प्रयागराज के बीस फीसदी बच्चे कमजोर, अज्ञानता सेहत की जंग पर भारी
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विस्तार
कुपोषण और इसके खिलाफ लड़ाई में प्रशासनिक दावों की सच्चाई जानने के लिए अमर उजाला ने गांवों में जाकर पड़ताल की तो निराशाजनक स्थिति सामने आई। कोरांव के लेडिय़ारी स्थित मुसहर बस्ती के गुलाब, बुल्ले और सुरेश कुमार के बच्चे गंभीर रूप से कुपोषण का शिकार हैं। गांव में नवीन स्वास्थ्य केंद्र भी है लेकिन फार्मासिस्ट के भरोसे। ग्रामीण कम उम्र में ही अपनी बच्चियों की शादी कर रहे हैं।
यही वजह है कि बच्चे भी सामान्य से कमजोर पैदा होते हैं। हालांकि प्रधान श्याम नारायण का कहना था कि गांव में सब ठीक है। बाल विवाह की जानकारी उन्हें नहीं है। वहीं स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी शिव सिंह ने पोषण की योजनाओं के प्रति अनभिज्ञता जताई। आंगनबाड़ी सहायिका सुषमा देवी का कहना है कि सभी पात्रों को निर्धारित राशन दिया जा रहा है। एएनएम नीलम का भी दावा है कि गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच की जाती है।
सरकारी योजना का नहीं मिला लाभ
कोरांव के बड़ोखर गांव की मेहरुन्निसा की छह माह की बच्ची गंभीर कुपोषित की श्रेणी में है। मेहरुन्निसा ने बताया कि उसे दो महीने से किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिला है। कोरांव के पंवारी गांव की अनीता देवी का अनुभव भी इससे अलग नहीं है। उनकी तीन वर्ष की बच्ची कुपोषित है। फूलपुर ब्लाक के बौड़ई गांव में छह से अधिक बच्चे कुपोषित हैं। गांव के शशि प्रकाश, संतोष कुमार और अशोक कुमार के बच्चे कुपोषित हैं। इनका कहना था कि महीनों बाद नवंबर में अनाज मिला लेकिन सिर्फ चावल और गेहूं।
बच्चों के कुपोषित होने की नहीं थी जानकारी
दस बेड वाले सरोजनी नायडू बाल चिकित्सालय स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में दो बच्चे भर्ती थे। वहां भर्ती बच्चों की मां फतेहपुर की ममता एवं चाका ब्लाक के दानूपुर गांव की सरिता को बच्चों के इलाज से पहले नहीं पता था कि उनके बच्चे कुपोषित हैं। केंद्र प्रभारी राबिया और रीता का कहना है कि यहां भर्ती बच्चों की मांओं की काउंसलिंग भी की जाती है। इसके बावजूद कई बार ऐसा होता है कि बच्चे की तबीयत में सुधार होते ही परिवार वाले ले जाते हैं। इसके बाद घर पर भी उचित देखभाल नहीं कर पाते। केंद्र से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार कोरोना से पहले हर वर्ष करीब ढाई सौ बच्चे भर्ती होते थे लेकिन इस वर्ष अभी तक 100 से भी कम बच्चे आए। दिसंबर में अब तक नौ तथा नवंबर में सात ही बच्चे भर्ती किए गए थे।
मुसहर बस्ती में बदल गए हालात
गर्भवती महिलाओं अंजली और पिंका का कहना था कि समय-समय पर उनके स्वास्थ्य की जांच होती है। इन प्रयासों का नतीजा है कि इस बस्ती में करीब 200 लोग रहते है। इनमें एक बच्ची काफी कमजोर है। उसके कुपोषित होने की बात कही जा रही है। ग्राम प्रधान रुचि के मुताबिक झोपड़ी में रहने वाले 22 परिवारों को पिछले वर्ष ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान मिला है। कुछ परिवारों के पास अब भी मकान नहीं है। उन्हें जल्द ही आवास योजना के अंतर्गत लाया जाएगा।
| कुपोषित | अति कुपोषित | |
| शहर | 9548 | 1892 |
| ग्रामीण | 67461 | 11674 |
| कुल | 77009 | 13566 |
‘कुपोषण से संबंधित रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है। पोषण से संबंधित और राशन आपूर्ति समेत अन्य योजनाओं की समीक्षा की गई है। जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। जल्द ही स्थिति सुधरेगी।’ - आर.रमेश कुमार, मंडलायुक्त