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#LadengeCoronaSe : चीन निर्मित उपकरण ही आ रहे काम, 90 फीसदी से ज्यादा बाजार पर कब्जा

Sun, 02 May 2021 01:27 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 02 May 2021 01:27 AM IST
सार

  • चीन में बना हुआ हो या फिर देश में, लोगों को चाहिए हर हाल में ऑक्सीमीटर
  • दो से ढाई हजार में भी लोगों को मुश्किल से मिल पा रही है ऑक्सीजन नापने की मशीन

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China-made equipment is coming, market occupies more than 90 percent
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

पिछले वर्ष डोकलाम विवाद के बाद देश में चीन निर्मित वस्तुओं के बहिष्कार की मुहिम भले ही चली हो लेकिन अब कोरोना की दूसरी लहर में चीन निर्मित ही तमाम मेडिकल उपकरण बाजार में एक बार फिर से छाए हुए हैं। प्रयागराज में चीन आयातित पल्स ऑक्सीमीटर एवं अन्य उपकरण की भरमार है। केमिस्टों का भी कहना है कि यह वक्त चीन निर्मित वस्तुओं के बहिष्कार का नहीं, बल्कि लोगों की जान बचाने का है। प्रयागराज की अधिकांश मेडिकल की दुकानों में 90 फीसदी से  ऑक्सीमीटर, थर्मामीटर एवं अन्य उपकरण मेड इन चीन के ही बिक रहे हैं। बहुत से उपकरण ताइवान के रास्ते कारोबारी मंगवा रहे हैं, फिर भी मेडिकल उपकरणों की यहां कमी बनी हुई है।

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पिछले वर्ष चीन से हुए विवाद के बाद वहां बने उत्पादों के बहिष्कार की मुहिम शुरू हुई तो देश में ही कुछ कंपनियों ने ऑक्सीमीटर एवं अन्य सर्जिकल आइटम बनाने की शुरूआत की। प्रयागराज के बाजार में इसकी आपूर्ति भी ठीकठाक होने लगी, लेकिन कोविड के मामले बढ़ने के कारण ऑक्सीमीटर दुकानों से एकदम नदारद हो गए हैं, इस वजह से प्रयागराज एवं आसपास के  कई शहरों में इसकी कमी हो गई है। ऐसे में लोग जो भी ब्रांड मिल पा रहे हैं, उसे खरीदने में गुरेज नहीं कर रहे हैं। बाजार में जो ब्रांड मिल भी रहे हैं उसमें 90 फीसदी से ज्यादा चीन में निर्मित ब्रांड है। शाहगंज में सर्जिकल आइटम के थोक कारोबारी पवन जायसवाल बताते हैं कि  बाजार में चीनी ऑक्सीमीटर शुरू से ही  हावी रहा है।
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कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीमीटर की डिमांड बहुत ज्यादा बढ़ गई। माइक्रोटेक समेत तमाम कंपनियां मांग के अनुरूप इसकी सप्लाई नहीं कर पा रही है। खरीदने वाले भी इस बात की परवाह नहीं करते कि ऑक्सीमीटर भारत निर्मित है या चीन निर्मित। अधिकांश लोगों का यही सोचना है कि उन्हें किसी तरह से ऑक्सीमीटर मिल जाए। प्रयाग केमिस्ट एसोसिएशन के लालू मित्तल बताते हैं कि  चाइनीज प्रोडक्ट का ज्यादा विकल्प न मिलने की वजह एक बार फिर से बाजार में इनकी बिक्री तेज हो गई है। सर्जिकल आइटम में चाइनीज कंपनियों की ज्यादा पैठ है। तमाम प्रतिबंध होने की वजह से एवं  मांग को पूरा करने के लिए आयातकों और चीन की कंपनियों ने  सिंगापुर और ताइवान के रास्ते भारत में माल भेजना शुरू  कर दिया है।

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सर्जिकल आइटम में 90 फीसदी चीनी उत्पाद 

शहर के तमाम मेडिकल स्टोर पर मिलने वाले सर्जिकल प्रोडक्ट में अभी भी चाइनीज कंपनियों का ही कब्जा है। केमिस्ट सचेत गोयल बताते हैं कि ऑक्सीमीटर, हैंड ग्लब्स, बीपी मशीन, पैथोलॉजी किट समेत तमाम मेडिकल उपकरण पर अब भी चाइना पर भी निर्भरता  है।  कोई विकल्प न होने की वजह से मजबूरी में लोगों इन चाइनीज उपकरण को खरीदने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है।

दो से ढाई हजार रुपये में भी नहीं मिल पा रहे ऑक्सीमीटर

मौजूदा कोविड-19 संकट से जिले में ऑक्सीमीटर की भारी कमी हो गई है, इससे उपभोक्ताओं के लिए शायद ही कोई विकल्प बचा हो। चीन में निर्मित ऑक्सीमीटर की ही सप्लाई हो पा रही है। होली के पूर्व 400 से 500 रुपये में मिलने वाला ऑक्सीमीटर अब ढूंढने से भी दो से ढाई हजार रुपये में भी मुश्किल से मिल पा रहा है। केमिस्ट अजीत जैन ने बताया कि हर रोज दुकान पर ग्राहक ऑक्सीमीटर के लिए आते हैं, लेकिन माल न होने की वजह से उन्हें मायूस ही लौटना पड़ रहा है।

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