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स्वामी चिन्मयानंद प्रकरणः पीड़ित को हाईकोर्ट से झटका, एसआईटी जांच पर उठाई गई आपत्तियों को कोर्ट ने किया खारिज

Thu, 30 Apr 2020 09:10 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: Vikas Kumar Updated Thu, 30 Apr 2020 09:10 PM IST
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chinmayanand case allahabad high court rejects application of victim
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चिन्मयानंद प्रकरण में पीड़ित छात्रा द्वारा एसआईटी जांच पर उठाई गई आपत्तियों को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने माना कि एजेंसी द्वारा की गई जांच की दिशा सही है। कोर्ट ने पीड़िता द्वारा थाना लोधी रोड, नई दिल्ली में की गई शिकायत की अलग से जांच करने की मांग को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि एसआईटी ने पीड़िता के बयान व शिकायत सहित सभी पहलुओं पर विचार करते हुए अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर दी है। जिस पर कोर्ट नियमानुसार कार्यवाही करेंगी। 

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कोर्ट ने पीड़िता अश्लील वीडियो और तस्वीर की अलग से जांच कराने की मांग को भी निराधार माना। साथ ही एसआईटी द्वारा पीड़िता के परिवार के उत्पीड़न के आरोपों को भी तथ्यात्मक नहीं माना है। यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा तथा न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर लापता छात्रा केस की मॉनीटरिंग के लिए गठित जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। हाईकोर्ट के ही आदेश के तहत इस मामले की सुनवाई अब लखनऊ की अदालत में की जा रही है। 
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यह कहा गया अर्जी में  
पीड़िता की तरफ से हाईकोर्ट में अर्जी दी गई। जिसमें मांग की गई कि 5 सितंबर 2019 को लोधी रोड में दर्ज शिकायत की अलग से एफआईआर दर्ज विवेचना की जाए और पक्षपात न कर निष्पक्ष विवेचना की जाए। एक अर्जी में पीड़िता ने एसआईटी पर अपने परिवार के उत्पीड़न का आरोप लगाया और एसआईटी टीम के लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। 
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कोर्ट ने कहा कि चिन्मयानंद पर दुराचार के आरोप में एफआईआर पहले से दर्ज है। दिल्ली में की गई शिकायत पहले से कायम की गई प्राथमिकी का विस्तृत स्वरूप है। अलग से एफआईआर दर्ज करने की जरूरत नहीं है। पीड़िता के धारा164 के बयान, उसकी लिखित शिकायत को एसआईटी ने जांच के दायरे में लेकर विवेचना की है। एसआईटी जांच में कोई अवैधानिकता नहीं है। यह भी कहा गया कि आरोप पत्र धारा 376 (सी ) में दाखिल किया है जबकि 376 के आरोप में पुलिस को रिपोर्ट पेश करनी चाहिए थी। 

इस पर कोर्ट ने कहा कि पुलिस विवेचना के दौरान अपनी राय कायम करने के लिए स्वतंत्र है। पुलिस रिपोर्ट पेश होने के पश्चात साक्ष्यों व तथ्यों के आधार पर कोर्ट को भी अपनी राय बनाने का स्वतंत्र अधिकार है। कोर्ट साक्ष्यों के आधार पर पुलिस द्वारा लगाई गई धाराओं में परिवर्तन कर सकती है। पुलिस ने किस धारा में रिपोर्ट पेश की है, इससे मुकदमे की सुनवाई पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

पीड़िता की तरफ से यह भी कहा गया कि स्वामी चिन्मयानंद ने उसकी वीडियो क्लिपिंग ली थी। उस मोबाइल फोन को एसआईटी ने जांच में बरामद नहीं किया है। इस पर कोर्ट ने कहा कि पीड़िता फोन नंबर बताने में असमर्थ है। ऐसे में फोन की बरामदगी करने का औचित्य नहीं है। जहां तक पुलिस अभिरक्षा में पीड़िता के परिवार का उत्पीड़न करने का प्रश्न है, इस पर कोर्ट द्वारा कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। कोर्ट ने कहा कि प्रेस कांफ्रेंस करने से जांच प्रभावित होने के आरोप में बल नहीं है। कोर्ट ने पीड़िता की तरफ से दाखिल अर्जियों पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। 
 

यह है मामला 

स्वामी सुखदेवानंद लॉ कॉलेज ,शाहजहांपुर की एलएलएम छात्रा 24 अगस्त 2019 से लापता हो गई। इस खबर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने लड़की की तलाश करने का सख्त निर्देश दिया। 2 सितंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वह विशेष जांच टीम गठित कर लापता लड़की को कोर्ट में पेश करें। 

एसआईटी ने राजस्थान से लड़की को अपने दोस्तों के साथ बरामद किया और सुप्रीम कोर्ट में पेश किया। जहां उसका बयान दर्ज कर पीड़िता व परिवार को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया। इस बीच दुराचार के आरोपी पूर्व गृह राज्य मंत्री चिन्मयानंद से 5 करोड़ रुपये की मांग करने का वीडियो वायरल भी वायरल हुआ। 

चिन्मयानंद की ओर से पीड़िता पर ब्लैकमेलिंग करने की शिकायत की गई। जिसकी एफआईआर दर्ज की गई है। पीडिता ने 5 सितंबर 19 को लोधी रोड, नई दिल्ली में विस्तृत शिकायत की। सुप्रीम कोर्ट ने ब्लैकमेलिंग और दुराचार दोनों मामलों की विवेचना की मॉनिटरिंग इलाहाबाद हाईकोर्ट को सौंपी। हाईकोर्ट के निर्देशानुसार एसआईटी ने सभी पहलुओं पर विचार कर पुलिस रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दी है।
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