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Children Hospital Prayagraj : गर्मी में भट्ठी बना वार्ड पड़ा खाली, गलियारे में मासूम बता रहे बदहाली

Mon, 19 May 2025 01:39 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 19 May 2025 01:39 PM IST
सार

इन दिनों गर्मी का प्रचंड रूप देखने को मिल रहा है। तापमान में निरंतर वृद्धि हो रही है। इसके बाद भी सरोजनी नायडू बाल रोग चिकित्सालय (चिल्ड्रेन अस्पताल) में बच्चों को गर्मी से बचाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं।

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Children Hospital Prayagraj: Ward turned into a furnace in summer, lying empty
चिल्ड्रेन अस्पताल में मरीज फर्श पर लेटने के लिए बाध्य। पास में कुत्ते भी सो रहे हैं। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इन दिनों गर्मी का प्रचंड रूप देखने को मिल रहा है। तापमान में निरंतर वृद्धि हो रही है। इसके बाद भी सरोजनी नायडू बाल रोग चिकित्सालय (चिल्ड्रेन अस्पताल) में बच्चों को गर्मी से बचाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं।

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इमरजेंसी और आईसीयू वार्ड के कुछ ऐसी तो ठीक कराए गए हैं, लेकिन अस्पताल की दूसरी मंजिल पर बना जनरल वार्ड भट्ठी की तरह तप रहा है। इसकी वजह से लोग अपने बच्चों को वार्ड में नहीं छोड़ना चाहते हैं। वह बच्चों को लेकर वार्ड के बाहर बने गलियारे में बैठे रहते हैं। ऐसे में इस वार्ड के सभी 20 बेड खाली पड़े हैं।
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मरीजों व तीमारदारों की बात तो अलग है, खुद चिकित्सक तक यहां रुकना नहीं चाहते। इसकी वजह से जनरल वार्ड में हमेशा सन्नाटा पसरा रहता है। चिकित्सक सुबह के समय आधे घंटे के लिए वार्ड का राउंड लगाने आते हैं। सिर्फ इसी दौरान वार्ड में बच्चे मिलते हैं।
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इस वार्ड में उल्टी-दस्त व डायरिया से पीड़ित बच्चों को भर्ती किया जाता है। रविवार को जब अमर उजाला की टीम ने वार्ड का मुआयना किया, तो वार्ड खाली मिला। वार्ड के बाहर गलियारे में सैदाबाद का एक परिवार बच्चे को लेकर चटाई पर बैठा मिला। इस दौरान मां अपने 45 दिन के बच्चे को गलियारे में लगे पंखे के नीचे ले जाकर सुलाने का प्रयास कर रही थी। हालांकि, गर्मी के कारण रो रहा बच्चा चुप होने का नाम नहीं ले रहा था।

जब इस परिवार से पूछा गया कि वह बच्चे को लेकर वार्ड में मौजूद क्यों नहीं हैं तो उन्होंने बताया कि अंदर बहुत गर्मी है। बाहर गलियारे में थोड़ी राहत है। बच्चे को पिछले चार दिनों से उल्टी व दस्त की शिकायत है, जिसकी वजह से उसे अस्पताल में भर्ती कराया है।


गलियारे में कुत्तों के साथ सोने को मजबूर हैं तीमारदार

चिल्ड्रेन अस्पताल में इमरजेंसी और आईसीयू वार्ड के बाहर बने गलियारे में तीमारदार लेटे-बैठे रहते हैं। क्योंकि, इस अस्पताल में रैन बसेरे की सुविधा नहीं है। वहीं, अस्पताल में सुरक्षा के उचित इंतजाम न होने की वजह से बेसहारा कुत्ते भी वार्ड तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में तीमारदारों को कुत्तों के आसपास ही सोना पड़ता है।

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