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भगवान भास्कर को अर्घ्य के बाद डाला छठ पर्व पूर्ण

Mon, 04 Nov 2019 01:57 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 04 Nov 2019 01:57 AM IST
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Chhath festival completed after Arghya to Lord Bhaskar
Chhath festival completed after Arghya to Lord Bhaskar - फोटो : CITY DESK
प्रयागराज। सूर्योपासना का चार दिनी डाला छठ व्रत पूरा हुआ। व्रती महिलाओं ने शनिवार को अस्ताचलगामी सूर्य के बाद रविवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर अपने बेटे, पति सहित परिवार की मंगलकामना के लिए आशीष मांगा। बरगदघाट, बलुआघाट, संगम, सलोरी, अरैल, झूंसी, दशाश्वमेध, तेलियरगंज, नीवा, नीमसराय सहित तकरीबन सभी घाटों पर व्रती महिलाएं पूरे परिवार के साथ पूजा के लिए जुटीं तो उनकी चहल-पहल से रात का भ्रम जाता रहा।
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भोर से कई घंटे पहले ही सुबह हुई। व्रती महिला के साथ पूरा परिवार तैयार होकर घाट पर पहुंचा। तमाम लोग गाड़ियों से गए लेकिन बड़ी संख्या में व्रती महिलाओं ने परिवार के साथ नंगे पांव चलकर ही घर से घाट तक का सफर पूरा किया। व्रत की पूर्णता का उत्साह ऐसा रहा कि सुबह की सिहरन भी बेमानी रही। व्रती महिला सहित परिवार की अन्य महिलाएं भी छठ के गीत गाती हुईं घाट पर पहुंचीं। उनकी रवानगी से घर से घाट तक चहल-पहल बनी रही।
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व्रती महिलाओं के उत्साह ने सूर्यदेव के रथ को रोक दिया था। सूर्यदेव के उगने से काफी पहले ही व्रती महिलाओं घाटों पर आ डटीं। सूर्योदय पर अर्घ्य से पहले तैयारियां की गईं। एक बार फिर अपने घाट पर बनाई गई पूजा की वेदी पर जोड़कर ईख लगाई गई। पूजा के बाद व्रती महिलाएं घुटने या कमर भर पानी में खड़ी होकर सूर्योदय की प्रतीक्षा करती रहीं और सूर्य की पहली किरण के साथ अर्घ्य दिया। हालांकि यह क्रम सूर्योदय के बाद भी कई घंटे तक जारी रहा। एक बार फिर पुरुष ही डाला लेकर घाटों तक गए और लेकर लौटे। सजे सूप या कलश पर रखा जलता हुआ दीया उसी तरह घर से लेकर घाट तक पहुंचे। जैसे-जैसे महिलाएं घाट पर पहुंचीं, सूर्यदेव को अर्घ्य देकर लौटती रहीं।
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घाट पर पूजा पूरी करने के बाद घाट पर और घर लौटकर भी व्रती महिलाओं ने अपनी सास या अपने से बड़ी महिलाओं के पांव छूकर उनका आशीर्वाद लिया। फिर कोई मीठी चीज खाकर व्रत का पारण किया। इसी के साथ छत्तीस घंटे का निर्जल व्रत पूरा हुआ। इससे पहले गोसाई कमरे में कुल देवता के सामने डाला खोलकर रखा गया और सभी को प्रसाद बांटा गया। चार दिन के कठिन अनुष्ठान के बावजूद आस्था और उत्साह से चेहरे चमकते रहे।
पड़ोसी, रिश्तेदार भी हुए पूजा में शामिल
जिन घरों में व्रती महिलाएं पूजा को उठीं, वहां तो जागरण हुआ ही, पूजा में शामिल होने की उत्सुक पड़ोस और रिश्ते की महिलाओं को भी फोन, मोबाइल से जगाया गया। थोड़ी ही देर में सभी एकत्र हुईं और फिर सभी साथ ही घाट तक गईं। वे महिलाएं भी साथ चलीं, जिन्होंने स्वयं तो पूजा नहीं की थी लेकिन उन्होंने अपनी किसी परिचित महिला को पूजन का सामग्री दे रखी थी।

छठ गीतों केबीच गुजरी रात
प्रयागराज। मीरापुर की उपमा श्रीवास्तव, नेहरूनगर की सुनयना राय, दरियाबाद की शांति सिंह सहित तमाम परिवारों में तो पूरी रात जागरण ही रहा। डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर आने के बाद परिवार में उल्लास का ही माहौल रहा। महिलाओं ने छठ के गीत गाकर सामूहिक रूप से उत्सव मनाया, वहीं उत्साह में बेटियों ने जमकर नृत्य भी किया। पहली बार व्रत रख रहीं मालवीय नगर की नेहा त्रिपाठी बोलीं, नृत्य और गीत के बीच निर्जल व्रत और रात कब गुजर गई, पता ही नहीं चला।
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