सिनेमाटोग्राफर अनूप सिंह बोले : इलाहाबाद की कहानियां, संगम के दृश्य हिंदी सिनेमा के लिए वरदान
जगराम चौराहा स्थित अपने घर पहुंचे अनूप सिंह ने शुक्रवार को अमर उजाला से बातचीत में सिनेमाटोग्राफी की बारीकियों से लेकर प्रयागराज में फिल्म शूटिंग की लोकेशन की संभावनाओं पर अपनी भावनाओं को साझा किया।
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यह कहना है बॉलीवुड में तेजी से कदम जमाने वाले सिनेमाटोग्राफर अनूप सिंह का। जगराम चौराहा स्थित अपने घर पहुंचे अनूप ने शुक्रवार को अमर उजाला से बातचीत में सिनेमाटोग्राफी की बारीकियों से लेकर प्रयागराज में फिल्म शूटिंग की लोकेशन की संभावनाओं पर अपनी भावनाओं को साझा किया। 2006 में एफटीआरआई से सिनेमाटोग्राफी का कोर्स करने केबाद अनूप ने पहली बार शहर में चक दे इंडिया का चार रास्ता शूट किया। इसके बाद अमित राय की 2008 में रोड टू संगम को शूट किया।
2013 में उन्होंने बॉलीवुड का रुख किया और अविक मुखोपाध्याय के साथ ए कैमरा आपरेट करने लगे। इस दौरान उन्होंने अविक के सहयोगी के तौर पर अमिताभ बच्चन की फिल्म पिंक, बदला, गुलाबो-सिताबो में काम किया। इसके बाद बिकी कौशल की सरदार ऊधम सिंह में भी ए कैमरा आपरेटर के रूप में जिम्मेदारी मिली। 2019 मेें अनूप ने अपनी पहली बांग्ला फिल्म मानिक बाबूर मेघ को सिनेमाटोग्राफर के तौर पर शूट किया।
इस फिल्म में उनकी फ्रेमिंग की खूब तारीफ हुई। नतीजतन कोलकाता इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में इस फिल्म को नेटपैक एशियन एवार्ड जीता है। इतना ही नहीं 22 से 25 सितंबर तक शिकागो में होने वाले 13वें वार्षिक साउथ एशियन फिल्म फेस्टिवल के लिए भी इस फिल्म का चयन किया गया है। अनूप की अब तक कुल छह कहानियों को शूट कर चुके हैं।
इनमें वेब सीरीज महारानी सीजन-1, सीजन-2, डाक्यूमेंट्री के तौर पर शूट द लेपर्ड, आस्क द सेक्सपर्ट के अलावा फिल्मों में मानिक बाबूर मेघ और हैज होम कमिंग शामिल हैं। वह कहते हैं कि फिल्मों में इलाहाबाद की कहानियों को अभी तक जगह नहीं मिल सकी हैं। फिल्म शूटिंग के लिए इलाहाबाद में अपार संभावनाएं हैं। यहां के दृश्य, रंग, किले के अलावा कटरा, चौक में बिखरी कहानियां हिंदी सिनेमा के लिए वरदान साबित हो सकती हैं। जरूरत है उनको जगह दिलाने की।