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माया प्रेस के ‘अखाड़े’ में नगर आयुक्त चित

Fri, 16 Nov 2018 01:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज Updated Fri, 16 Nov 2018 01:06 AM IST
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City Commissioner Chit in the 'Akhara' of Maya Press
प्रयागराज - फोटो : प्रयागराज
शासन ने नगर आयुक्त अविनाश सिंह का बृहस्पतिवार को तबादला कर दिया। माना जा रहा है कि माया प्रेस बिल्डिंग मामले में हाईकोर्ट के सख्त रुख को देखते हुए यह कार्रवाई की गई है। उन्हें विशेष सचिव गृह बनाया गया है। वहीं प्रदेश के सूचना निदेशक रहे आईएएस अफसर डॉ. उज्ज्वल कुमार को नगर आयुक्त बनाकर यहां भेजा गया है। कुंभ से पहले इन तबादलों के बारे में दिन भर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं।
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कानपुर से 19 मई को यहां आकर नगर आयुक्त का पद संभालने वाले पीसीएस अफसर अविनाश सिंह तैनाती के छह महीने पूरे होने के चार दिन पहले ही स्थानांतरित कर दिए गए। तबादले की जानकारी उन्हें तब हुई, जब वह प्रमुख सचिव मनोज कुमार सिंह के निरीक्षण के दौरान उनके साथ थे। शाम को वापस लौटे तो कार्यालय नहीं सीधे घर गए। तबादले पर कुछ नहीं बोले, सिर्फ इतना कहाकि प्रयागराज में काम करना सुखद रहा। टीम वर्क से बहुत सुधार आया है।
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कुंभ कार्यों की व्यस्तता में मुट्ठीगंज इलाके में माया प्रेस बिल्डिंग का जुज भाग का ध्वस्तीकरण नगर आयुक्त ही नहीं शासन और स्थानीय स्तर पर तैनात कुछ बड़े अफसरों के लिए फांस बन गया। चर्चा रही कि खुद को बचाने के लिए बड़े अफसरों ने शासन तक नकारात्मक रिपोर्ट पहुंचाई। वहीं कुंभ के साथ बतौर स्मार्ट सिटी कंपनी के सीईओ नगर आयुक्त ने कई मामलों में नगर निगम का पक्ष बेबाकी से रखा। उनकी यह कार्यशैली भी बड़ों को कई बार अखरी। अप्रत्यक्ष रूप से आरोप प्रत्यारोप का दौर भी चला। इन सबका परिणाम रहा नगर आयुक्त का तबादला। पार्षदों ने इसे सियासी चश्मे से भी देखने की कोशिश की, लेकिन अफसरों की गोलबंदी भारी पड़ने की चर्चा रही।
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व्यक्तिगत हितों को पूरा करने वाले काम से साफ मना करने वाले नगर आयुक्त अविनाश सिंह की कार्यशैली से नगर निगम का काकस परेशान रहा। पिछले कार्यकाल के दौरान हुए कार्यों का भुगतान न करने से कई लोगों के निशाने पर रहे। चर्चा रही कि सफाई काम में लगी कंपनी हरीभरी को नोटिस देना भी कुछ बड़ों को रास नहीं आया। पहली नोटिस का जवाब संतोषजनक न बताकर दूसरी नोटिस जारी करने की तैयारी थी। कूड़ा अड्डों का काम कंपनी से वापस लेना, बसवार प्लांट की निगरानी बढ़ाने जैसी कई कार्रवाई संबंधित लोगों को नहीं भाई। जानकार बताते हैं कि हरीभरी पर कार्रवाई शुरू करने वाले अफसर यहां टिकते नहीं है। नगर निगम में जुटे पार्षद दो बार का उदाहरण देकर इसकी चर्चा करते रहे।
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