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महज 16 साल की उम्र में कत्ल कर सुर्खियों में आया था छोट्टन गिरि
Thu, 10 Dec 2020 08:56 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 10 Dec 2020 08:56 PM IST
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prayagraj news : छोट्टन गिरी।
- फोटो : prayagraj
तकरीबन डेढ़ दशक पहले महज 16 साल की उम्र में मनोज उर्फ छोट्टन गिरि ने तत्कालीन सपा नेता की हत्या कर सनसनी फैला दी थी। पहले से अपने साथियों संग घात लगाए छोट्टन ने 29 जून 2005 की भोर में शौच जाते वक्त सपा नेता मोहनलाल यादव उर्फ मुनीम की गोली और बम मारकर निर्मम हत्या कर दी थी।
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इसके बाद गांव में जमकर बवाल, आगजनी और तोडफ़ोड़ हुई थी। कुछ साल बाद छोट्टन जमानत पर बाहर आया। इसी बीच नौ फरवरी 2014 को उस पर गोली और बम से कातिलाना हमला किया गया। छोट्टन ने उस वक्त न केवल अपनी जान बचाई। बल्कि फिल्मी स्टाइल में बाइक पर उल्टे बैठकर राइफल से गोलियां चलाते हुए वहां से भाग निकला था। इस दौरान गोली लगने से दो की हत्या हुई थी। तभी से छोट्टन जेल में ही बंद है।
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- फोटो : prayagraj
थाना क्षेत्र के उस्तापुर-महमूदाबाद गांव के ग्रामीण आज भी 29 जून 2005 तथा नौ फरवरी 2014 की तारीख नहीं भूले हैं। इन दो तारीखों के कारण गांव में जमकर बवाल, आगजनी और तोडफ़ोड़ हुई थी। कई दिनों तक गांव में पुलिस के साथ ही पीएससी बल को तैनात किया गया था। 29 जून 2005 की भोर में तकरीबन पांच बजे सपा नेता मोहनलाल यादव उर्फ मुनीम घर से शौच को जा रहे थे। तभी पहले से घात लगाए बदमाशों ने उन पर गोली और बम से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। मुनीम की मौके पर ही मौत हो गई थी।
इस हत्या में छोट्टन गिरि भी निरुद्घ था। कई साल बाद वह जमानत पर छूटकर आया तो बड़े भाई प्रमोद उर्फ बब्लू गिरि के साथ जमीन के कारोबार में जुट गया। दोनों भाईयों ने कुछ ही महीनों में लाखों रुपये कमाए। इसी बीच नौ फरवरी 2014 की सुबह छोट्टन घर से किसी को प्लाट दिखाने के लिए निकला था। तभी उस पर गोली और बम से जानलेवा हमला कर दिया गया। हमले में छोट्टन बाल-बाल बच गया और भागते हुए घर पहुंचा। वहां से राइफल लेकर आया और बाइक पर उल्टे बैठकर गोलियां बरसाते हुए गांव से भाग निकला। फायरिंग में बाल पुष्टाहार विभाग के सीनियर क्लर्क हरिश्चंद्र पासी, शंभू, रंजीत और राजू नामक युवक को गोली लगी थी। हमले में हरिश्चंद्र और कटका गांव के शंभू की मौत हो गई थी। तभी से छोट्टन जेल में ही बंद है।
इस हत्या में छोट्टन गिरि भी निरुद्घ था। कई साल बाद वह जमानत पर छूटकर आया तो बड़े भाई प्रमोद उर्फ बब्लू गिरि के साथ जमीन के कारोबार में जुट गया। दोनों भाईयों ने कुछ ही महीनों में लाखों रुपये कमाए। इसी बीच नौ फरवरी 2014 की सुबह छोट्टन घर से किसी को प्लाट दिखाने के लिए निकला था। तभी उस पर गोली और बम से जानलेवा हमला कर दिया गया। हमले में छोट्टन बाल-बाल बच गया और भागते हुए घर पहुंचा। वहां से राइफल लेकर आया और बाइक पर उल्टे बैठकर गोलियां बरसाते हुए गांव से भाग निकला। फायरिंग में बाल पुष्टाहार विभाग के सीनियर क्लर्क हरिश्चंद्र पासी, शंभू, रंजीत और राजू नामक युवक को गोली लगी थी। हमले में हरिश्चंद्र और कटका गांव के शंभू की मौत हो गई थी। तभी से छोट्टन जेल में ही बंद है।