आजादी चाहती है। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी।

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